{"_id":"6838abe9a65875a69107c847","slug":"even-after-monitoring-doctors-are-acting-arbitrarily-amethi-news-c-96-1-ame1008-141540-2025-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: निगरानी के बाद भी डॉक्टर कर रहे मनमानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: निगरानी के बाद भी डॉक्टर कर रहे मनमानी
Fri, 30 May 2025 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 30 May 2025 12:18 AM IST
विज्ञापन
केस एक
आंख की समस्या, खरीदनी पड़ी बाहर से दवा
सवनगी के दूधनाथ पांडेय ने बताया कि उन्हें आंख से संबंधित समस्या है। चिकित्सक ने परचे पर कुछ अंदर की दवा लिखी थी तो कुछ बाहर की। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर एक ड्राॅप मिला और दवाएं केंद्र पर नहीं मिलीं। बाहर मेडिकल स्टोर से करीब करीब 500 रुपये की दवा लेनी पड़ी।
केस दो
निजी मेडिकल स्टोर से खरीदी 600 रुपये की दवा
मरीज अफताब ने बताया कि उन्होंने चिकित्सक को दिखाया। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से करीब 400 रुपये की दवा लेनी पड़ी। पिछली बार बाहर निजी मेडिकल स्टोर से 600 रुपये की दवा लेनी लेनी पड़ी थी।
केस तीन
अंदर से नहीं मिलीं दवाएं
सरायहदय शाह निवासी हरि प्रसाद ने बताया कि ओपीडी में आधे घंटे लाइन लगाने के बाद चिकित्सक ने आगे और पीछे परचे पर दवा लिखी। अंदर दवाएं से नहीं मिली। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर दवा लेनी पड़ी।
विज्ञापन
केस चार
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर मिली दवा
मरीज रामपती ने बताया कि चिकित्सक को दिखाया था। कुछ अंदर की दवा लिखे थे। परचे पर लिखी गई दवा तीन दवाएं अंदर नहीं मिलीं तो प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से खरीदनी पड़ी। कहा कि अंदर की दवाओं से आराम कम मिलता है।
संवाद न्यूज एजेंसी
अमेठी सिटी। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, औचक निरीक्षण और निगरानी समिति गठित होने के बाद भी डॉक्टरों की ओर से मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने की मनमानी थम नहीं रही है। मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, फिर भी डॉक्टर निजी मेडिकल स्टोरों से जुड़कर मरीजों को बाहर की दवाएं लेने को मजबूर कर रहे हैं।
हाल ही में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह और सीएमएस की जांच में बाहर से दवाएं लिखी कई पर्चियां मिलने के बाद डॉक्टरों को नोटिस जारी कर चेताया गया था। सीएमओ ने बताया कि डॉक्टरों की निगरानी के लिए डॉ. राम प्रसाद, डॉ. पीके उपाध्याय और जिला कार्यक्रम प्रबंधक बसंत राय की समिति बनाई गई है, लेकिन टीम के अन्य कार्यों में व्यस्त होने से कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी पर अंकुश लगाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के चैंबर में वाइस रिकाॅर्डर सहित सीसीटीवी कैमरा लगवा कर सीएमएस कार्यालय संग निदेशालय से ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था की गई है। यह भी डॉक्टरों की मनमानी रोक नहीं पा रही है। विभाग का दावा है कि अस्पताल परिसर में दलाल व मेडिकल स्टोर संचालकों का प्रवेश वर्जित किया गया है, जबकि हकीकत इससे इतर है। दावा किया जा रहा है कि शिकायत मिलने पर टीम से जांच कार्रवाई जाती है।
मोटे कमीशन के लिए की जा रही मनमानी
स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिश इसलिए परवान नहीं चढ़ पा रही है, क्योंकि डॉक्टरों को दवा कंपनी मोटा कमीशन देने संग टूर पैकेज देती है। कमीशन व निजी लाभ पाने के लालच में डॉक्टर मनमानी कर रहे है। इतना ही नहीं सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो ग्रामीण अंचल में डॉक्टर तैनात होने से बच रहे हैं, ऐसे में डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित न हों, इसके लिए विभाग भी कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रख रहा है।
कमेटी बनाकर कराया जाएगा निरीक्षण
