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Amethi News: 292 योजनाएं बनीं दिखावा, पेयजल की किल्लत

Sat, 13 Sep 2025 01:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sat, 13 Sep 2025 01:15 AM IST
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292 schemes were just a sham, there is shortage of drinking water
 सिंहपुर के पूरे बैसन गांव में हैंडपंप के पास पानी के लिए इंतजार करती महिलाएं। -संवाद
अमेठी सिटी। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई संचालित की जा रही 292 पेयजल योजनाओं के बाद भी गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण कहीं टोटियां टूटी पड़ी हैं, कहीं पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त होने से पानी बह कर बर्बाद हो रहा है। कई इलाकों में तो सप्लाई लाइन बिछाने के बावजूद कनेक्शन तक नहीं दिया गया है।
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इस कारण ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विभाग मार्च 2026 तक हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई इन दावों से कोसो दूर दिखती है। जिले के 944 राजस्व गांवों में से अब तक केवल 554 गांव के लोग ही आंशिक तौर पर पेयजल योजनाओं से लाभान्वित हो सके हैं।
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बाकी गांवों में या तो टोटियां लगी ही नहीं हैं या फिर पाइपलाइन की लीकेज से पानी गड्ढों में बह कर बर्बाद हो रहा है। कार्यदायी संस्थाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। मेसर्स वैलस्पन इंटरप्राइजेज एवं कावेरी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की 133 योजनाओं में से 79 ही पूरी हो सकीं, 87 अधूरी हैं। मेसर्स गायत्री रैंकी कंपनी की 160 योजनाओं में 84 पूरी हुईं, 76 पर कार्य अटका पड़ा है। मेसर्स विंध्य टेलीलिंक गाजा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की 194 योजनाओं में 104 पूरी हुईं, जबकि 90 अब भी अधूरी हैं।
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पांच करोड़ की परियोजना अधूरी
सिंहपुर ब्लॉक के दांदूपुर ग्राम पंचायत में पांच करोड़ 41 लाख रुपये की टंकी अधरझूल में लटकी है। जून 2023 में निर्माण शुरू हुआ था और दिसंबर 2025 तक पूरा होने की योजना थी। 23 हजार मीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन गोधना, सीतापुर, बैसन और गौड़ा सहित कई गांवों के नल अब भी सूखे हैं। बमुश्किल सप्ताह में एक-दो दिन ही पानी मिल पाता है।


नहीं मिल रहा पानी

गोधना निवासी दीपक मौर्य ने बताया कि कई-कई सप्ताह इंतजार करने के बाद मुश्किल से एक-दो दिन पानी मिलता है, फिर सप्लाई बंद हो जाती है। रामस्वरूप, गौड़ा के बब्बू सिंह, भारत मौर्य का कहना है कि पाइपलाइन बिछने पर भरोसा जगा था कि हर घर तक पानी पहुंचेगा, लेकिन नल अब भी सूखे हैं। घर के सामने लगी टोटी शोपीस बन चुकी है। सप्लाई न मिलने पर लोग इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं।

फैक्ट फाइल
जिले में राजस्व गांवों की संख्या: 944
स्वीकृत पेयजल परियोजनाएं: 487
शुरू हुई जलापूर्ति योजनाएं: 195
टंकी से जलापूर्ति: 135
पंप से जलापूर्ति: 60
आंशिक लाभान्वित गांव: 554



जल्द पूरा होंगे सभी कार्य
सभी परियोजनाओं का कार्य जल्द पूरा करने की कोशिश है। अभी तक 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शिथिलता बरतने वाली कंपनियों को नोटिस देने के साथ ही टोटियों की चोरी पर भी निगरानी रखी जा रही है।
अनिल कुमार राव, अधीक्षण अभियंता जल निगम ग्रामीण
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