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इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव रोचक होगा
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अंबेडकरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जे की जंग इस बार रोचक हो चली है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित हो जाने के बाद भाजपा के सामने जहां सीट को बचाए रखने की चुनौती है, वहीं बसपा एक बार फिर से अपनी परंपरागत सीट को कब्जे में लेने के लिए मोर्चेबंदी में जुट गई है।
फिलहाल वरिष्ठ बसपा नेता लालजी वर्मा की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शोभावती वर्मा का बतौर बसपा प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरना तय है जबकि भाजपा व सपा की तरफ से कौन अध्यक्ष पद का प्रत्याशी होगा, इसे लेकर अभी ऊहापोह का दौर चल रहा है।
वर्ष 1995 में जनपद गठन के बाद हुए पहले चुनाव में भले ही भारती सिंह के तौर पर भाजपा को पहला जिला पंचायत अध्यक्ष मिलने की सफलता मिली थी लेकिन उसके बाद से इस सीट पर प्राय: बसपा का ही कब्जा रहा है। बीते दिनों कार्यकाल पूरा कर जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटे सुधीर सिंह सपा प्रत्याशी के तौर पर निर्वाचित होने में सफल रहे थे।
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हालांकि बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बीच वे एक बार फिर से जब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो बसपा व भाजपा दोनों के सामने तगड़ी चुनौती हैं। भारतीय जनता पार्टी को यह तय करना होगा कि अब उसके कब्जे में रही सीट हाथ से न निकलने पाए। हालांकि अभी तक मुख्य रूप से पार्टी में किसी एक नाम पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।
एक-दो प्रबल दावेदार तो इसलिए भी अभी खुलकर आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनकी जिला पंचायत सदस्य सीट पर आरक्षण गड़बड़ा गया है। अब वे किस सीट पर लड़कर पहले जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हों, यह चुनौती ही मुंह फैलाए खड़ी हो गई है। इससे कई अन्य दावेदार खासे खुश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए उन्हें सदस्य पद पर जीत के बाद मौका आसानी से मिल सकेगा।
उधर बसपा एक बार फिर से अपनी इस परंपरागत सीट पर कब्जे के लिए व्यापक रणनीति के साथ मैदान में डट गई है। बसपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा पहले भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। गत चुनाव में वे पराजित हो गई थीं। अब एक बार फिर से वे चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। टांडा मध्य द्वितीय सीट से वे जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ेंगी।
शोभावती की परंपरागत सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। इसलिए वे दहियावर, जमालपुर, इल्तिफातगंज तथा अलनपुर आदि क्षेत्रों को मिलाकर बनीं टांडा मध्य द्वितीय सीट से बसपा प्रत्याशी होंगी। इस सीट पर अभी तक बसपा प्रत्याशी के तौर पर लालबहादुर विजयी हुए।
यह सीट अनुसूचित जाति के लिए थी जो अब अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए हो गई है। बसपा नेता लालजी वर्मा ने पत्नी शोभावती वर्मा को जब पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का अवसर दिलाया था तो उस समय पूर्वमंत्री की राजनीतिक कुशलता का ही परिणाम था कि उन्हें बसपा समर्थक जिला पंचायत सदस्यों की संख्या से कहीं ज्यादा मत प्राप्त हुए थे।
गत चुनाव में कथित धांधली व अन्य आरोप के चलते जमकर हुए हंगामे में शोभावती पराजित जरूर हो गई थीं लेकिन इस बार बसपा कोई चूक छोड़ने के मूड में नही है। इसके चलते ही 41 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव से होकर जिला पंचायत अध्यक्ष का यह चुनाव रोचक हो चला है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को त्रिकोणात्मक करने का पूरा प्रयास समाजवादी पार्टी करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी की तरफ से तमाम सक्रिय दावेदार जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर उतर पड़े हैं। इनमें से कई दावेदारों का अपने इलाकों में अच्छा खासा प्रभाव भी है। ऐसे में सपा का पूरा जोर फिलहाल इस बात पर है कि जिला पंचायत सदस्य ज्यादा से ज्यादा संख्या में विजयी बनाए जाएं। सदस्य ज्यादा जीतेंगे तो फिर अध्यक्ष पद के लिए पार्टी की पूरी मजबूती से दावेदारी भी हो सकेगी।
