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Amethi News: वितरण केंद्रों पर डीएपी नदारद, किसान परेशान

Sun, 10 Nov 2024 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sun, 10 Nov 2024 01:22 AM IST
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DAP missing at distribution centres, farmers worried
 गौरीगंज ​स्थित इफको केंद्र पर पसरा सन्नाटा।
अमेठी सिटी। रबी की बोआई के समय इफको केंद्रों के साथ ही साधन सहकारी समितियों पर डीएपी खाद का टोटा किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है। सस्ती दर पर मिलने वाली खाद के लिए सुबह से समितियों पर लाइन लगाने वाले किसानों को दोपहर बाद हताश निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। हालांकि कृषि विभाग फास्फेटिक उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।
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जिले में रबी की बोआई के समय इफको सेवा केंद्रों पर यूरिया तो है लेकिन बोआई में सबसे जरूरी डीएपी खत्म है। शनिवार को अमेठी स्थित इफको के एग्रो केंद्र, गौरीगंज स्थित इफको केंद्र पर डीएपी की बोरी तो दूर केंद्र पर डीएपी का एक भी दाना नहीं था। वहीं, गौरीगंज के बाबूपुर स्थित साधन सहकारी समिति पर ताला लटक रहा था। संग्रामपुर स्थित गोरखापुर समिति, अमेठी ब्लॉक स्थित साधन सहकारी समिति कोरारी गिरधरशाह, महराजपुर, गड़ेरी व रामदयपुर में भी डीएपी नहीं है। सिर्फ यूरिया, नैनो डीएपी व यूरिया सागरिका ही उपलब्ध है।
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जगदीशपुर क्षेत्र स्थित साधन सहकारी समिति पूरबगांव, देवकली, रास्तमऊ, रानीगंज, मंगौली, टांडा व सहकारी विकास संघ में डीएपी नहीं है। ऐसे में गेहूं के साथ सरसों, मटर, चना, आलू की बोआई पिछड़ने की आशंका किसानों की परेशानी को कई गुना बढ़ा रही है। केंद्रों पर डीएपी नहीं मिल पाने से किसानों को बोआई के लिए बाजार से महंगी दर पर खाद खरीदने की परेशानी भी उठाना पड़ रही है।
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छलक उठी किसानों की पीड़ा
साधन सहकारी समिति निहालगढ़ पर सुबह से लाइन में लगे चौधरी का पुरवा निवासी मोहम्मद वसीम ने बताया कि दो बोरी डीएपी की जगह सिर्फ एक बोरी मिली है। नरेंद्र कुमार पाल ने कहा कि पांच बीघा गेंहू की बोआई करनी है। पांच बोरी डीएपी की जरूरत है, लेकिन सिर्फ दो बोरी ही डीएपी मिली है। उस पर भी नैनो यूरिया लेने का दबाव डाला जा रहा हैं। किसान शकील, राजेश सिंह, सद्दाम का भी कुछ ऐसा ही दर्द है।




रामगंज साधन सहकारी समिति पर ताला

भादर। ब्लाॅक के रामगंज स्थित साधन सहकारी समिति पर शनिवार को ताला लटकता मिला। किसान केंद्र पर आकर मायूस लौट रहे थे। सचिव प्रमोद कुमार शुक्ल ने बताया कि बृहस्पतिवार व शुक्रवार को 300 बोरी डीएपी का वितरण किया गया। केंद्र पर डीएपी नहीं है।



डीएपी नहीं सिर्फ यूरिया उपलब्ध
मुसाफिरखाना। ब्लॉक स्थित साधन सहकारी समिति पलिया, नेवादा, धरौली, जमुआरी में डीएपी नहीं है। यहां सिर्फ यूरिया ही उपलब्ध है। पिंडारा करनाई केंद्र पर 25 बोरी व दादरा केंद्र पर 30 बोरी डीएपी उपलब्ध मिली थी, जो मांग के अनुसार नाकाफी है।




1.60 लाख हेक्टेयर में होती है रबी की बुआई
रबी के मौसम में गेंहू के साथ तिलहन, दलहन, मक्का, जौ व अन्य फसलों की बोआई करीब 1,60,855 हेक्टेयर में होती है। जिसमें दलहन 12,859 हेक्टेयर, तिलहन 19077 हेक्टेयर व गेंहू, जौ मक्का की 1,28,923 हेक्टेयर में बोआई होती है। तिलहन व दलहन में एक बोरी प्रति एकड़ डीएपी डालने का औसत है।



रबी फसलों में समुचित मात्रा में डालें उर्वरक

कृषि वैज्ञानिक डॉ. शशांक शेखर सिंह ने बताया कि रबी सीजन में दलहनी, तिलहनी व गेंहू में उर्वरक की मात्रा समुचित मात्रा में डालनी चाहिए। बताया कि गेंहू की बोआई में अगर सिर्फ डीएपी डाल रहे हैं तो 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डालनी चाहिए। डीएपी नहीं डाल रहे हैं तो 120 किग्रा. नाइट्रोजन, 60 किग्रा. फासफोरस व 40 किग्रा. पोटास मिलाकर प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए।




जिले में फास्फेटिक उर्वरक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। इफको की रैक आ रही है। इसमें से 1361 एमटी डीएपी का रैक शुक्रवार को निकला है। जिसमें 915.3 एमटी डीएपी व 446.25 एमटी एनपीके है। उम्मीद है कि 11 व 12 नवंबर को डीएपी रैक गौरीगंज पहुंच जाएगी। जल्द ही सभी सेंटरों व समितियों पर डीएपी व खाद की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जाएगी।

डॉ. राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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