{"_id":"61a12a92ad4f1662207bbd23","slug":"veterinary-hospital-building-turned-into-ruins-ambedkar-nagar-news-lko606241477","type":"story","status":"publish","title_hn":"खंडहर में तब्दील हो गया पशु चिकित्सालय का भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खंडहर में तब्दील हो गया पशु चिकित्सालय का भवन
विज्ञापन
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। देखभाल न होने से राजकीय पशु चिकित्सालय रूकुनुद्दीनपुर खंडहर बना नजर आने लगा है। कभी यह भवन पशुओं को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए पूरे इलाके का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता और संसाधनों की कमी से अब यह अपनी पहचान खोता जा रहा है। मौजूदा समय में यह पशु चिकित्सालय पूरी तरह से बदहाल स्थिति में है। यहां की दीवारें टूट चुकी हैं और इलाज की व्यवस्था पूरी तरह से बंद पड़ी है। इलाज सुविधा न मिलने से क्षेत्र के पशुपालकों को अब इलाज के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे पशु अस्पताल ले जाने की परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
जलालपुर विकासखंड के रुकुनुद्दीनपुर में करीब चार दशक पहले राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण हुआ था। यहां पशु चिकित्सालय के निर्माण से बलुआ बहादुरपुर, साई समसपुर, शरीफपुर, लखनीया, अस्तबाद, कल्याणपुर, डडवा, बडेपुर, सम्मनपुर, आलमपुर, सदिलपुर, दाऊदपुर, कटघर कमाल , नसीरपुर व नारीपुर समेत कई अन्य गांवों के पशुपालकों को इसकी सेवाओं का फायदा मिलता था। पशुओं के किसी भी बीमारी से ग्रसित होने पर यहां आसानी से इलाज संभव हो जाता था। साथ ही पशु चिकित्सकों द्वारा पशुपालकों को जागरूक करने का कार्य भी होता था।
देखभाल के अभाव व जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते धीरे धीरे यह भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया। भवन की बदहाल स्थिति को देखते हुए ही यहां इलाज भी बंद कर दिया गया है। इलाज बंद होने से क्षेत्र के पशुपालकों की परेशानी कई गुना बढ़ गयी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब डेढ़ दशक से यहां इलाज व्यवस्था पूरी तरह से बंद पड़ा है।
विज्ञापन
स्थानीय पशुपालक राजाराम, सतीराम, धर्मेंद्र कुमार, विजय कुमार व राधेश्याम आदि का कहा कहना है कि इलाज की सुविधा बंद हो जाने से अब बीमार पशुओं के इलाज के लिए दस किलोमीटर दूर ब्लाक मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से जर्जर पशु चिकित्सालय भवन का जीर्णोद्घार कराने के साथ यहां इलाज व्यवस्था फिर से शुरू कराए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
जलालपुर विकासखंड के रुकुनुद्दीनपुर में करीब चार दशक पहले राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण हुआ था। यहां पशु चिकित्सालय के निर्माण से बलुआ बहादुरपुर, साई समसपुर, शरीफपुर, लखनीया, अस्तबाद, कल्याणपुर, डडवा, बडेपुर, सम्मनपुर, आलमपुर, सदिलपुर, दाऊदपुर, कटघर कमाल , नसीरपुर व नारीपुर समेत कई अन्य गांवों के पशुपालकों को इसकी सेवाओं का फायदा मिलता था। पशुओं के किसी भी बीमारी से ग्रसित होने पर यहां आसानी से इलाज संभव हो जाता था। साथ ही पशु चिकित्सकों द्वारा पशुपालकों को जागरूक करने का कार्य भी होता था।
विज्ञापन
देखभाल के अभाव व जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते धीरे धीरे यह भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया। भवन की बदहाल स्थिति को देखते हुए ही यहां इलाज भी बंद कर दिया गया है। इलाज बंद होने से क्षेत्र के पशुपालकों की परेशानी कई गुना बढ़ गयी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब डेढ़ दशक से यहां इलाज व्यवस्था पूरी तरह से बंद पड़ा है।
विज्ञापन
स्थानीय पशुपालक राजाराम, सतीराम, धर्मेंद्र कुमार, विजय कुमार व राधेश्याम आदि का कहा कहना है कि इलाज की सुविधा बंद हो जाने से अब बीमार पशुओं के इलाज के लिए दस किलोमीटर दूर ब्लाक मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से जर्जर पशु चिकित्सालय भवन का जीर्णोद्घार कराने के साथ यहां इलाज व्यवस्था फिर से शुरू कराए जाने की मांग की है।