{"_id":"5fce5b408ebc3ecf7940c572","slug":"fourlane-road-started-without-compensation-amethi-news-lko5536804180","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना मुआवजा दिए बनने लगी फोरलेन सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना मुआवजा दिए बनने लगी फोरलेन सड़क
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेठी। बिना मुआवजा वितरित किए अयोध्या-रायबरेली 330-ए राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य शुरू कराए जाने से किसानों में जबरदस्त रोष है। सड़क निर्माण से पूर्व जद में आए जिन इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को कार्यदायी संस्था द्वारा शिफ्ट किया गया वे भी गंदा और बालू युक्त पानी उगल रहे हैं। दोहरी मार से किसान परेशान हैं।
अयोध्या से रायबरेली तक स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 330-ए के निर्माण में मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के कई गांवों के किसानों व व्यापारियों की भूमि ली गई है। जगदीशपुर से थौरी के बीच कई किसानों व व्यापारियों को विवाद के चलते अब तक मुआवजा नहीं दिया जा सका है।
इसकी फाइलें अभी लंबित चल रही हैं। कार्यदायी संस्था किसानों की उस भूमि पर भी सड़क का निर्माण शुरू कर चुकी है जिनका मुआवजा अब तक उन्हें नहीं मिला है। कार्यदायी संस्था की इस मनमानी के चलते किसानों में रोष व्याप्त है।
विज्ञापन
यही नहीं फोरलेन निर्माण की जद में सड़क किनारे लगे इंडिया मार्का टू हैंड पंपों को कार्यदायी संस्था की ओर से दूर शिफ्ट करा दिया गया लेकिन बोरिंग सही न होने से तकरीबन सभी हैंडपंप बालू व गंदा पानी दे रहे हैं।
ऐसे में उन ग्रामीणों को मजबूरन गंदा व बालू युक्त पानी पीना पड़ रहा है। संस्था की इस कारगुजारी से भी क्षेत्र के गई गांवों के ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें जल्द मुआवजा नहीं दिया गया तो वे धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की जिम्मेदारी पीएनसी इंफ्राटेक कंपनी को मिली है। गौरतलब होगा कि 21 दिसम्बर 2016 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 1051.50 करोड़ रुपए की लागत से 60 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना को मंजूरी दी थी।
विज्ञापन
अयोध्या से रायबरेली तक स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 330-ए के निर्माण में मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के कई गांवों के किसानों व व्यापारियों की भूमि ली गई है। जगदीशपुर से थौरी के बीच कई किसानों व व्यापारियों को विवाद के चलते अब तक मुआवजा नहीं दिया जा सका है।
विज्ञापन
इसकी फाइलें अभी लंबित चल रही हैं। कार्यदायी संस्था किसानों की उस भूमि पर भी सड़क का निर्माण शुरू कर चुकी है जिनका मुआवजा अब तक उन्हें नहीं मिला है। कार्यदायी संस्था की इस मनमानी के चलते किसानों में रोष व्याप्त है।
विज्ञापन
यही नहीं फोरलेन निर्माण की जद में सड़क किनारे लगे इंडिया मार्का टू हैंड पंपों को कार्यदायी संस्था की ओर से दूर शिफ्ट करा दिया गया लेकिन बोरिंग सही न होने से तकरीबन सभी हैंडपंप बालू व गंदा पानी दे रहे हैं।
ऐसे में उन ग्रामीणों को मजबूरन गंदा व बालू युक्त पानी पीना पड़ रहा है। संस्था की इस कारगुजारी से भी क्षेत्र के गई गांवों के ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें जल्द मुआवजा नहीं दिया गया तो वे धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की जिम्मेदारी पीएनसी इंफ्राटेक कंपनी को मिली है। गौरतलब होगा कि 21 दिसम्बर 2016 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 1051.50 करोड़ रुपए की लागत से 60 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना को मंजूरी दी थी।