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नौ बजे तक भी नहीं खुला अस्पताल का ताला

Mon, 02 May 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Mon, 02 May 2016 11:42 PM IST
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The lock will not open until nine o'clock of hospital
अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय स्थित इस आयुर्वेदिक अस्पताल में व्याप्त है चिकित्सकों की मनमानी। - फोटो : अमर उजाला

ड्यूटी के प्रति उदासीनता का आलम देखना है तो एक बार अकबरपुर पुराने तहसील तिराहे के निकट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल चले आइए। यहां चिकित्सालय भवन की दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में अस्पताल खुलने का समय आठ बजे व बंद होने का समय दो बजे लिखा है। इसके बावजूद यहां डॉक्टर साहब के न तो आने का समय है और न ही जाने का।

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अन्य कर्मचारी भी कार्यालय समय से पहुंचने की जरूरत नहीं समझते। सोमवार को साढ़े नौ बजे तक अस्पताल नहीं खुल सका था। कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था जिससे कारण जाना जाता। आसपास के लोगों से जानकारी की गई तो पता चला कि यह सिर्फ एक दिन का मामला नही हैं। यह अस्पताल अक्सर 10 बजे के बाद ही खुलता है।
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 एलोपैथिक हो या होम्योपैथिक या फिर आयुर्वेदिक अस्पताल, इन सभी स्वास्थ्य सेवाओं को केंद्र व प्रदेश सरकारें बेहतर बनाने में लगी हैं। खास कर केंद्र सरकार तो होम्योपैथ व आयुर्वेद पर ज्यादा मेहरबान है। इसके बावजूद आयुर्वेदिक अस्पताल सेे जुड़े लोग इसकी बेहतरी के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
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प्राचीनकाल से चली आ रही यह चिकित्सा पद्घति प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर रह गई है, हालांकि आज भी लोगों के बीच आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का महत्व कम नहीं हुआ है। चिकित्सकों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं न मिल पाने के चलते ही लोगों का मोह भंग हो रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का भी कोई ज्यादा दबाव इन अस्पतालों पर नहीं रहता, इसके चलते इनकी मनमानी और भी बढ़ जाती है। अकबरपुर तहसील तिराहे के निकट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सोमवार को साढ़े नौ बजे तक नहीं खुल सका था।

यह बात अलग है कि उपचार कराने के लिए जौहरडीह के पंकज जायसवाल, चनहा के भुलई, जयराम व अकबरपुर के राकेश वर्मा अस्पताल पहुंच चुके थे। बनगांव रोड निवासी रंजीत कुमार व सियाराम ने बताया कि वे तो यहां आठ बजे से ही खड़े हैं।

अस्पताल की दीवार पर लिखा भी है कि अस्पताल सुबह आठ बजे से खुलेगा। इसके बावजूद डेढ़ घंटे का समय बीत गया लेकिन अस्पताल का ताला नहीं खुल सका। कहा कि चिकित्सकों व कर्मचारियों की इसी मनमानी के चलते लोग इस अस्पताल पर आना मुनासिब नहीं समझते।


जिला प्रशासन को ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध अभियान चलाकर छापेमारी करनी चाहिए और समय से न पहुंचने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तभी इनकी मनमानी रुकेगी।

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