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गोदामों में उर्वरक डंप, नहीं हो पा रहा वितरण
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02 : गौरीगंज : सचिवों की हड़ताल से बंद पड़ी संग्रामपुर के रालापुर अमेरुआ की सहकारी समिति। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए खरीफ सीजन में साधन सहकारी समितियों में तालाबंद कर सचिव हड़ताल पर हैं। सचिवों की हड़ताल से किसानों को बोआई के समय डीएपी व यूरिया नहीं मिल पा रही है तो धान क्रय केंद्र के रूप में प्रस्तावित समिति पर खरीद प्रभावित हो रही है। गोदाम में खाद का स्टॉक होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाए मौन बने हुए हैं।
किसानों को निर्धारित रेट पर उर्वरक मुहैया कराने के लिए पीसीएफ की ओर से साधन सहकारी समिति संचालित हैं। समिति पर कार्यरत सचिव लंबित मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार व हड़ताल कर रहे हैं। कर्मियों की हड़ताल से जिले में संचालित साधन सहकारी समितियों पर तालाबंद है। खरीफ सीजन पर समितियों पर तालाबंद होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समिति बंद होने से किसानों को बोआई के सीजन में आवश्यक डीएपी, एनपीके व यूरिया उर्वरक नहीं मिल पा रही है तो क्रय केंद्र के रूप में निर्धारित गोदामों पर धान खरीद शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में किसानों को जहां बोआई के समय आवश्यक उर्वरक नहीं मिल पा रही है तो उनकी तैयार धान की फसल बिक्री होने में भी परेशानी हो रही है। जिले के गोदाम समेत समितियों में खाद होने के बावजूद जिम्मेदार वैकल्पिक व्यवस्था कर खाद वितरित करने के बजाए मौन हैं।
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10,192 एमटी डीएपी का लक्ष्य
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन 2020 में अक्तूबर व नवंबर माह में 11,129 एमटी डीएपी की बिक्री हुई थी। खरीफ सीजन में 10,192 एमटी डीएपी की आवश्यकता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 6123 एमटी डीएपी जिले में अक्तूबर माह में मौजूद थी। इसमें 4007 एमटी डीएपी की बिक्री हो चुकी है। 1870 एमटी डीएपी गोदाम में तो 476 एमटी डीएपी इफ्को गोदाम के साथ ही समितियों पर मौजूद है। इतना ही नहीं 500 एमटी आईपीएल कंपनी की डीएपी का आवंटन भी प्राप्त हुआ है।
जिले में मौजूद उर्वरक स्टॉक (मीट्रिक टन में)
उर्वरक लक्ष्य मौजूद ब्रिकी स्टॉक
यूरिया 13154 13935 1883 12052
डीएपी 10192 5887 4007 1870
एनपीके 800 678 325 353
पोटाश 1100 858 464 394
जिले में नहीं उर्वरक की कमी
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि जिले में उर्वरक की कमी नहीं है। डिमांड के अनुसार खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार शासन व कंपनी से संपर्क किया जा रहा है। किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए सारे प्रबंध करते हुए प्वाइंट ऑफ सेल मशीन से आवश्यकतानुसार उर्वरक की बिक्री करते हुए निगरानी की जा रही है। उर्वरक नहीं मिल पाने या ओवर रेटिंग होने की दशा में किसानों से शिकायत करने की अपील की है।
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किसानों को निर्धारित रेट पर उर्वरक मुहैया कराने के लिए पीसीएफ की ओर से साधन सहकारी समिति संचालित हैं। समिति पर कार्यरत सचिव लंबित मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार व हड़ताल कर रहे हैं। कर्मियों की हड़ताल से जिले में संचालित साधन सहकारी समितियों पर तालाबंद है। खरीफ सीजन पर समितियों पर तालाबंद होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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समिति बंद होने से किसानों को बोआई के सीजन में आवश्यक डीएपी, एनपीके व यूरिया उर्वरक नहीं मिल पा रही है तो क्रय केंद्र के रूप में निर्धारित गोदामों पर धान खरीद शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में किसानों को जहां बोआई के समय आवश्यक उर्वरक नहीं मिल पा रही है तो उनकी तैयार धान की फसल बिक्री होने में भी परेशानी हो रही है। जिले के गोदाम समेत समितियों में खाद होने के बावजूद जिम्मेदार वैकल्पिक व्यवस्था कर खाद वितरित करने के बजाए मौन हैं।
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10,192 एमटी डीएपी का लक्ष्य
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन 2020 में अक्तूबर व नवंबर माह में 11,129 एमटी डीएपी की बिक्री हुई थी। खरीफ सीजन में 10,192 एमटी डीएपी की आवश्यकता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 6123 एमटी डीएपी जिले में अक्तूबर माह में मौजूद थी। इसमें 4007 एमटी डीएपी की बिक्री हो चुकी है। 1870 एमटी डीएपी गोदाम में तो 476 एमटी डीएपी इफ्को गोदाम के साथ ही समितियों पर मौजूद है। इतना ही नहीं 500 एमटी आईपीएल कंपनी की डीएपी का आवंटन भी प्राप्त हुआ है।
जिले में मौजूद उर्वरक स्टॉक (मीट्रिक टन में)
उर्वरक लक्ष्य मौजूद ब्रिकी स्टॉक
यूरिया 13154 13935 1883 12052
डीएपी 10192 5887 4007 1870
एनपीके 800 678 325 353
पोटाश 1100 858 464 394
जिले में नहीं उर्वरक की कमी
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि जिले में उर्वरक की कमी नहीं है। डिमांड के अनुसार खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार शासन व कंपनी से संपर्क किया जा रहा है। किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए सारे प्रबंध करते हुए प्वाइंट ऑफ सेल मशीन से आवश्यकतानुसार उर्वरक की बिक्री करते हुए निगरानी की जा रही है। उर्वरक नहीं मिल पाने या ओवर रेटिंग होने की दशा में किसानों से शिकायत करने की अपील की है।