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फिलहाल वरिष्ठ बसपा नेता लालजी वर्मा की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शोभावती वर्मा का बतौर बसपा प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरना तय है जबकि भाजपा व सपा की तरफ से कौन अध्यक्ष पद का प्रत्याशी होगा, इसे लेकर अभी ऊहापोह का दौर चल रहा है।
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वर्ष 1995 में जनपद गठन के बाद हुए पहले चुनाव में भले ही भारती सिंह के तौर पर भाजपा को पहला जिला पंचायत अध्यक्ष मिलने की सफलता मिली थी लेकिन उसके बाद से इस सीट पर प्राय: बसपा का ही कब्जा रहा है। बीते दिनों कार्यकाल पूरा कर जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटे सुधीर सिंह सपा प्रत्याशी के तौर पर निर्वाचित होने में सफल रहे थे।
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हालांकि बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बीच वे एक बार फिर से जब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो बसपा व भाजपा दोनों के सामने तगड़ी चुनौती हैं। भारतीय जनता पार्टी को यह तय करना होगा कि अब उसके कब्जे में रही सीट हाथ से न निकलने पाए। हालांकि अभी तक मुख्य रूप से पार्टी में किसी एक नाम पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।
एक-दो प्रबल दावेदार तो इसलिए भी अभी खुलकर आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनकी जिला पंचायत सदस्य सीट पर आरक्षण गड़बड़ा गया है। अब वे किस सीट पर लड़कर पहले जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हों, यह चुनौती ही मुंह फैलाए खड़ी हो गई है। इससे कई अन्य दावेदार खासे खुश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए उन्हें सदस्य पद पर जीत के बाद मौका आसानी से मिल सकेगा।
उधर बसपा एक बार फिर से अपनी इस परंपरागत सीट पर कब्जे के लिए व्यापक रणनीति के साथ मैदान में डट गई है। बसपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा पहले भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। गत चुनाव में वे पराजित हो गई थीं। अब एक बार फिर से वे चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। टांडा मध्य द्वितीय सीट से वे जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ेंगी।
शोभावती की परंपरागत सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। इसलिए वे दहियावर, जमालपुर, इल्तिफातगंज तथा अलनपुर आदि क्षेत्रों को मिलाकर बनीं टांडा मध्य द्वितीय सीट से बसपा प्रत्याशी होंगी। इस सीट पर अभी तक बसपा प्रत्याशी के तौर पर लालबहादुर विजयी हुए।
यह सीट अनुसूचित जाति के लिए थी जो अब अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए हो गई है। बसपा नेता लालजी वर्मा ने पत्नी शोभावती वर्मा को जब पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का अवसर दिलाया था तो उस समय पूर्वमंत्री की राजनीतिक कुशलता का ही परिणाम था कि उन्हें बसपा समर्थक जिला पंचायत सदस्यों की संख्या से कहीं ज्यादा मत प्राप्त हुए थे।
गत चुनाव में कथित धांधली व अन्य आरोप के चलते जमकर हुए हंगामे में शोभावती पराजित जरूर हो गई थीं लेकिन इस बार बसपा कोई चूक छोड़ने के मूड में नही है। इसके चलते ही 41 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव से होकर जिला पंचायत अध्यक्ष का यह चुनाव रोचक हो चला है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को त्रिकोणात्मक करने का पूरा प्रयास समाजवादी पार्टी करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी की तरफ से तमाम सक्रिय दावेदार जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर उतर पड़े हैं। इनमें से कई दावेदारों का अपने इलाकों में अच्छा खासा प्रभाव भी है। ऐसे में सपा का पूरा जोर फिलहाल इस बात पर है कि जिला पंचायत सदस्य ज्यादा से ज्यादा संख्या में विजयी बनाए जाएं। सदस्य ज्यादा जीतेंगे तो फिर अध्यक्ष पद के लिए पार्टी की पूरी मजबूती से दावेदारी भी हो सकेगी।