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जिला पंचायत सदस्य के परिणामों ने सभी को चौंकाया
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अंबेडकरनगर। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव ने जिले की राजनीति में नए सिरे से उथल-पुथल ला दी है। सबसे तगड़ा झटका भाजपा को लगा है, क्योंकि 41 सीटों में से सिर्फ दो स्थानों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की जीत हो पाई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार भाजपा के दोनों पूर्व जिलाध्यक्ष अपनी-अपनी सीटों पर बुरी तरह पराजित हो गए हैं। अन्य सीटों पर भी भाजपा प्रत्याशियों की पराजय का श्रेय चुनाव से पहले भंग की गई जिला कमेटी को ही सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़कर दिया जा रहा है। सपा ने सीटों के लिहाज से बसपा को उसके ही गढ़ में पीछे छोड़ दिया, जबकि कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका।
जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव परिणामों की घोषणा होने के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर चली आ रही दौड़ की दिशा बदल गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व में संभावित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लगभग सभी प्रबल दावेदार अपनी-अपनी सीटों पर हार गए हैं। बसपा की तरफ से जलालपुर से चुनाव लड़ रहीं निर्मला को अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वे अपनी ही सीट नहीं बचा पाईं।
सपा ने यूं तो किसी को अध्यक्ष पद के लिए आगे नहीं किया था, लेकिन उसका पूरा जोर सदस्यों की जीत पर था। इसमें उसे काफी हद तक कामयाबी भी मिली। 11 सीटों पर सपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज करने में सफलता हासिल कर ली। हालांकि इस मामले में बसपा का साथ भाग्य ने नहीं दिया। उसे महज 9 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई। अंबेडकरनगर जनपद बसपा के गढ़ के तौर पर जाना जाता रहा है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर बसपा समर्थित प्रत्याशियों का ही सर्वाधिक कब्जा रहा है। इसके बावजूद जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इस बार बसपा को पीछे छोड़ दिया। कांग्रेस का तो उम्मीद के ही अनुरूप खाता नहीं खुल सका। ज्यादातर सीटों पर निर्दलियों को जीत हासिल हुई। इनमें आधा दर्जन से अधिक सपा और बसपा के बागी शामिल हैं।
इन सबके बीच सबसे बुरी हालत भारतीय जनता पार्टी की जिले में हुई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में भारतीय जनता पार्टी को आगे रखने के लिए प्रदेश नेतृत्व लगातार जरूरी निर्णय ले रहा था। इसी क्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष रहे कपिल देव वर्मा ने पद से त्यागपत्र दे दिया और जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ गए।
रामनगर दक्षिण सीट से चुनाव लड़ने वाले कपिल को बुरी पराजय नसीब हुई। अध्यक्ष पद के एक अन्य दावेदार पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष शिव नायक वर्मा भी चुनाव नहीं जीत पाए। भाजपा के खराब प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 41 सदस्य सीट में से महज 2 सीट पर ही भाजपा को जीत हासिल हो पाई। इस खराब प्रदर्शन के बाद न सिर्फ कार्यकर्ताओं ने आक्रोश का इजहार किया वरन सोशल मीडिया पर भी पुरानी जिला कमेटी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। लोगों का कहना था कि पुरानी कमेटी की करतूतों का खामियाजा ही भुगतना पड़ा है वरना इतना खराब प्रदर्शन सामने न आता
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जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव परिणामों की घोषणा होने के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर चली आ रही दौड़ की दिशा बदल गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व में संभावित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लगभग सभी प्रबल दावेदार अपनी-अपनी सीटों पर हार गए हैं। बसपा की तरफ से जलालपुर से चुनाव लड़ रहीं निर्मला को अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वे अपनी ही सीट नहीं बचा पाईं।
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सपा ने यूं तो किसी को अध्यक्ष पद के लिए आगे नहीं किया था, लेकिन उसका पूरा जोर सदस्यों की जीत पर था। इसमें उसे काफी हद तक कामयाबी भी मिली। 11 सीटों पर सपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज करने में सफलता हासिल कर ली। हालांकि इस मामले में बसपा का साथ भाग्य ने नहीं दिया। उसे महज 9 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई। अंबेडकरनगर जनपद बसपा के गढ़ के तौर पर जाना जाता रहा है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर बसपा समर्थित प्रत्याशियों का ही सर्वाधिक कब्जा रहा है। इसके बावजूद जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इस बार बसपा को पीछे छोड़ दिया। कांग्रेस का तो उम्मीद के ही अनुरूप खाता नहीं खुल सका। ज्यादातर सीटों पर निर्दलियों को जीत हासिल हुई। इनमें आधा दर्जन से अधिक सपा और बसपा के बागी शामिल हैं।
इन सबके बीच सबसे बुरी हालत भारतीय जनता पार्टी की जिले में हुई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में भारतीय जनता पार्टी को आगे रखने के लिए प्रदेश नेतृत्व लगातार जरूरी निर्णय ले रहा था। इसी क्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष रहे कपिल देव वर्मा ने पद से त्यागपत्र दे दिया और जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ गए।
रामनगर दक्षिण सीट से चुनाव लड़ने वाले कपिल को बुरी पराजय नसीब हुई। अध्यक्ष पद के एक अन्य दावेदार पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष शिव नायक वर्मा भी चुनाव नहीं जीत पाए। भाजपा के खराब प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 41 सदस्य सीट में से महज 2 सीट पर ही भाजपा को जीत हासिल हो पाई। इस खराब प्रदर्शन के बाद न सिर्फ कार्यकर्ताओं ने आक्रोश का इजहार किया वरन सोशल मीडिया पर भी पुरानी जिला कमेटी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। लोगों का कहना था कि पुरानी कमेटी की करतूतों का खामियाजा ही भुगतना पड़ा है वरना इतना खराब प्रदर्शन सामने न आता