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जिले में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम
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गौरीगंज (अमेठी)। जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी पर पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता है। सर्पदंश से अस्पताल पहुंचने के बाद जिले में इस वर्ष एक भी मौत नहीं हुई।
बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा होती हैं। सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को बचाने के लिए सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाता है। सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी सेंटरों पर इसकी उपलब्धता है। हालांकि जिले में इस वर्ष कितने लोग सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचे, इसकी संख्या तो नहीं बता सके लेकिन कहा कि जिले में सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल पहुंचने पर मरीज को बचाने का प्रयास किया जाता है। यदि सांप ज्यादा जहरीला होता है तो उसके डसते ही जहर का असर इतना तेजी से काम करता है कि शरीर में खून का संचार बंद हो जाता है और जगह-जगह खून के थक्के जम जाते हैं। क्लाटिंग होने से हार्ट काम करना बंद करने लगाता है, फेफड़ा व गुर्दा भी डैमेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचने तक या तो उसकी मौत हो चुकी होती है या फिर उसकी स्थिति ज्यादा गंभीर होती है फिर भी बचाने का प्रयास किया जाता है।
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जिला अस्पताल में तैनात डॉ. पीतांबर कनौजिया ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में लोग पहले तो झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। सांप जहरीला न होने की स्थिति में वह वहीं ठीक भी हो जाते हैं। जहरीला सांप होने की स्थिति में जब उन्हें झाड़-फूंक से राहत नहीं मिलती है तब वे अस्पताल जाते हैं। अस्पताल पहुंचने तक बहुत देरी हो गई होती है। सीधा अस्पताल आने वाले लोगों की प्राय: जान बच जाती है।
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बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा होती हैं। सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को बचाने के लिए सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाता है। सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी सेंटरों पर इसकी उपलब्धता है। हालांकि जिले में इस वर्ष कितने लोग सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचे, इसकी संख्या तो नहीं बता सके लेकिन कहा कि जिले में सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।
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उन्होंने कहा कि अस्पताल पहुंचने पर मरीज को बचाने का प्रयास किया जाता है। यदि सांप ज्यादा जहरीला होता है तो उसके डसते ही जहर का असर इतना तेजी से काम करता है कि शरीर में खून का संचार बंद हो जाता है और जगह-जगह खून के थक्के जम जाते हैं। क्लाटिंग होने से हार्ट काम करना बंद करने लगाता है, फेफड़ा व गुर्दा भी डैमेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचने तक या तो उसकी मौत हो चुकी होती है या फिर उसकी स्थिति ज्यादा गंभीर होती है फिर भी बचाने का प्रयास किया जाता है।
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जिला अस्पताल में तैनात डॉ. पीतांबर कनौजिया ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में लोग पहले तो झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। सांप जहरीला न होने की स्थिति में वह वहीं ठीक भी हो जाते हैं। जहरीला सांप होने की स्थिति में जब उन्हें झाड़-फूंक से राहत नहीं मिलती है तब वे अस्पताल जाते हैं। अस्पताल पहुंचने तक बहुत देरी हो गई होती है। सीधा अस्पताल आने वाले लोगों की प्राय: जान बच जाती है।