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि सभी चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिया गया है कि बाहर की दवाएं न लिखें। कमेटी के माध्यम से भी ओपीडी व दवा वितरण काउंटर का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जिस डॉक्टर की ओर से बाहर की दवा लिखी जाने की जानकारी मिलेगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
आंख की समस्या, खरीदनी पड़ी बाहर से दवा
सवनगी के दूधनाथ पांडेय ने बताया कि उन्हें आंख से संबंधित समस्या है। चिकित्सक ने परचे पर कुछ अंदर की दवा लिखी थी तो कुछ बाहर की। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर एक ड्राॅप मिला और दवाएं केंद्र पर नहीं मिलीं। बाहर मेडिकल स्टोर से करीब करीब 500 रुपये की दवा लेनी पड़ी।
केस दो
निजी मेडिकल स्टोर से खरीदी 600 रुपये की दवा
मरीज अफताब ने बताया कि उन्होंने चिकित्सक को दिखाया। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से करीब 400 रुपये की दवा लेनी पड़ी। पिछली बार बाहर निजी मेडिकल स्टोर से 600 रुपये की दवा लेनी लेनी पड़ी थी।
विज्ञापन
केस तीन
अंदर से नहीं मिलीं दवाएं
सरायहदय शाह निवासी हरि प्रसाद ने बताया कि ओपीडी में आधे घंटे लाइन लगाने के बाद चिकित्सक ने आगे और पीछे परचे पर दवा लिखी। अंदर दवाएं से नहीं मिली। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर दवा लेनी पड़ी।
विज्ञापन
केस चार
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर मिली दवा
मरीज रामपती ने बताया कि चिकित्सक को दिखाया था। कुछ अंदर की दवा लिखे थे। परचे पर लिखी गई दवा तीन दवाएं अंदर नहीं मिलीं तो प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से खरीदनी पड़ी। कहा कि अंदर की दवाओं से आराम कम मिलता है।
संवाद न्यूज एजेंसी
अमेठी सिटी। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, औचक निरीक्षण और निगरानी समिति गठित होने के बाद भी डॉक्टरों की ओर से मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने की मनमानी थम नहीं रही है। मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, फिर भी डॉक्टर निजी मेडिकल स्टोरों से जुड़कर मरीजों को बाहर की दवाएं लेने को मजबूर कर रहे हैं।
हाल ही में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह और सीएमएस की जांच में बाहर से दवाएं लिखी कई पर्चियां मिलने के बाद डॉक्टरों को नोटिस जारी कर चेताया गया था। सीएमओ ने बताया कि डॉक्टरों की निगरानी के लिए डॉ. राम प्रसाद, डॉ. पीके उपाध्याय और जिला कार्यक्रम प्रबंधक बसंत राय की समिति बनाई गई है, लेकिन टीम के अन्य कार्यों में व्यस्त होने से कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी पर अंकुश लगाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के चैंबर में वाइस रिकाॅर्डर सहित सीसीटीवी कैमरा लगवा कर सीएमएस कार्यालय संग निदेशालय से ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था की गई है। यह भी डॉक्टरों की मनमानी रोक नहीं पा रही है। विभाग का दावा है कि अस्पताल परिसर में दलाल व मेडिकल स्टोर संचालकों का प्रवेश वर्जित किया गया है, जबकि हकीकत इससे इतर है। दावा किया जा रहा है कि शिकायत मिलने पर टीम से जांच कार्रवाई जाती है।
मोटे कमीशन के लिए की जा रही मनमानी
स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिश इसलिए परवान नहीं चढ़ पा रही है, क्योंकि डॉक्टरों को दवा कंपनी मोटा कमीशन देने संग टूर पैकेज देती है। कमीशन व निजी लाभ पाने के लालच में डॉक्टर मनमानी कर रहे है। इतना ही नहीं सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो ग्रामीण अंचल में डॉक्टर तैनात होने से बच रहे हैं, ऐसे में डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित न हों, इसके लिए विभाग भी कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रख रहा है।
कमेटी बनाकर कराया जाएगा निरीक्षण
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि सभी चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिया गया है कि बाहर की दवाएं न लिखें। कमेटी के माध्यम से भी ओपीडी व दवा वितरण काउंटर का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जिस डॉक्टर की ओर से बाहर की दवा लिखी जाने की जानकारी मिलेगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।