{"_id":"6967e3fdd5b05784cc0eb777","slug":"barsanda-cooperative-society-closed-for-eight-years-farmers-upset-amethi-news-c-96-1-ame1002-156540-2026-01-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: आठ साल से बंद साधन सहकारी समिति बरसंडा, किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: आठ साल से बंद साधन सहकारी समिति बरसंडा, किसान परेशान
Thu, 15 Jan 2026 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:14 AM IST
विज्ञापन
बाजारशुकुल। बरसंडा न्याय पंचायत की साधन सहकारी समिति बीते आठ वर्षों से बंद पड़ी है। समिति बंद होने से किसानों को खाद-बीज और धान बिक्री के लिए दूर-दराज तक की दौड़ लगाना पड़ रही है। किसानों ने समिति को पुनः संचालित कर धान क्रय केंद्र खोले जाने की मांग की है।
बाजारशुकुल के बरसंडा स्थित साधन सहकारी समिति 2017 से बंद है। उस समय समिति के तत्कालीन सचिव पर गमन के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद विभागीय कार्रवाई के तहत समिति को बंद कर दिया गया था। इसके बाद से आज तक समिति का संचालन शुरू नहीं हो सका है। समिति बंद रहने से क्षेत्र के किसानों को खाद और बीज के लिए निजी दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। किसानों का कहना है कि सरकारी दरों पर खाद-बीज न मिलने से उन्हें महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
इलाके में धान क्रय केंद्र ना होने से भी किसान परेशान हैं। बरसंडा व आसपास के गांवों के किसानों को धान बेचने के लिए लगभग दस किलोमीटर दूर महोना, सत्थिन, किशनी और बाजारशुकुल जाना पड़ता है। इससे समय के साथ परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है। किसान सोनू श्रीवास्तव ने कहा कि समिति चालू रहती तो खाद-बीज सस्ती दरों पर मिलते और धान भी पास में ही बेचा जा सकता था। जकी अहमद ने बताया कि दूर केंद्रों पर धान ले जाने से मुनाफा कम हो जाता है। एडीओ सहकारिता आलोक कुमार दुबे ने बताया कि बरसंडा साधन सहकारी समिति के बंद होने का मामला उनके संज्ञान में है। उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद समिति के संचालन को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाजारशुकुल के बरसंडा स्थित साधन सहकारी समिति 2017 से बंद है। उस समय समिति के तत्कालीन सचिव पर गमन के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद विभागीय कार्रवाई के तहत समिति को बंद कर दिया गया था। इसके बाद से आज तक समिति का संचालन शुरू नहीं हो सका है। समिति बंद रहने से क्षेत्र के किसानों को खाद और बीज के लिए निजी दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। किसानों का कहना है कि सरकारी दरों पर खाद-बीज न मिलने से उन्हें महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
इलाके में धान क्रय केंद्र ना होने से भी किसान परेशान हैं। बरसंडा व आसपास के गांवों के किसानों को धान बेचने के लिए लगभग दस किलोमीटर दूर महोना, सत्थिन, किशनी और बाजारशुकुल जाना पड़ता है। इससे समय के साथ परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है। किसान सोनू श्रीवास्तव ने कहा कि समिति चालू रहती तो खाद-बीज सस्ती दरों पर मिलते और धान भी पास में ही बेचा जा सकता था। जकी अहमद ने बताया कि दूर केंद्रों पर धान ले जाने से मुनाफा कम हो जाता है। एडीओ सहकारिता आलोक कुमार दुबे ने बताया कि बरसंडा साधन सहकारी समिति के बंद होने का मामला उनके संज्ञान में है। उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद समिति के संचालन को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन