फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   Gram pradhan reprenstative takes responsbility, lady gram pradhan without work

महिला ग्राम प्रधान का सिर्फ नाम, पति देवर या प्रतिनिधि निपटा रहे काम

Wed, 09 Nov 2022 12:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Nov 2022 12:06 AM IST
विज्ञापन
Gram pradhan reprenstative takes responsbility, lady gram pradhan without work
गौरीगंज (अमेठी)। जिले की 352 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान चुनी गईं महिलाओं की शक्ति महज उनके नाम तक ही सीमित है। आरक्षण की मजबूरी ने महिलाओं को ग्राम प्रधान तो बना दिया है, लेकिन असली प्रधान तो उनके प्रतिनिधि हैं। अधिकांश ग्राम पंचायतों में तो महिला ग्राम प्रधान को हस्ताक्षर करने तक का मौका नहीं दिया जाता। कमोबेश यही स्थिति आरक्षित सीटों पर जीते पुरुष ग्राम प्रधानों की भी है।
विज्ञापन

जिले में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 682 है। पंचायत चुनावों में 352 सीटों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। 352 महिला ग्राम प्रधानों में अनुसूचित जाति की 83, पिछड़ा वर्ग की 128 व सामान्य वर्ग की 128 महिलाएं शामिल हैं।
विज्ञापन

कुल ग्राम प्रधानों में आधे से अधिक महिलाएं हैं। जिन गांवों की ग्राम प्रधान महिलाएं हैं, वहां ग्राम प्रधान का पूरा काम उनके पति, पुत्र, देवर, ससुर या प्रतिनिधि देखते हैं। चुनाव जीतने के बाद इनकी मुहर, डोंगल व पंचायतों से जुड़े अभिलेख भी प्रतिनिधि ही संभालते हैं। अधिकांश गांवों में प्रधान के बजाए लोग उनको ही ग्राम प्रधान कहते हैं और समझते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

महिला ग्राम प्रधानों के अलावा अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के अधिकांश ग्राम प्रधानों को भी अपने प्रतिनिधि के पीछे चलना पड़ता है। कई गांवों में तो अपनी प्रतिष्ठा लगाकर अपने खास को प्रधान बनाने वाले मांगने पर भी उन्हें मुहर, डोंगल व पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं देते।
ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि इस कदर दबंगई पर आमादा रहते हैं कि वे उन मीटिंगों को भी अटेंड करते हैं, जहां प्रत्येक दशा में जन प्रतिनिधि का होना आवश्यक होता है। मीटिंग के एजेंडे पर भी प्रतिनिधि ही प्रधान के हस्ताक्षर कर देते हैं। कई गांवों में तो ग्राम प्रधान के बजाय बैंकों में ग्राम प्रधान का हस्ताक्षर तक प्रतिनिधि करते हैं।
भेटुआ ब्लॉक के गांव कोरारी लच्छनशाह की ग्राम प्रधान धनराजी हैं। धनराजी ने अपने ब्लॉक के एडीओ पंचायत को शिकायती पत्र देकर गांव के ही सुरेश सिंह व बृजेश यादव पर डोंगल, मुहर व ग्राम प्रधान निर्वाचित होने का प्रमाणपत्र रख लेने का आरोप लगाया है। धनराजी का कहना है कि मांगने पर भी उन्हें यह चीजें लौटाई नहीं जा रही हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि धनराजी के डोंगल व मुहर का प्रयोग करने के साथ आरोपी उसके हस्ताक्षर बनाकर गांव में विकास कार्य भी करा रहे हैं। इसमें सचिव भी उपरोक्त लोगों से मिला हुआ है। अब तक कराए गए कार्यों की जानकारी भी उसे नहीं है। मामले में सीडीओ सान्या छाबड़ा ने कहा है कि प्रतिनिधि को ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि ऐसी कोई शिकायत उन्हें मिलेगी तो पूरे मामले की जांच कराने के बाद संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
जिले में महिला ग्राम प्रधानों की वर्गवार संख्या
अनुसचित जाति महिला - 83
पिछड़ा वर्ग महिला - 141
सामान्य महिला - 128
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed