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रावण वध होते ही श्रद्घालुओं ने लगाए जय श्रीराम के नारे
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फोटो-09 अंबेडकरनगर के बहोरिकपुर में मंचन करते कलाकार
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। श्रीरामलीला समिति बहोरिकपुर में चल रही पांच दिवसीय रामलीला के पांचवें व अंतिम दिन लंका दहन, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, कुंभकरण वध, मेघनाथ वध व रावण वध का मंचन कलाकारों ने किया। इन रोमांचित कर देने वाले दृश्यों को देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इसी के साथ रामलीला का समापन हो गया। मंचन के बाद कलाकारों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाया गया।
अंतिम दिवस के मंचन से पहले समिति पदाधिकारियों ने महावीर हनुमान की आरती कर सुख शांति की कामना की। इससे पहले मंचन के चौथे दिन शनिवार को सीता हरण व सबरी उद्धार आदि लीलाओं का मंचन कलाकारों ने किया। रविवार शाम मंचन के पहले दृश्य में दिखाया जाता है कि बहन की नाक कान काट दिए जाने से नाराज रावण बदले की आग में जलने लगता है। वह माता सीता को छल से हरण कर लेने की योजना बनाता है। मामा मारीच के पास पहुंचता है और अपनी योजना से अवगत कराता है। रावण कहता है कि मारीच इस समय तुम्हीं एक हो, जो मेरी मदद करते सकते हो।
मारीच कहता है लंकेश्वर यदि तुम्हारे मन में देवी सीता को छल से अपने साथ ले जाने का विचार है तो तुम उसे इसी क्षण अपने मन से निकाल दो। न तुम्हें प्रभु राम के बल का ज्ञान है और न उनकी कीर्ति का। अज्ञानी मत बनो अपन हठ त्याग दो। इस पर रावण आगबबूला हो जाता है और कहता है कि मारीच तुम्हें मेरे यश और कीर्ति का ज्ञान नहीं है। अजेय पर्वत के समान रावण के समक्ष देव, असुर गंधर्व आदि सभी नतमस्तक रहते हैं और तुम मुझे दो वनवासी राजकुमारों की शक्ति से डरा रहे हो। यदि तुमने मेरे प्रस्ताव को नहीं माना तो मैं तुम्हे मृत्युदंड दूंगा।
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अगले दृश्य में मारीच स्वर्ण मृग के वेष में भगवान राम के कुटिया के चारों तरफ विचरण करता है, जिसकी सुंदरता को देख देवी सीताजी मंत्रमुग्ध हो जाती हैं। माता सीता के आग्रह पर भगवान राम हिरण को पकड़ने के लिए पीछा करने लगते हैं। इस बीच भगवान राम के बाण से मारीच घायल हो जाता है और छल से भगवान राम के आवाज में हाय लक्ष्मण हाय लक्ष्मण की रट लगाने लगता है। आवाज सुन सीता के मन में भय पैदा हो जाता है वे भगवान राम की सहायता के लिए लक्ष्मण को भेजती हैं। इस बीच मौका पाकर रावण साधु का वेष धारण कर सीता को छल से अपने साथ लंका लेकर चला जाता है। सीता का विलाप सुन गिद्घराज जटायु व रावण के बीच युद्घ भी होता है। अन्तत: जटायु वीरगति को प्राप्त होते हैं। कलाकारों ने शबरी उद्धार, बालि वध, मेघनाथ वध तथा रावण वध का भी मंचन किया। रावण का वध होते ही जय श्रीराम के नारे से पंडाल गुंजायमान हो गया। इसी के साथ पांच दिवसीय रामलीला का समापन भी हो गया। संचालक प्रदीप श्रीवास्तव, भूपेंद्र मोहन श्रीवास्तव आदि ने कलाकारों की सराहना करते हुए सम्मानित भी किया।
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अंतिम दिवस के मंचन से पहले समिति पदाधिकारियों ने महावीर हनुमान की आरती कर सुख शांति की कामना की। इससे पहले मंचन के चौथे दिन शनिवार को सीता हरण व सबरी उद्धार आदि लीलाओं का मंचन कलाकारों ने किया। रविवार शाम मंचन के पहले दृश्य में दिखाया जाता है कि बहन की नाक कान काट दिए जाने से नाराज रावण बदले की आग में जलने लगता है। वह माता सीता को छल से हरण कर लेने की योजना बनाता है। मामा मारीच के पास पहुंचता है और अपनी योजना से अवगत कराता है। रावण कहता है कि मारीच इस समय तुम्हीं एक हो, जो मेरी मदद करते सकते हो।
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मारीच कहता है लंकेश्वर यदि तुम्हारे मन में देवी सीता को छल से अपने साथ ले जाने का विचार है तो तुम उसे इसी क्षण अपने मन से निकाल दो। न तुम्हें प्रभु राम के बल का ज्ञान है और न उनकी कीर्ति का। अज्ञानी मत बनो अपन हठ त्याग दो। इस पर रावण आगबबूला हो जाता है और कहता है कि मारीच तुम्हें मेरे यश और कीर्ति का ज्ञान नहीं है। अजेय पर्वत के समान रावण के समक्ष देव, असुर गंधर्व आदि सभी नतमस्तक रहते हैं और तुम मुझे दो वनवासी राजकुमारों की शक्ति से डरा रहे हो। यदि तुमने मेरे प्रस्ताव को नहीं माना तो मैं तुम्हे मृत्युदंड दूंगा।
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अगले दृश्य में मारीच स्वर्ण मृग के वेष में भगवान राम के कुटिया के चारों तरफ विचरण करता है, जिसकी सुंदरता को देख देवी सीताजी मंत्रमुग्ध हो जाती हैं। माता सीता के आग्रह पर भगवान राम हिरण को पकड़ने के लिए पीछा करने लगते हैं। इस बीच भगवान राम के बाण से मारीच घायल हो जाता है और छल से भगवान राम के आवाज में हाय लक्ष्मण हाय लक्ष्मण की रट लगाने लगता है। आवाज सुन सीता के मन में भय पैदा हो जाता है वे भगवान राम की सहायता के लिए लक्ष्मण को भेजती हैं। इस बीच मौका पाकर रावण साधु का वेष धारण कर सीता को छल से अपने साथ लंका लेकर चला जाता है। सीता का विलाप सुन गिद्घराज जटायु व रावण के बीच युद्घ भी होता है। अन्तत: जटायु वीरगति को प्राप्त होते हैं। कलाकारों ने शबरी उद्धार, बालि वध, मेघनाथ वध तथा रावण वध का भी मंचन किया। रावण का वध होते ही जय श्रीराम के नारे से पंडाल गुंजायमान हो गया। इसी के साथ पांच दिवसीय रामलीला का समापन भी हो गया। संचालक प्रदीप श्रीवास्तव, भूपेंद्र मोहन श्रीवास्तव आदि ने कलाकारों की सराहना करते हुए सम्मानित भी किया।