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बैग में मिले नवजात को भेजा शिशुगृह
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अमेठी। मुंशीगंज थाना क्षेत्र के गांव पूरे भगवानदीन मजरे त्रिलोकपुर में मंगलवार को बैग में मिले पांच माह के नवजात को बृहस्पतिवार को लखनऊ से पहुंची चाइल्ड लाइन टीम ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष की अनुमति के बाद टीम उसे लखनऊ स्थित शिशुगृह ले गई।
टांडा-बांदा हाइवे पर मुंशीगंज थाना क्षेत्र के गांव पूरे भगवानदीन मजरे त्रिलोकपुर निवासी आनंद ओझा के मकान के सामने मंगलवार को अज्ञात व्यक्ति द्वारा बैग में पांच माह का नवजात, कपड़े, दवाएं और पांच हजार रुपये के साथ ही अंग्रेजी में लिखा पत्र छोड़ा गया था। बैग से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी ने आनंद ओझा की पत्नी जावित्री को जानकारी दी। आनंद के परिवारीजनों के साथ अन्य ग्रामीण भी एकत्र हो गए।
ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे मुंशीगंज एसओ मिथिलेश सिंह ने पूरी जानकारी लेने के बाद नवजात को पालने के लिए आनंद ओझा और उनके भाई प्रमोद कुमार ओझा के सुपुर्द करते हुए इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद बृहस्पतिवार को गांव पहुंचे चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य अनुज कुमार मुंशीगंज थाने की एक महिला व एक पुरुष आरक्षी के साथ नवजात को अपनी सुपुर्दगी में लेकर संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में डॉ. हनुमान प्रसाद ने शिशु का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की रिपोर्ट टीम को सौंपी।
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इसके बाद टीम सदस्य ने नवजात को मुख्यालय स्थित जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष शत्रुघन प्रजापति, सदस्य डॉ. गुलाब चंद्र व बद्री नारायण शुक्ल के समक्ष पेश किया। समिति अध्यक्ष व सदस्यों की मौजूदगी में अभिलेखीय कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद नवजात को लखनऊ स्थित शिशुगृह ले जाने की अनुमति टीम को दी गई। टीम सदस्य नवजात को लेकर लखनऊ रवाना हो गए। समिति अध्यक्ष ने नवजात को लखनऊ भेजने की पुष्टि करते हुए बताया कि शिशु के माता-पिता के मिलने व उनकी पुष्टि तक उसकी देखभाल शिशुगृह में होगी।
बैग में नवजात के मिलने की खबर बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद चर्चा का विषय बनी रही। लोग पिता की ओर से बैग में रखे गए पत्र तथा उसकी मजबूरी पर चर्चा करते रहे। काफी लोग इस बात को जानने में लगे रहे कि आखिर ये बच्चा है किसका? हालांकि बच्चा किसका है और किस गांव का है? इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी।
आनंद ओझा की मानें तो वह शिशु की परवरिश करने को तैयार थे। बच्चे का पिता उन्हेें उसके पालने के एवज में कोई राशि नहीं देते तब भी वह उसका पालन पोषण करते। बृहस्पतिवार को उनके घर पहुंची चाइल्ड लाइन टीम ने कानून के तहत बच्चे को पालने का अधिकार उन्हें नहीं होने की बात कहते हुए उसे अपनी सुपुर्दगी में ले लिया।
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टांडा-बांदा हाइवे पर मुंशीगंज थाना क्षेत्र के गांव पूरे भगवानदीन मजरे त्रिलोकपुर निवासी आनंद ओझा के मकान के सामने मंगलवार को अज्ञात व्यक्ति द्वारा बैग में पांच माह का नवजात, कपड़े, दवाएं और पांच हजार रुपये के साथ ही अंग्रेजी में लिखा पत्र छोड़ा गया था। बैग से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी ने आनंद ओझा की पत्नी जावित्री को जानकारी दी। आनंद के परिवारीजनों के साथ अन्य ग्रामीण भी एकत्र हो गए।
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ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे मुंशीगंज एसओ मिथिलेश सिंह ने पूरी जानकारी लेने के बाद नवजात को पालने के लिए आनंद ओझा और उनके भाई प्रमोद कुमार ओझा के सुपुर्द करते हुए इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद बृहस्पतिवार को गांव पहुंचे चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य अनुज कुमार मुंशीगंज थाने की एक महिला व एक पुरुष आरक्षी के साथ नवजात को अपनी सुपुर्दगी में लेकर संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में डॉ. हनुमान प्रसाद ने शिशु का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की रिपोर्ट टीम को सौंपी।
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इसके बाद टीम सदस्य ने नवजात को मुख्यालय स्थित जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष शत्रुघन प्रजापति, सदस्य डॉ. गुलाब चंद्र व बद्री नारायण शुक्ल के समक्ष पेश किया। समिति अध्यक्ष व सदस्यों की मौजूदगी में अभिलेखीय कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद नवजात को लखनऊ स्थित शिशुगृह ले जाने की अनुमति टीम को दी गई। टीम सदस्य नवजात को लेकर लखनऊ रवाना हो गए। समिति अध्यक्ष ने नवजात को लखनऊ भेजने की पुष्टि करते हुए बताया कि शिशु के माता-पिता के मिलने व उनकी पुष्टि तक उसकी देखभाल शिशुगृह में होगी।
बैग में नवजात के मिलने की खबर बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद चर्चा का विषय बनी रही। लोग पिता की ओर से बैग में रखे गए पत्र तथा उसकी मजबूरी पर चर्चा करते रहे। काफी लोग इस बात को जानने में लगे रहे कि आखिर ये बच्चा है किसका? हालांकि बच्चा किसका है और किस गांव का है? इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी।
आनंद ओझा की मानें तो वह शिशु की परवरिश करने को तैयार थे। बच्चे का पिता उन्हेें उसके पालने के एवज में कोई राशि नहीं देते तब भी वह उसका पालन पोषण करते। बृहस्पतिवार को उनके घर पहुंची चाइल्ड लाइन टीम ने कानून के तहत बच्चे को पालने का अधिकार उन्हें नहीं होने की बात कहते हुए उसे अपनी सुपुर्दगी में ले लिया।