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Amethi News: स्कूलों में बाउंड्री निर्माण के 7.69 करोड़ की बंदरबांट का आरोप

Thu, 26 Mar 2026 12:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:01 AM IST
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Allegations of misappropriation of Rs 7.69 crore for construction of boundary walls in schools
अमेठी सिटी। बेसिक शिक्षा विभाग के 174 परिषदीय स्कूलों में चारदीवारी निर्माण के लिए मिले 7.69 करोड़ रुपये की बंदरबांट करने का आरोप लगाया गया है। मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह ने शिकायत को गंभीर मानते हुए जांच टीम गठित कर दी है।
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प्रतापगढ़ जिले के खानीपुर, उदयपुर निवासी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने इस प्रकरण की शिकायत 17 मार्च को सीडीओ से की। उनके मुताबिक, रेजुवेनेशन योजना के तहत वर्ष 2023-24 में शासन की ओर से प्रति विद्यालय 4.42 लाख रुपये चारदीवारी निर्माण के लिए मिले, लेकिन लगभग सभी स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत ग्राम प्रधानों ने चारदीवारी का निर्माण पहले ही करा दिया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चारदीवारी के लिए मिली धनराशि को बीएसए, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और प्रधानाध्यापकों ने बिना काम कराए आपस में बांट लिया।
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सीडीओ ने बताया कि चारदीवारी निर्माण में गबन के आरोप प्रकरण में जांच के लिए टीम गठित की गई है। रिपोर्ट आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि फर्जी शिकायत की जा रही है। इस मामले की तीन बार जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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ईओडब्ल्यू ने शुरू की जांच

बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा परिषद और अशासकीय सहायता प्राप्त कर्मियों के अवशेष देयक, सामान्य भविष्य निधि और बीमा भुगतान में 4.34 करोड़ रुपये का गबन हुआ था। इस मामले में 21 मार्च 2025 को सहायक लेखाधिकारी किशन गुप्ता ने लेखा लिपिक मनोज मालवीय, शिक्षक शैलेश चंद्र शुक्ल, श्रवण कुमार द्विवेदी, आउटसोर्सिंग कर्मी शिवम और अभिषेक पर एफआईआर दर्ज कराई थी। लंबे समय तक इस मामले को दबाए रखा गया। अमर उजाला ने दिसंबर 2025 में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद जांच पूरी करके रिपोर्ट शासन को भेजी गई। अब इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू ने शुरू की है। 12 मार्च को आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ के इंचार्ज सहदेव सिंह टीम के साथ जांच करने आए। पता चला है कि टीम ने मामले में आरोपी शैलेश, श्रवण, शिवम और अभिषेक की लेखा विभाग में तैनाती को लेकर दस्तावेज खंगाले। एक सप्ताह तक टीम ने जांच की। विभाग के बड़े अफसरों से भी सवाल जवाब किए गए।
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