{"_id":"67cb45e789bbe5586607fbe7","slug":"crossing-every-obstaclein-favor-of-progress-amethi-news-c-96-1-ame1008-136103-2025-03-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: हर बाधा पार...तरक्की की तरफदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: हर बाधा पार...तरक्की की तरफदार
Sat, 08 Mar 2025 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:45 AM IST
विज्ञापन
अमेठी के रायपुर फुलवारी तोपखाना मोहल्ले में अचार बनाती संगीता प्रजापति।-स्रोत : (फाइल फोटो) स्व
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर हम उन महिलाओं की बात कर रहे हैं जो बाधाओं को तोड़ रही हैं, नए विचारों को जन्म दे रही हैं और समाज को बदलाव के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। महिला सम्मान, पहचान, प्रशंसा और आत्मविश्वास के विशेष दिवस पर शुभकामनाओं के साथ यह प्यारा से गुलदस्ता आपके लिए...आपके स्वाभिमान के लिए...।
पत्तल पर परोसी आत्मनिर्भरता
जगदीशपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मलावां ककरहिया निवासी अंजू यादव सामान्य गृहणी थीं। दूसरों पर निर्भर थीं। आर्थिक स्थिति भी सही नहीं थी। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था। वर्ष 2017 में समूह से जुड़ीं। इसके बाद उनकी दशा और दिशा बदलने लगी। समूह से करीब 1.3 लाख रुपये लेकर दोना-पत्तल बनाने का काम शुरू किया। अब खुद मशीन से उत्पाद तैयार कर बाजार में बिक्री कर रहीं हैं। दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं। अंजू कहती हैं कि परिस्थितियों से हारें नहीं, जूझकर आगे बढ़ें।
आचार उद्योग से बनाई पहचान
अमेठी ब्लॉक के रायपुर फुलवारी तोपखाना मोहल्ला स्थित संगीता प्रजापति की आज पूरे जिले में अपनी खास पहचान है। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की ठानी। तरक्की की सोच के साथ समूह से जुड़ीं। 15 हजार रुपये की लागत से अचार का व्यवसाय शुरू किया। आज आम, नींबू के साथ कटहल, सूरन, हरी मिर्च, लाल मिर्च, लहसुन, अदरक, आंवला, करौंदा का अचार तो मुरब्बा भी बना रही हैं। इस काम में उन्होंने गांव की महिलाओं को भी जोड़ा है। संगीता कहती हैं कि रूढि़यों से पार पाने की जरूरत है। सोच में बदलाव कर आगे बढ़ेंगी तो लक्ष्य जरूर मिलेगा।
विज्ञापन
ननका ने मछली पालन से परिवार को दी तरक्की
अमेठी सिटी। राजगढ़ गांव निवासी 80 वर्षीय ननका का प्रयास उनके पूरे परिवार की तरक्की का आधार बन गया है। असल में उन्होंने मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से मछली पालन का कार्य शुरू किया। आज साल में 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। ननका ने धान-गेहूं की खेती की जगह मछली पालन के लिए परिवार से बात की। परंपरागत खेती से हटकर मत्स्य पालन पर पहले कोई सहमत नहीं हुआ। किसी तरह से बात बनी। मत्स्य विभाग से मछली पालन के लिए 60% अनुदान पर वर्ष 2023–24 में तालाब की खोदाई का काम शुरू किया गया। तालाब तैयार हुआ तो पंगेसियस व देसी मछली का पालन किया गया। आठ से नौ महीने में मछलियां तैयार हो गईं और बाजार में अच्छे खरीददार भी मिले। मछलियों की बिक्री में 20 लाख के खर्च के सापेक्ष करीब 32 लाख रुपये मिले। इस तरह लगातार दो वर्षों से वह मछली पालन का कार्य कर रही हैं, जिसमें पूरा परिवार सहयोग कर रहा है।
विज्ञापन
पत्तल पर परोसी आत्मनिर्भरता
जगदीशपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मलावां ककरहिया निवासी अंजू यादव सामान्य गृहणी थीं। दूसरों पर निर्भर थीं। आर्थिक स्थिति भी सही नहीं थी। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था। वर्ष 2017 में समूह से जुड़ीं। इसके बाद उनकी दशा और दिशा बदलने लगी। समूह से करीब 1.3 लाख रुपये लेकर दोना-पत्तल बनाने का काम शुरू किया। अब खुद मशीन से उत्पाद तैयार कर बाजार में बिक्री कर रहीं हैं। दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं। अंजू कहती हैं कि परिस्थितियों से हारें नहीं, जूझकर आगे बढ़ें।
विज्ञापन
आचार उद्योग से बनाई पहचान
अमेठी ब्लॉक के रायपुर फुलवारी तोपखाना मोहल्ला स्थित संगीता प्रजापति की आज पूरे जिले में अपनी खास पहचान है। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की ठानी। तरक्की की सोच के साथ समूह से जुड़ीं। 15 हजार रुपये की लागत से अचार का व्यवसाय शुरू किया। आज आम, नींबू के साथ कटहल, सूरन, हरी मिर्च, लाल मिर्च, लहसुन, अदरक, आंवला, करौंदा का अचार तो मुरब्बा भी बना रही हैं। इस काम में उन्होंने गांव की महिलाओं को भी जोड़ा है। संगीता कहती हैं कि रूढि़यों से पार पाने की जरूरत है। सोच में बदलाव कर आगे बढ़ेंगी तो लक्ष्य जरूर मिलेगा।
विज्ञापन
ननका ने मछली पालन से परिवार को दी तरक्की
अमेठी सिटी। राजगढ़ गांव निवासी 80 वर्षीय ननका का प्रयास उनके पूरे परिवार की तरक्की का आधार बन गया है। असल में उन्होंने मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से मछली पालन का कार्य शुरू किया। आज साल में 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। ननका ने धान-गेहूं की खेती की जगह मछली पालन के लिए परिवार से बात की। परंपरागत खेती से हटकर मत्स्य पालन पर पहले कोई सहमत नहीं हुआ। किसी तरह से बात बनी। मत्स्य विभाग से मछली पालन के लिए 60% अनुदान पर वर्ष 2023–24 में तालाब की खोदाई का काम शुरू किया गया। तालाब तैयार हुआ तो पंगेसियस व देसी मछली का पालन किया गया। आठ से नौ महीने में मछलियां तैयार हो गईं और बाजार में अच्छे खरीददार भी मिले। मछलियों की बिक्री में 20 लाख के खर्च के सापेक्ष करीब 32 लाख रुपये मिले। इस तरह लगातार दो वर्षों से वह मछली पालन का कार्य कर रही हैं, जिसमें पूरा परिवार सहयोग कर रहा है।