{"_id":"6172fa06f9d6fe72b5093a26","slug":"karva-chauth-tomorrow-women-engaged-in-preparations-amethi-news-lko601246970","type":"story","status":"publish","title_hn":"करवा चौथ कल, तैयारियों में जुटीं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करवा चौथ कल, तैयारियों में जुटीं महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीगंज/जगदीशपुर (अमेठी)। कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जल व्रत रख शाम ढलने के बाद चांद देखकर व्रत का परायण करती हैं। इस बार करवा चौथ रविवार को पड़ेगा। पर्व की तैयारियों को लेकर बाजारों में महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी है। शुक्रवार को करवा, पूजा सामग्री संग साज-श्रंगार की सामग्री खरीदने को महिलाएं बाजारों में जुटी रहीं।
जिले में करवा चौथ 24 अक्तूबर (कल) मनाया जाएगा। सूर्योदय से पहले महिलाएं उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नियमित होने वाली पूजा-अर्चना के बाद पूरा दिन निर्जल व्रत रखेंगी। इसके बाद सोलह श्रंगार में तैयार होकर चांद निकलने के बाद पूजा पाठ कर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए व्रत का परायण करेंगी। इसकी तैयारी के लिए शुक्रवार को बाजारों में महिलाओं ने मिट्टी से तैयार तो किसी ने स्टील व चांदी के करवा की खरीदारी की। इसके अलावा महिलाओं ने पूजा सामग्री, साड़ी, गहनों व साज श्रंगार के सामान की भी जमकर खरीदारी की।
होती है अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
इस दिन भगवान शिव, गणेश जी और स्कन्द यानि कार्तिकेय के साथ बनी गौरी के चित्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में पति का साथ हमेशा बना रहता है। साथ ही अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन में सुख-शांति रहती है। चतुर्थी तिथि 24 अक्तूबर भोर तीन बजकर दो मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 अक्तूूबर की सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी।
विज्ञापन
करवा चौथ के दिन लगने वाले योग
पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार चतुर्थी तिथि को संकष्ठी चतुर्थी भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का पर्व गणेश जी को समर्पित होता है। इस दिन गणेश भगवान की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस बार 24 अक्तूबर करवाचौथ के दिन रात्रि 11 बजकर 35 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। यह योग मंगलदायक कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला होता है। वहीं देर रात एक बजकर दो मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।
करवाचौथ की पूजन विधि
करवा चौथ पूजा करने के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा के कोने को अच्छे से साफ कर लें। लकड़ी की चौकी पर शिवजी, मां गौरी और गणेश जी की तस्वीर स्थापित कर लें। उसके बाद उत्तर दिशा में एक जल से भरा कलश स्थापित कर उसमें अक्षत डाल दें। इसके बाद कलश पर रोली व अक्षत का टीका लगाएं और गर्दन पर मौली बांधें। तीन जगह चार-चार पूड़ी और चार लड्डू ले लें अब एक हिस्से को कलश के ऊपर, दूसरे को मिट्टी तथा करवे पर और तीसरे हिस्से को पूजा के समय महिलाएं अपनी साड़ी अथवा चुनरी के पल्लू में बांधकर रख लें।
इसके बाद करवा माता के सामने घी का दीपक जलाकर कथा का पाठ करें। पूजा करने के बाद साड़ी के पल्लू और करवे पर रखे प्रसाद को बेटे या अपने पति को तथा कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिला दें। पानी से भरे कलश को पूजा स्थल पर ही रहने दें। चंद्रोदय के समय इसी कलश के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी बना हो उसका भोग चंद्रमा को लगाएं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का परायण करें।
विज्ञापन
जिले में करवा चौथ 24 अक्तूबर (कल) मनाया जाएगा। सूर्योदय से पहले महिलाएं उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नियमित होने वाली पूजा-अर्चना के बाद पूरा दिन निर्जल व्रत रखेंगी। इसके बाद सोलह श्रंगार में तैयार होकर चांद निकलने के बाद पूजा पाठ कर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए व्रत का परायण करेंगी। इसकी तैयारी के लिए शुक्रवार को बाजारों में महिलाओं ने मिट्टी से तैयार तो किसी ने स्टील व चांदी के करवा की खरीदारी की। इसके अलावा महिलाओं ने पूजा सामग्री, साड़ी, गहनों व साज श्रंगार के सामान की भी जमकर खरीदारी की।
विज्ञापन
होती है अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
इस दिन भगवान शिव, गणेश जी और स्कन्द यानि कार्तिकेय के साथ बनी गौरी के चित्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में पति का साथ हमेशा बना रहता है। साथ ही अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन में सुख-शांति रहती है। चतुर्थी तिथि 24 अक्तूबर भोर तीन बजकर दो मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 अक्तूूबर की सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी।
विज्ञापन
करवा चौथ के दिन लगने वाले योग
पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार चतुर्थी तिथि को संकष्ठी चतुर्थी भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का पर्व गणेश जी को समर्पित होता है। इस दिन गणेश भगवान की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस बार 24 अक्तूबर करवाचौथ के दिन रात्रि 11 बजकर 35 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। यह योग मंगलदायक कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला होता है। वहीं देर रात एक बजकर दो मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।
करवाचौथ की पूजन विधि
करवा चौथ पूजा करने के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा के कोने को अच्छे से साफ कर लें। लकड़ी की चौकी पर शिवजी, मां गौरी और गणेश जी की तस्वीर स्थापित कर लें। उसके बाद उत्तर दिशा में एक जल से भरा कलश स्थापित कर उसमें अक्षत डाल दें। इसके बाद कलश पर रोली व अक्षत का टीका लगाएं और गर्दन पर मौली बांधें। तीन जगह चार-चार पूड़ी और चार लड्डू ले लें अब एक हिस्से को कलश के ऊपर, दूसरे को मिट्टी तथा करवे पर और तीसरे हिस्से को पूजा के समय महिलाएं अपनी साड़ी अथवा चुनरी के पल्लू में बांधकर रख लें।
इसके बाद करवा माता के सामने घी का दीपक जलाकर कथा का पाठ करें। पूजा करने के बाद साड़ी के पल्लू और करवे पर रखे प्रसाद को बेटे या अपने पति को तथा कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिला दें। पानी से भरे कलश को पूजा स्थल पर ही रहने दें। चंद्रोदय के समय इसी कलश के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी बना हो उसका भोग चंद्रमा को लगाएं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का परायण करें।