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विपक्षी दलों के दिग्गजों ने बादशाहत कायम रखी
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अंबेडकरनगर। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में विपक्षी दलों के दिग्गजों ने अपनी बादशाहत कायम रखी। 3 सीट पर निर्विरोध निर्वाचन में सफलता के बाद शेष 6 सीटाें पर मतदान के जरिए हुए चुनाव में विपक्षी दिग्गजों ने सत्तारूढ़ दल को धूल चटा दी। नतीजा यह हुआ कि इसे लेकर आम जनमानस से लेकर सोशल मीडिया में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सत्तारूढ़ दल में मायूसी छा गई, जबकि अन्य खेमों में जश्न का माहौल देर रात तक बना रहा।
ब्लॉक प्रमुख चुनाव शुरू होने से पहले बीडीसी सदस्यों के चुनाव में बीजेपी समर्थक कम जीत पाए थे। इसके बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली ऐसी ही परिस्थितियों में जीत ने बीजेपी खेमे में नई उम्मीद जगा दी थी। जोड़तोड़ और मान मनौव्वल आदि के बीच 3 ब्लॉक में बीजेपी के 3 प्रमुख निर्विरोध चुन लिए गए तो दम और बढ़ गया। सभी 6 सीट पर जीत के लिए बीजेपी ने बाकायदा वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय की, लेकिन विपक्षी दलों के दिग्गज कहीं भारी पड़े। कई जगह विपक्षी दिग्गजों ने अफसरों से साफ कह दिया कि यदि सत्तारूढ़ दल ने कोई मनमानी की तो वे चुप नहीं बैठेंगे और ठीक से जवाब देंगे। दरअसल टांडा में नामांकन के दौरान हुई घटना से विपक्षी दल नाराज थे। नतीजा यह हुआ कि वे अपने-अपने खेमे को और मजबूती से लामबंद करने तथा बीजेपी को जिले में सबक सिखाने की योजना में और मजबूती से जुट गए।
जलालपुर में बसपा सांसद रितेश पांडेय फ्रंट मोर्चे पर थे तो उनके पिता पूर्व सांसद राकेश पांडेय पर्दे के पीछे से जीत की रणनीति बनाने में जुटे थे। इसके चलते ही बसपा को एकतरफा जीत मिल गई। टांडा में बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने अपने करीबी सुरजीत को निर्दल मैदान में उतारा था। उन्हें सपा का भी समर्थन मिल गया। लालजी की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी थी, जिसमें उन्हें कामयाबी भी मिली। यहां टांडा विधायक संजू देवी की किरकिरी हुई, क्योंकि उनके करीबी और बीजेपी प्रत्याशी तेजस्वी को हार का मुंह देखना पड़ा।
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जिला मुख्यालय की अकबरपुर सीट पर पूर्व मंत्री सपा नेता राममूर्ति वर्मा ने पार्टी प्रत्याशी देविका की जीत के लिए पूरी ताकत लगा रखी थी। एकतरफा जीत दिलाकर उन्होंने अपना लोहा मनवाया। यहां पूर्व प्रमुख सुनीता वर्मा को 2 बार पाला बदलकर बीजेपी से लड़ना रास नहीं आया। जहांगीरगंज सीट पर बीजेपी प्रत्याशी पुष्पा की जीत के लिए लगीं विधायक अनीता कमल, जिलाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, पूर्व विधायक त्रिवेणी राम और प्रांतीय नेता यमुना प्रसाद चतुर्वेदी को किरकिरी का सामना करना पड़ा। इस सीट पर निर्दल विनीता की जीत ने पूर्व प्रमुख अरविंद सिंह का कद बढ़ा दिया। रामनगर में सपा प्रत्याशी की जीत के लिए ताकत लगाने वाले पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त और सपा जिलाध्यक्ष रामशकल यादव को जीत ने नई संजीवनी प्रदान की। यहां बीजेपी के रामधारी पराजित हुए।
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ब्लॉक प्रमुख चुनाव शुरू होने से पहले बीडीसी सदस्यों के चुनाव में बीजेपी समर्थक कम जीत पाए थे। इसके बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली ऐसी ही परिस्थितियों में जीत ने बीजेपी खेमे में नई उम्मीद जगा दी थी। जोड़तोड़ और मान मनौव्वल आदि के बीच 3 ब्लॉक में बीजेपी के 3 प्रमुख निर्विरोध चुन लिए गए तो दम और बढ़ गया। सभी 6 सीट पर जीत के लिए बीजेपी ने बाकायदा वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय की, लेकिन विपक्षी दलों के दिग्गज कहीं भारी पड़े। कई जगह विपक्षी दिग्गजों ने अफसरों से साफ कह दिया कि यदि सत्तारूढ़ दल ने कोई मनमानी की तो वे चुप नहीं बैठेंगे और ठीक से जवाब देंगे। दरअसल टांडा में नामांकन के दौरान हुई घटना से विपक्षी दल नाराज थे। नतीजा यह हुआ कि वे अपने-अपने खेमे को और मजबूती से लामबंद करने तथा बीजेपी को जिले में सबक सिखाने की योजना में और मजबूती से जुट गए।
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जलालपुर में बसपा सांसद रितेश पांडेय फ्रंट मोर्चे पर थे तो उनके पिता पूर्व सांसद राकेश पांडेय पर्दे के पीछे से जीत की रणनीति बनाने में जुटे थे। इसके चलते ही बसपा को एकतरफा जीत मिल गई। टांडा में बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने अपने करीबी सुरजीत को निर्दल मैदान में उतारा था। उन्हें सपा का भी समर्थन मिल गया। लालजी की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी थी, जिसमें उन्हें कामयाबी भी मिली। यहां टांडा विधायक संजू देवी की किरकिरी हुई, क्योंकि उनके करीबी और बीजेपी प्रत्याशी तेजस्वी को हार का मुंह देखना पड़ा।
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जिला मुख्यालय की अकबरपुर सीट पर पूर्व मंत्री सपा नेता राममूर्ति वर्मा ने पार्टी प्रत्याशी देविका की जीत के लिए पूरी ताकत लगा रखी थी। एकतरफा जीत दिलाकर उन्होंने अपना लोहा मनवाया। यहां पूर्व प्रमुख सुनीता वर्मा को 2 बार पाला बदलकर बीजेपी से लड़ना रास नहीं आया। जहांगीरगंज सीट पर बीजेपी प्रत्याशी पुष्पा की जीत के लिए लगीं विधायक अनीता कमल, जिलाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, पूर्व विधायक त्रिवेणी राम और प्रांतीय नेता यमुना प्रसाद चतुर्वेदी को किरकिरी का सामना करना पड़ा। इस सीट पर निर्दल विनीता की जीत ने पूर्व प्रमुख अरविंद सिंह का कद बढ़ा दिया। रामनगर में सपा प्रत्याशी की जीत के लिए ताकत लगाने वाले पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त और सपा जिलाध्यक्ष रामशकल यादव को जीत ने नई संजीवनी प्रदान की। यहां बीजेपी के रामधारी पराजित हुए।