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समय से स्कूल नहीं पहुंचते शिक्षक व बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Thu, 13 Aug 2015 10:17 PM IST
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अधिकारियों की उदासीनता के चलते न तो क्षेत्र के विद्यालय समय से खुलते हैं और न ही शिक्षक पहुंचते हैं। तमाम विद्यालयों में तो अधिकांश बच्चे व शिक्षक प्रार्थना होने के बाद ही पहुंचते हैं। सुबह आठ बजे से खुलने वाले विद्यालयों में साढ़े आठ बजे तक शिक्षकों व बच्चों का आना लगा रहता है।
बताते चलें कि परिषदीय विद्यालयों में शासन के निर्देशानुसार सुबह आठ बजे से अपराह्न एक बजे तक शिक्षण का समय तय है। क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की मनमानी से साढ़े आठ बजे तक शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पाता। निर्धारित समय सारिणी के अनुसार पौने आठ बजे प्रार्थना हो जानी चाहिए, मगर चंद स्कूलों में ही ऐसा होता है।
परिषदीय विद्यालयों की इस हालत से अभिभावकों में खासा आक्रोश है। कटेहरी शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मरथुआ सरैया में तो कई शिक्षकों के साथ ही अधिकांश बच्चे सवा आठ बजे के बाद ही पहुंचते हैं। यही हाल प्राथमिक विद्यालय भरतपुर गिरंट, अशरफपुर बरवां, कशियापुर सहित कई अन्य परिषदीय विद्यालयों का भी है।
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इन स्कूलों में शिक्षकों की बेपरवाही साफ दिखती है। क्षेत्र के गिरीश यादव का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में जब शिक्षक ही विलंब से पहुंचते हैं, तो आखिर वो बच्चों को देर से आने पर कैसे टोकेंगे। उन्होंने उच्चाधिकारियों पर भी उदासीनता का आरोप लगाया।
कहा कि अधिकारी भी विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने के बजाय ऑफिस में बैठना ज्यादा जरूरी समझते हैं। क्षेत्र के मलखान सिंह, नरेंद्र सिंह आदि ने बीएसए से विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने की मांग की है।
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बताते चलें कि परिषदीय विद्यालयों में शासन के निर्देशानुसार सुबह आठ बजे से अपराह्न एक बजे तक शिक्षण का समय तय है। क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की मनमानी से साढ़े आठ बजे तक शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पाता। निर्धारित समय सारिणी के अनुसार पौने आठ बजे प्रार्थना हो जानी चाहिए, मगर चंद स्कूलों में ही ऐसा होता है।
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परिषदीय विद्यालयों की इस हालत से अभिभावकों में खासा आक्रोश है। कटेहरी शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मरथुआ सरैया में तो कई शिक्षकों के साथ ही अधिकांश बच्चे सवा आठ बजे के बाद ही पहुंचते हैं। यही हाल प्राथमिक विद्यालय भरतपुर गिरंट, अशरफपुर बरवां, कशियापुर सहित कई अन्य परिषदीय विद्यालयों का भी है।
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इन स्कूलों में शिक्षकों की बेपरवाही साफ दिखती है। क्षेत्र के गिरीश यादव का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में जब शिक्षक ही विलंब से पहुंचते हैं, तो आखिर वो बच्चों को देर से आने पर कैसे टोकेंगे। उन्होंने उच्चाधिकारियों पर भी उदासीनता का आरोप लगाया।
कहा कि अधिकारी भी विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने के बजाय ऑफिस में बैठना ज्यादा जरूरी समझते हैं। क्षेत्र के मलखान सिंह, नरेंद्र सिंह आदि ने बीएसए से विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने की मांग की है।