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Ambedkar Nagar News: गीत-संगीत की लोक विधाओं को जीवंत कर रहीं उपमा
Mon, 21 Jul 2025 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 21 Jul 2025 01:07 AM IST
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नैमिषारण्य मेले में उपमा पांडेय को सम्मानित करते आशुतोष राणा। (फाइल फोटो)
अंबेडकरनगर। लोकगीत-संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली उपमा पांडेय अपनी आवाज के लिए जानी जाती हैं। वह 20 वर्षों से अपनी आवाज के जादू से सभी का मन मोह रही हैं। उन्होंने आकाशवाणी में एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए हैं। लोकगीत व संगीत की जब-जब बात होगी, तब-तब उनका का नाम लिया जाता है।
उपमा पांडेय आज की युवा पीढ़ी के लिए एक आइडल हैं। चाहे आकाशवाणी हो या प्रयागराज महाकुंभ। इन सभी में इन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इतना ही नहीं मां वैष्णो फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से नई पीढ़ी के बच्चों को संस्कार गीतों से जोड़कर अपनी विलुप्त होती लोक विधाओं को जीवंत कर रही हैं। इनके सावन गीतों में अबकी सावन में अयोध्या जाऊंगी, राम आइ गये देखो महलिया में, सोहर गीतों में मचिया ही बैठीं सासू त बहु से अरज करे हो और लोकगीत बदरी में बिदवा करईले बा बलमुवा, लागे ला बदरिया का घाम जैसे गाने काफी लोकप्रिय हैं।
उपमा पांडेय का बचपन गोरखपुर जिले के गांव खुशहालपुर में बीता। उन्होंने बीए में विशारद किया है। इनकी शादी आलापुर के गांव रामपुर रामगुलाम में हुई है। पति आशुतोष पांडेय शासकीय अधिवक्ता हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि उन्हें कॅरिअर बनाने में आसानी हुई। उनका कहना है कि पति नहीं चाहते थे कि वह इसमें कॅरिअर बनाएं, लेकिन उनके ससुर ने इसके लिए हौंसला दिया। उन्हें बचपन से ही गाने का शौक था। इसी पैशन को फॉलो करते हुए उन्होंने मुकाम हासिल किया। अपनी प्रामाणिक शैली और अभिव्यंजक कहानी के माध्यम से भोजपुरी और अवध की संस्कृति को जीवंत करना ही उनका लक्ष्य है।
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उपमा पांडेय आज की युवा पीढ़ी के लिए एक आइडल हैं। चाहे आकाशवाणी हो या प्रयागराज महाकुंभ। इन सभी में इन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इतना ही नहीं मां वैष्णो फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से नई पीढ़ी के बच्चों को संस्कार गीतों से जोड़कर अपनी विलुप्त होती लोक विधाओं को जीवंत कर रही हैं। इनके सावन गीतों में अबकी सावन में अयोध्या जाऊंगी, राम आइ गये देखो महलिया में, सोहर गीतों में मचिया ही बैठीं सासू त बहु से अरज करे हो और लोकगीत बदरी में बिदवा करईले बा बलमुवा, लागे ला बदरिया का घाम जैसे गाने काफी लोकप्रिय हैं।
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उपमा पांडेय का बचपन गोरखपुर जिले के गांव खुशहालपुर में बीता। उन्होंने बीए में विशारद किया है। इनकी शादी आलापुर के गांव रामपुर रामगुलाम में हुई है। पति आशुतोष पांडेय शासकीय अधिवक्ता हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि उन्हें कॅरिअर बनाने में आसानी हुई। उनका कहना है कि पति नहीं चाहते थे कि वह इसमें कॅरिअर बनाएं, लेकिन उनके ससुर ने इसके लिए हौंसला दिया। उन्हें बचपन से ही गाने का शौक था। इसी पैशन को फॉलो करते हुए उन्होंने मुकाम हासिल किया। अपनी प्रामाणिक शैली और अभिव्यंजक कहानी के माध्यम से भोजपुरी और अवध की संस्कृति को जीवंत करना ही उनका लक्ष्य है।
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