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कुर्मी व मुस्लिम मतों का रुख तय करेगा जीत का आधार

Sun, 27 Feb 2022 11:59 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:59 PM IST
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The basis of victory will decide the attitude of Kurmi and Muslim votes
अंबेडकरनगर। जिले की अकबरपुर व टांडा विधानसभा सीट पर जीत में कुर्मी व मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की मुख्य भूमिका होने वाली है। दलबदल समेत टिकटों के वितरण में हुए उलटफेर के चलते दोनों सीटों पर इन दोनों वर्गों की भूमिका बदली हुई परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। मतों में बिखराव का फायदा जहां बसपा व भाजपा को मिलेगा, वहीं दोनों वर्ग के मतदाताओं ने एकजुटता दिखाई तो सपा की राह आसान हो सकती है। फिलहाल यह तीनों दल दोनों सीट पर जीत के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने की कोशिश में जुटी है।
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जिला मुख्यालय की अकबरपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से बसपा का दबदबा रहा है। बसपा प्रत्याशी के तौर पर पूर्व मंत्री रामअचल राजभर यहां से पांच बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2012 में उनके स्थान पर लड़े उनके पुत्र संजय राजभर को हराकर सपा नेता राममूर्ति वर्मा विधायक बने थे। राममूर्ति 2017 में रामअचल के हाथों पराजित हो गए। अब रामअचल भी सपा में हैं। वे अकबरपुर से सपा प्रत्याशी के तौर पर छठी बार जीत की कोशिश में हैं। उनकी राह रोकने के लिए बीता चुनाव भाजपा से लड़ने वाले पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष चंद्रप्रकाश वर्मा बसपा का टिकट लेकर आ गए हैं, जबकि कभी बसपा में साथी रहे पूर्व मंत्री धर्मराज निषाद भाजपा के टिकट से मैदान में डट गए हैं।
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सपा के परंपरागत यादव मतदाताओं के अलावा रामअचल की जीत मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता के साथ-साथ राजभर मतों के समर्थन पर जा टिकी है। कुर्मी मतदाताओं के मतों में बिखराव भी रामअचल की नैया पार करा सकता है। बसपा प्रत्याशी चंद्रप्रकाश वर्मा ने एकमात्र सजातीय प्रत्याशी होने के कारण कुर्मी मतों की एकजुटता के अलावा सर्वाधिक उम्मीद बसपा के परंपरागत दलित मतदाताओं तथा मुस्लिम मतों के बंटवारे पर लगा रखी है। अपने व्यवहार के कारण सवर्ण व वैश्य मतदाताओं में सेंध लगाने की उम्मीद भी चंद्रप्रकाश को है।
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भाजपा प्रत्याशी के लिए निषाद मतदाताओं के साथ ही सभी सवर्ण वैश्य मतदाताओं की एकजुटता के अलावा यादव, ओबीसी तथा दलित मतों में थोड़ा बहुत बिखराव जीत की नैया पार लगा सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रियंका जायसवाल महिलाओं व अन्य वर्गों के समर्थन के बूते इस कोशिश में हैं कि मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाया जा सके।
उधर, टांडा सीट पर सपा प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा की जीत का आधार परंपरागत यादव मतदाताओं के अलावा मुस्लिम मतों की एकजुटता तथा कुर्मी मतदाताओं के बड़े वर्ग का समर्थन हो सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो यहां सपा की राह आसान होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां राजभरों का ठीकठाक समर्थन भी सपा हासिल कर सकती है।

हालांकि बसपा प्रत्याशी किछौछा नगर पंचायत अध्यक्ष शबाना खातून मुस्लिम मतों की एकजुटता व सर्वाधिक अनुसूचित मतदाता की एकजुटता के अलावा ओबीसी मतों के सहारे जीत की उम्मीद लगाए हैं। भाजपा प्रत्याशी कपिलदेव वर्मा को कुर्मी तथा ओबीसी मतदाताओं के बिखराव के साथ ही सवर्ण तथा वैश्य मतदाताओं के बड़े समर्थन से नैया पार होने की उम्मीद है। कांग्रेस प्रत्याशी मेराजुद्दीन किछौछवी यहां मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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