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Amethi News: जेल जाते वक्त राहुल ने मारने की धमकी दी थी
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गौरीगंज (अमेठी)। जेल से निकलते ही तुम्हें मार डालूंगा। राहुल ने सुरेश को यह धमकी दो साल पहले तब दी थी, जब वह शमीम की हत्या के मामले में नामजद हुआ था। राहुल ने कहा था कि जेल से निकलते ही फिर जेल जाऊंगा लेकिन तुम्हें मार कर। मंगलवार को यह बताते हुए सुरेश के बड़े भाई रामबहादुर फफक पड़े।
सुरेश व राहुल के बीच तनातनी को जो कहानी राम बहादुर ने सुनाई, वह कुछ यूं थी। ''मेरे भाई सुरेश व राहुल के बीच पहले अच्छे संबंध थे। 2016 में पंचायत चुनाव के दौरान दोनों में तनातनी शुरू हुई। इस चुनाव में सुरेश ने पिता बद्री प्रसाद (1995 व 2000 में ग्राम प्रधान रहे) को भद्दौर का ग्राम प्रधान बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतारा और राहुल से भी मदद मांगी। राहुल ने सुरेश को इन्कार कर तत्कालीन ग्राम प्रधान इश्तियाक को समर्थन किया। चुनाव में बद्री प्रसाद को 99 वोट से हार गए। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को विरोधी मानने लगे। दोनों कई बार एक-दूसरे के सामने हुए, हालांकि कभी अनहोनी नहीं हुई।
दोनों के बीच की यह खाई इश्तियाक की मौत के बाद 2019 में हुए उपचुनाव में और भी बढ़ गई। चुनाव में राहुल इश्तियाक की पत्नी के समर्थन में आ गया। हालांकि इस चुनाव में सुरेश अपने भतीजे बृजेश को जिताने में सफल रहा था। 2021 का पंचायत चुनाव आने तक स्थिति यह हो गई कि दोनों एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। 2021 में सुरेश ने अपनी मां रामपती का पर्चा दाखिल कराया तो राहुल ने भी अपनी मां को मैदान में उतारा। जिस दिन मतदान हुआ उसी दिन शाम को राहुल ने मेरे भाई के पक्ष में खड़े लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना में गांव के ही बुजुर्ग मो. शमीम की मौत हो गई। राहुल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। जानकारी मिलते ही राहुल ने खुलेआम सुरेश को धमकी दी कि जेल से निकलते ही तुम्हें मार डालूंंगा। भले ही तुरंत जेल जाना पड़ा। यह बताते हुए राम बहादुर फफक पड़े। कहा आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था।
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धमकी से परेशान रहता था सुरेश का परिवार
राम बहादुर ने बताया कि राहुल के धमकाने के बाद से उसका परिवार सहमा हुआ था। कई मर्तबा इसकी शिकायत प्रशासनिक अफसरों से भी की गई। सुरेश ने जनवरी 22 में प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की थी लेकिन अफसरों ने उसके खिलाफ रिपोर्ट लगाकर शिकायत अनसुनी कर दी। राम बहादुर ने कहा कि अगर सरकार ने मामला गंभीरता से लिया होता मेरे भाई व बेटे की जान बच जाती।
आठ माह पहले छूटा था राहुल
शमीम की हत्या के मामले में सुल्तानपुर जिला कारागार में निरुद्ध राहुल आठ माह पूर्व ही जमानत पर रिहा हुआ था। उसके आने से सुरेश काफी सतर्क रहता था। वह आमतौर पर बाइक से निकलने से भी बचता था। इतनी सतर्कता के बावजूद सोमवार रात राहुल ने सुरेश व बृजेश को एक साथ मारकर पूरे परिवार की कमर तोड़ दी।
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सुरेश व राहुल के बीच तनातनी को जो कहानी राम बहादुर ने सुनाई, वह कुछ यूं थी। ''मेरे भाई सुरेश व राहुल के बीच पहले अच्छे संबंध थे। 2016 में पंचायत चुनाव के दौरान दोनों में तनातनी शुरू हुई। इस चुनाव में सुरेश ने पिता बद्री प्रसाद (1995 व 2000 में ग्राम प्रधान रहे) को भद्दौर का ग्राम प्रधान बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतारा और राहुल से भी मदद मांगी। राहुल ने सुरेश को इन्कार कर तत्कालीन ग्राम प्रधान इश्तियाक को समर्थन किया। चुनाव में बद्री प्रसाद को 99 वोट से हार गए। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को विरोधी मानने लगे। दोनों कई बार एक-दूसरे के सामने हुए, हालांकि कभी अनहोनी नहीं हुई।
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दोनों के बीच की यह खाई इश्तियाक की मौत के बाद 2019 में हुए उपचुनाव में और भी बढ़ गई। चुनाव में राहुल इश्तियाक की पत्नी के समर्थन में आ गया। हालांकि इस चुनाव में सुरेश अपने भतीजे बृजेश को जिताने में सफल रहा था। 2021 का पंचायत चुनाव आने तक स्थिति यह हो गई कि दोनों एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। 2021 में सुरेश ने अपनी मां रामपती का पर्चा दाखिल कराया तो राहुल ने भी अपनी मां को मैदान में उतारा। जिस दिन मतदान हुआ उसी दिन शाम को राहुल ने मेरे भाई के पक्ष में खड़े लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना में गांव के ही बुजुर्ग मो. शमीम की मौत हो गई। राहुल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। जानकारी मिलते ही राहुल ने खुलेआम सुरेश को धमकी दी कि जेल से निकलते ही तुम्हें मार डालूंंगा। भले ही तुरंत जेल जाना पड़ा। यह बताते हुए राम बहादुर फफक पड़े। कहा आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था।
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धमकी से परेशान रहता था सुरेश का परिवार
राम बहादुर ने बताया कि राहुल के धमकाने के बाद से उसका परिवार सहमा हुआ था। कई मर्तबा इसकी शिकायत प्रशासनिक अफसरों से भी की गई। सुरेश ने जनवरी 22 में प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की थी लेकिन अफसरों ने उसके खिलाफ रिपोर्ट लगाकर शिकायत अनसुनी कर दी। राम बहादुर ने कहा कि अगर सरकार ने मामला गंभीरता से लिया होता मेरे भाई व बेटे की जान बच जाती।
आठ माह पहले छूटा था राहुल
शमीम की हत्या के मामले में सुल्तानपुर जिला कारागार में निरुद्ध राहुल आठ माह पूर्व ही जमानत पर रिहा हुआ था। उसके आने से सुरेश काफी सतर्क रहता था। वह आमतौर पर बाइक से निकलने से भी बचता था। इतनी सतर्कता के बावजूद सोमवार रात राहुल ने सुरेश व बृजेश को एक साथ मारकर पूरे परिवार की कमर तोड़ दी।