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Amethi News: बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू बताने पर होगी कार्रवाई
Wed, 17 Jul 2024 04:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 17 Jul 2024 04:22 AM IST
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अमेठी सिटी। मानसून सीजन शुरू होते ही डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य महकमे ने सभी पैथोलॉजी संचालकों पर सख्ती की है। स्वास्थ्य विभाग ने बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव बताने पर पैथोलॉजी संचालकों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
25 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की सुविधा मौजूद है। पिछले साल रिकाॅर्ड डेंगू के 280 मरीज मिले थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भले ही मरीजों की संख्या 243 रही हो, लेकिन वास्तव में इनकी संख्या 400 से 500 के बीच थी। विभाग की ओर से डेंगू की जांच किट से की जाती थी। किट से लिया गया सैंपल लखनऊ मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता था। वहां से दो से तीन दिनों के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डेंगू की पुष्टि होती थी।
बाद में विभाग ने जिला अस्पताल स्थित बीएसएल लैब में एलाइजा मशीन लगाकर तत्काल जांच की सुविधा शुरू की। इस बार विभाग पहले से ही तैयारियों को पुख्ता करने में जुटा है। अफवाहों पर लगाम लगाने की तैयारी में है। विभाग ने सभी पैथोलॉजी सेंटर को बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू पॉजिटिव न बताने की हिदायत दी है।
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पैथोलॉजी सेंटर पर किट से ही जांच होती है, जो अस्पष्ट होती है। ऐसे में किट से मिली रिपोर्ट को 100 फीसदी सही नहीं माना जा सकता। ऐसे में विभाग ने सभी पैथालॉजी सेंटर संचालकों को किट जांच की सूचना देने के साथ बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं बताने की बात कही है। कहा है कि यदि किट की जांच के बाद डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव दी तो कार्रवाई की जाएगी।
लक्षण हो तब भी कराए एलाइजा टेस्ट
फिजिशियन डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि कभी-कभी एमएस-1 किट डेंगू संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आती है। यदि बुखार के लक्षण हो तो एलाइजा टेस्ट अनिवार्य रूप से करवाना चाहिए। डेंगू बुखार के मामलों में किट से एंटीजन परीक्षण के बाद सही जानकारी नहीं हो पाती है। एलाइजा टेस्ट से सही पता लगने पर डेंगू होने पर उपचार किया जाता है।
2023 में जिले में सर्वाधिक मिले थे 243 मरीज
2022 में जिले में 82 मरीज मिले थे। 2023 में 243 मरीज मिलने के बाद उनका उपचार किया गया था। राहत की बात यह थी कि एक भी संक्रमित की मौत नहीं हुई थी। 2024 में विभाग की सक्रियता से संक्रमितों कर संख्या दो ही हुई है, जो उपचार के बाद स्वस्थ हो गए हैं।
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25 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की सुविधा मौजूद है। पिछले साल रिकाॅर्ड डेंगू के 280 मरीज मिले थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भले ही मरीजों की संख्या 243 रही हो, लेकिन वास्तव में इनकी संख्या 400 से 500 के बीच थी। विभाग की ओर से डेंगू की जांच किट से की जाती थी। किट से लिया गया सैंपल लखनऊ मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता था। वहां से दो से तीन दिनों के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डेंगू की पुष्टि होती थी।
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बाद में विभाग ने जिला अस्पताल स्थित बीएसएल लैब में एलाइजा मशीन लगाकर तत्काल जांच की सुविधा शुरू की। इस बार विभाग पहले से ही तैयारियों को पुख्ता करने में जुटा है। अफवाहों पर लगाम लगाने की तैयारी में है। विभाग ने सभी पैथोलॉजी सेंटर को बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू पॉजिटिव न बताने की हिदायत दी है।
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पैथोलॉजी सेंटर पर किट से ही जांच होती है, जो अस्पष्ट होती है। ऐसे में किट से मिली रिपोर्ट को 100 फीसदी सही नहीं माना जा सकता। ऐसे में विभाग ने सभी पैथालॉजी सेंटर संचालकों को किट जांच की सूचना देने के साथ बिना एलाइजा टेस्ट के डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं बताने की बात कही है। कहा है कि यदि किट की जांच के बाद डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव दी तो कार्रवाई की जाएगी।
लक्षण हो तब भी कराए एलाइजा टेस्ट
फिजिशियन डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि कभी-कभी एमएस-1 किट डेंगू संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आती है। यदि बुखार के लक्षण हो तो एलाइजा टेस्ट अनिवार्य रूप से करवाना चाहिए। डेंगू बुखार के मामलों में किट से एंटीजन परीक्षण के बाद सही जानकारी नहीं हो पाती है। एलाइजा टेस्ट से सही पता लगने पर डेंगू होने पर उपचार किया जाता है।
2023 में जिले में सर्वाधिक मिले थे 243 मरीज
2022 में जिले में 82 मरीज मिले थे। 2023 में 243 मरीज मिलने के बाद उनका उपचार किया गया था। राहत की बात यह थी कि एक भी संक्रमित की मौत नहीं हुई थी। 2024 में विभाग की सक्रियता से संक्रमितों कर संख्या दो ही हुई है, जो उपचार के बाद स्वस्थ हो गए हैं।