फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   22 newborns in 12 warmers; two babies being treated in one

Amethi News: 12 वार्मर में 22 नवजात, एक में दो बच्चों का इलाज

Wed, 16 Sep 2026 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Wed, 16 Sep 2026 01:04 AM IST
विज्ञापन
22 newborns in 12 warmers; two babies being treated in one
जिला अस्पताल की एसएनसीयू में एक वार्मर पर रखे दो बच्चे। -संवाद
अमेठी सिटी। जिला अस्पताल की एसएनसीयू में नवजातों के इलाज पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। इकाई में 12 रेडिएंट वार्मर हैं। मंगलवार को यहां 22 नवजात भर्ती मिले। जगह कम पड़ने पर चार वार्मर पर दो-दो नवजातों को रखकर इलाज किया जा रहा था। गंभीर नवजातों के परिजनों को बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन


जिला अस्पताल के प्रथम तल पर नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) संचालित है। यहां समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और सांस लेने में दिक्कत वाले नवजातों को भर्ती किया जाता है। इकाई में 12 रेडिएंट वार्मर के साथ दो सी-पैप मशीनें लगी हैं। इनकी मदद से सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों को उपचार दिया जाता है।
विज्ञापन


एसएनसीयू प्रभारी डॉ. लईक उज जमा ने बताया कि वार्ड में बेड कम होने पर एक वार्मर पर दो नवजातों को रखना पड़ता है। मंगलवार को 22 बच्चों का इलाज चल रहा था। गंभीर बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




हर माह 200 से 250 नवजात होते हैं भर्ती
जिला अस्पताल की एसएनसीयू में हर महीने करीब 200 से 250 नवजात भर्ती होते हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत बच्चों को इलाज के बाद रोज डिस्चार्ज कर दिया जाता है। करीब 20 प्रतिशत बच्चों को कुछ दिन भर्ती रखकर उपचार करना पड़ता है। समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों की संख्या अधिक रहती है। सांस लेने में दिक्कत वाले नवजात भी बड़ी संख्या में आते हैं। जन्मजात विकृति और गंभीर स्थिति वाले नवजातों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। ऐसे दो से चार गंभीर मामलों को एम्स रायबरेली और लखनऊ भेजा जाता है।



खराबी के लिए वार्मर रिजर्व
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि एसएनसीयू में 12 रेडिएंट वार्मर और दो सी-पैप मशीनें लगी हैं। वार्मर खराब होने की स्थिति में इस्तेमाल के लिए कुछ उपकरण रिजर्व रखे गए हैं। बेड बढ़ाने के संबंध में शासन से कोई अलग निर्देश नहीं मिला है। उपलब्ध संसाधनों में नवजातों को बेहतर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed