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जल्द शुरू होगी खादी के कपड़ों की बुनाई
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अमेठी। क्षेत्र के गुंगवाछ स्थित कंबल कारखाने में जल्द ही खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य भी शुरू होगा। खादी के कपड़ों की बुनाई के लिए करीब सात लाख की लागत से सोलर से संचालित चार लूम व अन्य छोटी मशीनें लगाई जा रही हैं। खादी के कपड़ों की बुनाई शुरू होने के बाद कारखाने में जहां 10 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं करीब 150 से अधिक अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य जून के प्रथम सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है।
क्षेत्र के गुंगवाछ स्थित कंबल कारखाने के दिन बहुरने लगे हैं। बीते दो दशक से लगे ग्रहण के बाद जहां कंबल कारखाना फिर से शुरू हो गया है वहीं कंबल की बुनाई का कार्य चल रहा है। वहीं अब इसी कंबल कारखाने के परिसर व भवन में खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य शुरू होने जा रहा है। आधुनिकता के इस युग के बावजूद भी खादी के कपड़ों की क्रेज कम नहीं हो रहा है।
खादी के कपड़ों की डिमांड को देखते हुए विभाग आधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रोडक्शन बढ़ाए जाने को लेकर कार्य कर रहा है। विभाग की ओर से कंबल कारखाना परिसर में खादी के कपड़ों की बुनाई के लिए करीब सात लाख की लागत से सोलर से संचालित चार लूम के साथ अन्य छोटी मशीनें लगाई जा रही हैं। जिसमें करीब चार बुनकर सहित 10 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
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वहीं बुनाई का कार्य शुरू होने के बाद जहां जिले के 150 लोगों को भी रोजगार से जोड़ने के साथ ही पहले से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि होगी। कंबल कारखाना परिसर में खादी के कपड़ों की बुनाई को लेकर सोलर से संचालित चार लूम लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अन्य कार्य भी तेजी से चल रहा है। खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य शुरू होने के बाद बुनकर सहित क्षेत्र के अन्य लोगों की भी रोजगार के अवसर मुहैया हो सकेंगे।
200 किलोग्राम तैयार होता है सूत
जिले में खादी के कपड़ों को तैयार करने के लिए सोलर चरखे के माध्यम से 200 किलोग्राम सूत तैयार होता है। विभाग की ओर से सूट कताई के लिए तहसील अमेठी में 50 सोलर चरखे तथा तहसील गौरीगंज के ब्लॉक जामो में 54 सोलर चरखे वितरित किए गये हैं। विभाग की ओर से सूत कताई के लिए रुई (तूनी) बनी बनाई उपलब्ध कराई जाती है। उसके बाद वजन के हिसाब से सूत कताई का पारिश्रमिक दिया जाता है।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि हाथ चरखे की अपेक्षा सोलर चरखा के वितरण के बाद करीब तीन साल से प्रोडक्शन दोगुना बढ़ गया है। बताया कि प्रतिमाह 200 किलोग्राम से अधिक सूत तैयार होता है। अभी तक बाहर जाता था अब यहीं पर बुनाई का कार्य शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सूत कताई के लिए और सोलर चरखों की व्यवस्था कराई जाएगी जिस के संबंध में शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में कपड़े की बुनाई का कार्य शुरू होने को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। लूम चलाने वाले बुनकर एक माह की ट्रेनिंग लेंगे। उन्होंने बताया कि कपड़ों की बुनाई के लिए चार सोलर लूम लग गए हैं। छोटी मशीनों को तैयार करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू की गई है। जून के प्रथम सप्ताह में संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
आम आदमी भी कर सकेंगे खरीदारी
