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जननी सुरक्षा योजना की डेटा फीडिंग का काम ठप
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गौरीगंज (अमेठी)। जननी सुरक्षा योजना के तहत आउट सोर्सिंग के जरिए तैनात 14 पोर्टल हैंडल ऑपरेटरों का अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त हो गया। अनुबंध समाप्त होने पर सभी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। ऐसे में जननी सुरक्षा योजना के तहत होनेे वाली सभी कवायदों की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है।
एनएचएम के जरिए जिले में जननी सुरक्षा योजना के तहत संचालित कार्यक्रमों का संपूर्ण विवरण सुरक्षित रखने केे लिए व उसे विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन करने के लिए सभी 13 ब्लॉकों पर एक-एक तथा जिला स्तर पर एक पोर्टल हैंडल ऑपरेटर की आउट सोर्सिंग के जरिए अप्रैल 2022 में तैनाती की गई थी। इनका अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त हो गया।
पूर्व से ही 30 सितंबर तक के लिए की गई तैनाती की जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदारों ने उनकी समय सीमा नहीं बढ़ाई। वहीं सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने एक अक्तूबर को सभी अधीक्षकों को पत्र भेजकर अपने अस्पताल में ऑपरेटरों से सेवाएं न लेने का आदेश दिया है।
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सरकार गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं के लिए योजनाएं संचालित कर रही है। इन्हीं में जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल व उपकेंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उनका मदर ट्रैकिंग कार्ड बनाया जाता है। कार्ड में गर्भवती के (पहली बार गर्भवती हुई हैं या दूसरी बार, उसको लगने वाले टीके का समय, प्रसव होने के बाद महिला व नवजात को टीका लगाने का समय) समेत संपूर्ण विवरण का डेटा तैयार किया जाता है।
इस मैनुअल रिपोर्ट को ऑपरेटर विभागीय पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन करने का काम करते थे। इसके साथ ही मिली रिपोर्ट का मूल्यांकन कर होने वाली साप्ताहिक समीक्षा बैठक में संबंधित को उसकी सूचना देकर अग्रिम कार्यवाही कराते थे। इसी तरह जिला स्तरीय ऑपरेटर पूरे जिले की सभी सीएचसी का डेटा एकत्र कर उसकी सूचना सीएमओ, मंडल व राज्य स्तर पर भेजते थे।
होगी परेशानी
डेटा के आधार पर ही जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर धनराशि समेत गर्भवती व प्रसूता को अन्य लाभ दिए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों के न होने से डेटा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकेगा। वहीं अगर कार्ड मिस हो जाए तो मरीज को अब तक कितना टीका लगा, कितना लगना शेष है तथा क्या उपचार किया जा रहा है उसकी जानकारी भी नहीं मिल पाएगी।
लखनऊ से होनी है तैनाती : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने बताया कि पिछले दिनों शासन से पत्र आया था कि अब ऑपरेटरों की आउट सोर्सिंग से होने वाली तैनाती जनपद स्तर से नहीं बल्कि लखनऊ से की जाएगी। कहा कि इसी वजह से जनपद स्तर से इन लोगों का अनुबंध नहीं बढ़ाया जा सका, शासन को पत्र भेजा गया है।
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एनएचएम के जरिए जिले में जननी सुरक्षा योजना के तहत संचालित कार्यक्रमों का संपूर्ण विवरण सुरक्षित रखने केे लिए व उसे विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन करने के लिए सभी 13 ब्लॉकों पर एक-एक तथा जिला स्तर पर एक पोर्टल हैंडल ऑपरेटर की आउट सोर्सिंग के जरिए अप्रैल 2022 में तैनाती की गई थी। इनका अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त हो गया।
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पूर्व से ही 30 सितंबर तक के लिए की गई तैनाती की जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदारों ने उनकी समय सीमा नहीं बढ़ाई। वहीं सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने एक अक्तूबर को सभी अधीक्षकों को पत्र भेजकर अपने अस्पताल में ऑपरेटरों से सेवाएं न लेने का आदेश दिया है।
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सरकार गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं के लिए योजनाएं संचालित कर रही है। इन्हीं में जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल व उपकेंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उनका मदर ट्रैकिंग कार्ड बनाया जाता है। कार्ड में गर्भवती के (पहली बार गर्भवती हुई हैं या दूसरी बार, उसको लगने वाले टीके का समय, प्रसव होने के बाद महिला व नवजात को टीका लगाने का समय) समेत संपूर्ण विवरण का डेटा तैयार किया जाता है।
इस मैनुअल रिपोर्ट को ऑपरेटर विभागीय पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन करने का काम करते थे। इसके साथ ही मिली रिपोर्ट का मूल्यांकन कर होने वाली साप्ताहिक समीक्षा बैठक में संबंधित को उसकी सूचना देकर अग्रिम कार्यवाही कराते थे। इसी तरह जिला स्तरीय ऑपरेटर पूरे जिले की सभी सीएचसी का डेटा एकत्र कर उसकी सूचना सीएमओ, मंडल व राज्य स्तर पर भेजते थे।
होगी परेशानी
डेटा के आधार पर ही जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर धनराशि समेत गर्भवती व प्रसूता को अन्य लाभ दिए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों के न होने से डेटा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकेगा। वहीं अगर कार्ड मिस हो जाए तो मरीज को अब तक कितना टीका लगा, कितना लगना शेष है तथा क्या उपचार किया जा रहा है उसकी जानकारी भी नहीं मिल पाएगी।
लखनऊ से होनी है तैनाती : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने बताया कि पिछले दिनों शासन से पत्र आया था कि अब ऑपरेटरों की आउट सोर्सिंग से होने वाली तैनाती जनपद स्तर से नहीं बल्कि लखनऊ से की जाएगी। कहा कि इसी वजह से जनपद स्तर से इन लोगों का अनुबंध नहीं बढ़ाया जा सका, शासन को पत्र भेजा गया है।