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मोहर्रम को लेकर जारी गाइडलाइन पर भड़के उलमा

Mon, 02 Aug 2021 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 10:48 PM IST
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Ulama furious over the guidelines issued regarding Muharram
अंबेडकरनगर। मोहर्रम को लेकर डीजीपी कार्यालय से जारी गाइडलाइन में मोहर्रम के बारे में कही गई बातों पर शिया समुदाय ने कड़ी आपत्ति जताई है। वरिष्ठ शिया धर्मगुरुओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि मोहर्रम को लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसका शत-प्रतिशत पालन किया जाएगा, लेकिन मोहर्रम को लेकर जो बातें कही गई हैं, वह पूरी तरह से आपत्तिजनक हैं। न सिर्फ इसे वापस लिया जाए, बल्कि सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी जाए। धर्मगुरुओं ने शिया समुदाय के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व उलमा से अपील की है कि जब तक ऐसा नहीं किया जाता है, तब तक मोहर्रम को लेकर किसी भी प्रकार की प्रशासन की बैठक में भागीदारी न करें।
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मोहर्रम को लेकर बीते दिन कोरोना संक्रमण व सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने गाइडलाइन जारी की। इसके सार्वजनिक होते ही हंगामा खड़ा हो गया। शिया धर्मगुरुओं के साथ ही शिया समुदाय से जुड़े गणमान्य नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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इमाम जुमा शिया जामा मस्जिद ताजपुर मौलाना अब्बास शीराजी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मोहर्रम गम का महीना है। इमाम हुसैन का गम सभी मजहब के लोग मनाते हैं। डीजीपी कार्यालय की ओर से जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसमें जिस प्रकार से अपशब्दों का प्रयोग किया गया है, वह अत्यंत चिंताजनक के साथ ही निंदनीय है। इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। शिया उलमा बोर्ड अंबेडकरनगर के जिला प्रवक्ता मौलाना सै. नूरुल हसन ने कहा कि मोहर्रम इंसानियत, अमन व भाईचारगी का पैगाम देता है। ऐसे में जिन शब्दों का प्रयोग गाइडलाइन के पैरा दो व तीन में किया गया है, वह अत्यंत निंदनीय है।
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वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास ने कहा कि डीजीपी एक जिम्मेदार पद है। जिस प्रकार से गैर जिम्मेदाराना तरीके से गाइडलाइन जारी की गई है, वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। इसे वापस लिया जाए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। सामाजिक संस्था अल इमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन ख्वाजा शफाअत हुसैन ने कहा कि गाइडलाइन में अपशब्दों का प्रयोग कर शिया समुदाय व मोहर्रम को बदनाम करने का प्रयास है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उधर, वरिष्ठ शिया धर्मगुरुओं ने अपील करते हुए कहा कि जब तक गाइडलाइन को वापस नहीं लिया जाता है और माफी नहीं मांगी जाती है, तब तक मोहर्रम को लेकर प्रशासन की किसी भी प्रकार की बैठक में शिया समुदाय से जुड़ा कोई भी व्यक्ति शामिल न हो।
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