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संत कंवरराम व झूलेलाल के आदर्शों से लें प्रेरणा
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अंबेडकरनगर। सिंधी समाज के तत्वावधान में बुधवार को प्रभु झूलेलाल व संत कंवरराम की जयंती पहितीपुर मार्ग स्थित संगवानी भवन में मनाई गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि संत कंवरराम गरीबों व अछूतों के लिए मसीहा थे। उनका धर्म निरेपक्षता में अटूट विश्वास था। ऐसे आदर्शों से प्रेरणा लेकर सिंधी समाज के युवा समाज के प्रति अपनी भूमिका तय कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सिंधी युवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश ओमी ने प्रभु झूलेलाल व संत कंवरराम के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि प्रभु झूलेलाल सिंधी समाज के इष्ट देवता हैं। विश्व में सुख, शांति व अमन चैन कायम रहे और चारों दिशाओं में खुशहाली तय हो, इसलिए सिंधी समाज प्रभु झूलेलाल से कामना करता है। प्रदेश अध्यक्ष ने संत कंवरराम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मानवता के मसीहा थे। सिंधी समाज उन्हें पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ पूजता है। कहा कि संत कंवरराम गरीबों व अछूतों के लिए मसीहा थे। उनका धर्म निरपेक्षता में अटूट विश्वास था।
उन्होंने सिंधी समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे आदर्शों से प्रेरणा लेकर बेहतरी की तरफ बढ़ें। सिंधी समाज के मुखिया जयराम संगवानी ने कहा कि प्रदेश सरकार को प्रभु झूलेलाल जयंती पर पुन: राजकीय अवकाश घोषित करना चाहिए। प्रभु झूलेलाल की जीवनी सरकारी पाठ्य पुस्तकों में शामिल करना चाहिए। वहीं अपने परिवार में सभी सदस्यों से सिंधी भाषा का प्रयोग करने पर वैशाली खेटपाल को बबिता संगवानी ने स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।
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इससे पहले सिंधी समाज की महिलाओं ने प्रभु झूलेलाल व संत कंवरराम के गीत गाकर याद किया गया। आरती एवं अरदास भी की गई। इस मौके पर शंभू लखमानी, किरन पोपटानी, हरीश खेटपाल, जितेंद्र लखमानी, श्रवण लखमानी, कैलाश राजपाल, ध्रुव लखमानी, सुशील वरियानी, राजेश लखमानी व हरीश अंदानी आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सिंधी युवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश ओमी ने प्रभु झूलेलाल व संत कंवरराम के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि प्रभु झूलेलाल सिंधी समाज के इष्ट देवता हैं। विश्व में सुख, शांति व अमन चैन कायम रहे और चारों दिशाओं में खुशहाली तय हो, इसलिए सिंधी समाज प्रभु झूलेलाल से कामना करता है। प्रदेश अध्यक्ष ने संत कंवरराम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मानवता के मसीहा थे। सिंधी समाज उन्हें पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ पूजता है। कहा कि संत कंवरराम गरीबों व अछूतों के लिए मसीहा थे। उनका धर्म निरपेक्षता में अटूट विश्वास था।
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उन्होंने सिंधी समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे आदर्शों से प्रेरणा लेकर बेहतरी की तरफ बढ़ें। सिंधी समाज के मुखिया जयराम संगवानी ने कहा कि प्रदेश सरकार को प्रभु झूलेलाल जयंती पर पुन: राजकीय अवकाश घोषित करना चाहिए। प्रभु झूलेलाल की जीवनी सरकारी पाठ्य पुस्तकों में शामिल करना चाहिए। वहीं अपने परिवार में सभी सदस्यों से सिंधी भाषा का प्रयोग करने पर वैशाली खेटपाल को बबिता संगवानी ने स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।
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इससे पहले सिंधी समाज की महिलाओं ने प्रभु झूलेलाल व संत कंवरराम के गीत गाकर याद किया गया। आरती एवं अरदास भी की गई। इस मौके पर शंभू लखमानी, किरन पोपटानी, हरीश खेटपाल, जितेंद्र लखमानी, श्रवण लखमानी, कैलाश राजपाल, ध्रुव लखमानी, सुशील वरियानी, राजेश लखमानी व हरीश अंदानी आदि मौजूद रहे।