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि कारखाने में तैयार कपड़ों को बिक्री के लिए परिसर में ही काउंटर संचालित कराने के संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। परिसर में जर्जर भवनों की मरम्मत के साथ ही नई दुकानों एवं अन्य भवन के निर्माण के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। सड़क की ओर दुकानें बनने के बाद कारखाने में तैयार कपड़ों और कंबलों की बिक्री के लिए काउंटर बनाया जाएगा जहां आम आदमी पहुंचकर खरीदारी कर सकेंगे।
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क्षेत्र के गुंगवाछ स्थित कंबल कारखाने के दिन बहुरने लगे हैं। बीते दो दशक से लगे ग्रहण के बाद जहां कंबल कारखाना फिर से शुरू हो गया है वहीं कंबल की बुनाई का कार्य चल रहा है। वहीं अब इसी कंबल कारखाने के परिसर व भवन में खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य शुरू होने जा रहा है। आधुनिकता के इस युग के बावजूद भी खादी के कपड़ों की क्रेज कम नहीं हो रहा है।
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खादी के कपड़ों की डिमांड को देखते हुए विभाग आधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रोडक्शन बढ़ाए जाने को लेकर कार्य कर रहा है। विभाग की ओर से कंबल कारखाना परिसर में खादी के कपड़ों की बुनाई के लिए करीब सात लाख की लागत से सोलर से संचालित चार लूम के साथ अन्य छोटी मशीनें लगाई जा रही हैं। जिसमें करीब चार बुनकर सहित 10 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
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वहीं बुनाई का कार्य शुरू होने के बाद जहां जिले के 150 लोगों को भी रोजगार से जोड़ने के साथ ही पहले से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि होगी। कंबल कारखाना परिसर में खादी के कपड़ों की बुनाई को लेकर सोलर से संचालित चार लूम लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अन्य कार्य भी तेजी से चल रहा है। खादी के कपड़ों की बुनाई का कार्य शुरू होने के बाद बुनकर सहित क्षेत्र के अन्य लोगों की भी रोजगार के अवसर मुहैया हो सकेंगे।
200 किलोग्राम तैयार होता है सूत
जिले में खादी के कपड़ों को तैयार करने के लिए सोलर चरखे के माध्यम से 200 किलोग्राम सूत तैयार होता है। विभाग की ओर से सूट कताई के लिए तहसील अमेठी में 50 सोलर चरखे तथा तहसील गौरीगंज के ब्लॉक जामो में 54 सोलर चरखे वितरित किए गये हैं। विभाग की ओर से सूत कताई के लिए रुई (तूनी) बनी बनाई उपलब्ध कराई जाती है। उसके बाद वजन के हिसाब से सूत कताई का पारिश्रमिक दिया जाता है।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि हाथ चरखे की अपेक्षा सोलर चरखा के वितरण के बाद करीब तीन साल से प्रोडक्शन दोगुना बढ़ गया है। बताया कि प्रतिमाह 200 किलोग्राम से अधिक सूत तैयार होता है। अभी तक बाहर जाता था अब यहीं पर बुनाई का कार्य शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सूत कताई के लिए और सोलर चरखों की व्यवस्था कराई जाएगी जिस के संबंध में शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में कपड़े की बुनाई का कार्य शुरू होने को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। लूम चलाने वाले बुनकर एक माह की ट्रेनिंग लेंगे। उन्होंने बताया कि कपड़ों की बुनाई के लिए चार सोलर लूम लग गए हैं। छोटी मशीनों को तैयार करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू की गई है। जून के प्रथम सप्ताह में संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
आम आदमी भी कर सकेंगे खरीदारी
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि कारखाने में तैयार कपड़ों को बिक्री के लिए परिसर में ही काउंटर संचालित कराने के संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। परिसर में जर्जर भवनों की मरम्मत के साथ ही नई दुकानों एवं अन्य भवन के निर्माण के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। सड़क की ओर दुकानें बनने के बाद कारखाने में तैयार कपड़ों और कंबलों की बिक्री के लिए काउंटर बनाया जाएगा जहां आम आदमी पहुंचकर खरीदारी कर सकेंगे।