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Amethi News: स्कूलों के 1574 विद्यार्थी बनेंगे बाल प्रधानमंत्री
Mon, 21 Oct 2024 02:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 21 Oct 2024 02:27 AM IST
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अमेठी सिटी। जिले के परिषदीय विद्यालयों के 1574 विद्यार्थी बाल प्रधानमंत्री बनेंगे। सभी प्रधानमंत्री के साथ 11 सदस्यीय कैबिनेट मंत्री होंगे। वहीं विद्यालय के अन्य विद्यार्थी बाल कैबिनेट के सदस्य कहे जाएंगे। यह कार्ययोजना परिषदीय विद्यालयों में इको क्लब के तहत बनाई गई है, जिसमें बचपन से ही पर्यावरण के प्रति बच्चों में संवेदनशीलता लाई जा सके।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में इको क्लब का गठन किया जाएगा। इसके तहत पेड़ लगाना, स्वच्छता अभियान, प्राकृतिक संरक्षण, बागवानी के प्रति बच्चों को जोड़ा जाएगा। यह छात्रों को दूसरों के साथ सहयोग करने और अधिक से अधिक सीखने का मौका प्रदान करेगा। प्रत्येक विद्यालय में इको क्लब के तहत बाल कैबिनेट का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री सहित कुल 12 पद शामिल होंगे, जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इसमें स्वास्थ्य मंत्री, स्वच्छता मंत्री, सुरक्षा एवं न्याय मंत्री, पोषण मंत्री, उपस्थिति मंत्री, शिक्षा मंत्री, कौशल विकास मंत्री, पर्यावरण मंत्री, खेलकूद एवं सांस्कृतिक मंत्री, संचार एवं संपर्क मंत्री को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त सभी छात्र-छात्राएं क्लब के सदस्य होंगे। विद्यालय के इको क्लब फॉर मिशन लाइफ की संरचना में प्रधानाध्यापक को प्रभारी, सहायक अध्यापक को नोडल, चयनित छात्र या छात्रा को कैप्टन, प्रत्येक कक्षा से दो छात्र और दो छात्राओं को समन्वयक बनाया जाएगा।
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स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों और अन्य स्टाफ सदस्यों को इको क्लब की गतिविधियों में भाग लेने और समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि क्लब की बैठकें प्रत्येक माह में एक बार अवश्य आयोजित की जाएंगी, जिसका कार्यवृत्त भी जारी किया जाएगा।
इको क्लब के कार्य
विद्यालय में इको क्लब विभिन्न प्रकार के कार्य करेगा, जिसमें जागरूकता के साथ छात्र-छात्राओं के सीखने और उन्हें अपने परिवेश में दूसरों को जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यालय में बिजली का प्रभावी उपयोग, एलईडी बल्ब और सौर लैंप के प्रयोग तथा आवश्यकता नहीं रहने पर बिजली के सारे स्विच बंद करना सुनिश्चित करना है। स्थानीय पौधों एवं बीज, उनके प्रयोग की जानकारी प्राप्त करना। परिसर में बागीचा या किचन गार्डन विकसित करना। जल संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करना। मौसमी पौधों को विद्यालय, घर के किचन गार्डन में लगाने के लिए प्रोत्साहित करना, पर्यावरण दिवस, पृथ्वी दिवस के अवसर पर रैली निकालना, जल स्रोतों की मैपिंग करना, विद्यालय में अवशेष पदार्थों को गड्ढे में संग्रहण कर खाद बनाना, छात्र-छात्राओं को प्लास्टिक के बैग के उपयोग को कम करने और सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने के लिए संवेदनशील बनाना, प्रश्नोत्तरी, निबंध, पेंटिंग प्रतियोगिता आदि के लिए प्रोत्साहित करना है।
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पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में इको क्लब का गठन किया जाएगा। इसके तहत पेड़ लगाना, स्वच्छता अभियान, प्राकृतिक संरक्षण, बागवानी के प्रति बच्चों को जोड़ा जाएगा। यह छात्रों को दूसरों के साथ सहयोग करने और अधिक से अधिक सीखने का मौका प्रदान करेगा। प्रत्येक विद्यालय में इको क्लब के तहत बाल कैबिनेट का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री सहित कुल 12 पद शामिल होंगे, जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
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इसमें स्वास्थ्य मंत्री, स्वच्छता मंत्री, सुरक्षा एवं न्याय मंत्री, पोषण मंत्री, उपस्थिति मंत्री, शिक्षा मंत्री, कौशल विकास मंत्री, पर्यावरण मंत्री, खेलकूद एवं सांस्कृतिक मंत्री, संचार एवं संपर्क मंत्री को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त सभी छात्र-छात्राएं क्लब के सदस्य होंगे। विद्यालय के इको क्लब फॉर मिशन लाइफ की संरचना में प्रधानाध्यापक को प्रभारी, सहायक अध्यापक को नोडल, चयनित छात्र या छात्रा को कैप्टन, प्रत्येक कक्षा से दो छात्र और दो छात्राओं को समन्वयक बनाया जाएगा।
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स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों और अन्य स्टाफ सदस्यों को इको क्लब की गतिविधियों में भाग लेने और समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि क्लब की बैठकें प्रत्येक माह में एक बार अवश्य आयोजित की जाएंगी, जिसका कार्यवृत्त भी जारी किया जाएगा।
इको क्लब के कार्य
विद्यालय में इको क्लब विभिन्न प्रकार के कार्य करेगा, जिसमें जागरूकता के साथ छात्र-छात्राओं के सीखने और उन्हें अपने परिवेश में दूसरों को जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यालय में बिजली का प्रभावी उपयोग, एलईडी बल्ब और सौर लैंप के प्रयोग तथा आवश्यकता नहीं रहने पर बिजली के सारे स्विच बंद करना सुनिश्चित करना है। स्थानीय पौधों एवं बीज, उनके प्रयोग की जानकारी प्राप्त करना। परिसर में बागीचा या किचन गार्डन विकसित करना। जल संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करना। मौसमी पौधों को विद्यालय, घर के किचन गार्डन में लगाने के लिए प्रोत्साहित करना, पर्यावरण दिवस, पृथ्वी दिवस के अवसर पर रैली निकालना, जल स्रोतों की मैपिंग करना, विद्यालय में अवशेष पदार्थों को गड्ढे में संग्रहण कर खाद बनाना, छात्र-छात्राओं को प्लास्टिक के बैग के उपयोग को कम करने और सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने के लिए संवेदनशील बनाना, प्रश्नोत्तरी, निबंध, पेंटिंग प्रतियोगिता आदि के लिए प्रोत्साहित करना है।