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Amethi News: कादूनाला के घने जंगल को मिली नई पहचान, अब ईको पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाएगा
Sat, 27 Aug 2022 06:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी (जगदीशपुर)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी (जगदीशपुर)
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2022 06:04 PM IST
सार
कादूनाला वेटलैंड संरक्षण एवं ईको पर्यटन स्थल को डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। जिसे जनता के लिए खोल दिया गया है।
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जगदीशपुर : कादूनाला परिक्षेत्र में तैयार जीवों की प्रतिमाएं।
- फोटो : AMETHI
विस्तार
ऋषियों-मुनियों की तपोस्थली व स्वतंत्रता संग्राम का गौरव गाथा समेटे कादूनाला का घना जंगल अब पर्यटन के मानचित्र पर कादूनाला वेटलैंड संरक्षण एवं ईको पर्यटन स्थल के बतौर पहचाना जाएगा। पर्यटन विभाग द्वारा करीब डेढ़ करोड़ की लागत से विकसित इस पर्यटन स्थल का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री व सांसद स्मृति ईरानी करेंगी। इसके बाद पूरा वेटलैंड क्षेत्र पर्यटकों के भ्रमण के लिए खोल दिया जाएगा।
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केंद्रीय मंत्री व अमेठी सांसद स्मृति ईरानी के प्रयास से इस पर्यटन स्थल के सौंदर्यीकरण का काम शुरू हुआ था। इसके लिए स्वीकृत बजट राशि से इलाके में सड़क निर्माण के साथ गेस्ट हाउस, प्रसाधन, पार्क, सेल्फी प्वाइंट, मचान, घाट पुल, बांध के साथ जगह-जगह तालाब विकसित कर इसे प्रकृति प्रदर्शन केंद्र बनाया गया है। पर्यटकों के आने के बाद भी जंगल साफ सुथरा रहे इसके लिए जगह-जगह कूड़ेदान रखे गए हैं। लखनऊ वाराणसी हाईवे पर स्थित कादूनाला पर्यटन स्थल के अगल-बगल का यह क्षेत्र पहले की अपेक्षा अब काफी सुरक्षित हो चुका है। कादूनाला की परिधि में पिछले पांच वर्षों के भीतर नया रेलवे लोहिया पुल, रेलवे अंडर पास, पुलिस चौकी भी बनाई गई है। यहां का एक छोर शहीद स्मारक भाले सुल्तानियों के आजादी की लड़ाई की गौरव गाथा समेटे है तो दूसरे छोर पर गुन्नौर स्थित नारद धाम स्थित अति प्राचीन शिवलिंग ऋषिमुनियों की तपोस्थली का गवाह बनेगा।
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कादूनाला का इतिहास
391.91 हेक्टेयर भू-भाग में फैले इस कादूनाला वन क्षेत्र को उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा वर्ष 1955 में आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। इस वन क्षेत्र से होकर निकले कादूनाला का उद्गम अमेठी जिले के तिलोई तहसील की राइल झील से हुआ है। यहां पर इसे नैया नाला के नाम से जाना जाता है। यह नाला इस वन क्षेत्र के कक्ष संख्या एक, दो, तीन, और चार से होकर बाहर निकलता है। चार किलोमीटर आगे जाकर गाजनपुर के पास गोमती नदी में समाहित हो जाता है।
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कुछ अलग सा पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व
कादूनाला वन क्षेत्र का अपना पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है। इस क्षेत्र के निकट गुन्नौर में नारद मुनि आश्रम धाम है। यहां पर अति प्राचीन शिवालय है। किंवदंती है कि इस मंदिर में गुप्त शिव लिंग की स्थापना नारद मुनि ने अपने हाथों से की थी। कादूनाला पर्यटन स्थल और नारद मुनि धाम मंदिर के बीच बह रहा कादूनाला कयाधू का अपभ्रंश है। बताते हैं कि आज का कादूनाला कालांतर में हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधू के नाम पर है और भक्त प्रहलाद का जन्म भी यहीं पर होना बताया जाता है। कादूनाला के निकट ही भाले सुल्तानी राजपूतों एवं अंग्रेजी सेना के मध्य वर्ष मार्च 1857 में भीषण युद्ध हुआ था। इस स्वतंत्रता संग्राम युद्ध में राजपूतों के शूरवीरता कि कहानी भी इस क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस युद्ध में 600 से अधिक भाले सुल्तानी राजपूतों के शहीद होने का अपना अलग इतिहास है।
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, मिलेगा पूरा लुफ्त बच्चों
पर्यटन स्थल बन जाने से इस पूरे इलाके में पर्यटनों का आवागमन बढ़ेगा। इससे आस पास के पटरी दुकानदारों की आमदनी बढ़ने के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। इसके साथ ही आटो रिक्शा चालकों व धार्मिक महत्व के स्थलों पर दर्शन के समय फूलमाला और प्रसाद की बिक्री से सभी की आमदनी भी बढ़ेगी। कादूनाला के इस घने जंगल में पर्यटन स्थल बन जाने से क्षेत्रीय लोगों के साथ ही हाईवे से निकलने वाले राहगीर भी यहां ठहर कर ईको पर्यटन का पूरा लुफ्त उठा सकेंगे। यहां घूमने के लिए आने वाले बच्चों को मौज मस्ती के साथ ही पुराने इतिहास की जानकारी भी मिलेगी।