{"_id":"578a7b834f1c1b0f2013de27","slug":"the-woman-and-her-boyfriend-sentenced-to-life-imprisonment","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों की हत्या में मां को प्रेमी समेत उम्रकैद की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों की हत्या में मां को प्रेमी समेत उम्रकैद की सजा
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Sat, 16 Jul 2016 11:53 PM IST
विज्ञापन
लाोक अदालत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रेम प्रसंग में अपने मासूम पुत्र व पुत्री की हत्या कर देने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक सर्वेश कुमार ने महिला व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि अकबरपुर थाना क्षेत्र के गौहन्न गांव में 10 सितंबर 2010 को उस समय सनसनी फैल गई थी जब गांव के एक कुएं में गांव निवासी जगदीश प्रसाद की आठ वर्षीय पुत्री प्रिया व तीन वर्षीय पुत्र शनि का शव पड़ा पाया गया। बच्चों की मां पुष्पा भी कुएं में गिरी पड़ी थी और रो रही थी। ग्रामीणों ने महिला को निकालने के साथ दोनों बच्चों का शव निकाला।
विज्ञापन
पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि प्रेम प्रसंग में महिला ने अपने प्रेमी गांव निवासी सुरेंद्र कुमार के साथ मिलकर दोनों बच्चों की गला दबाकर हत्या कर दी और फिर दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को कुएं में फेंक कर खुद भी उसमें कूद गई।
विज्ञापन
नौकरी के सिलसिले में गैर प्रांत रह रहा जगदीश प्रसाद गांव पहुंचा तो दो दिन बाद पत्नी पुष्पा व सुरेंद्र कुमार के विरुद्ध हत्या का केस दर्ज कराया। इसमें कहा गया कि उसकी पत्नी का अवैध संबंध सुरेंद्र कुमार से था। घटना वाली रात प्रिया ने दोनों को आपत्तिजनक दशा में देख लिया था।
इसी लिए सुरेंद्र व पुष्पा ने मिलकर इस घटना को अंजाम दे दिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर बाद में चालान कर दिया। जेल में लंबी अवधि बिताने के बाद इन दिनों दोनों बाहर थे। इस बीच शनिवार को सत्र परीक्षण के दौरान मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक सर्वेश कुमार ने मामले को गंभीर प्रकृति का पाया।
उन्होंने पुष्पा व सुरेंद्र को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कहा कि यह मामला अपवाद की श्रेणी में नहीं है। ऐसे में आजीवन कारावास की सजा न्यायोचित है। न्यायाधीश ने अभियुक्तों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कहा कि अर्थदंड न देने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।