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Ambedkar Nagar News: जलभराव से रास्ते बंद, चारे की किल्लत और जहरीले जीवों से दहशत
Sat, 06 Sep 2025 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:37 AM IST
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मांझा कम्हरिया के पटपरवा गांव में बाढ़ का पानी रास्ते पर भरने के बाद गुजरती मासूम व बुजुर्ग।
अंबेडकरनगर। आलापुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और अब यह खतरे के निशान से महज 16 सेंटीमीटर नीचे है। लगातार बढ़ते पानी ने मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों को चपेट में ले लिया है। जलभराव के चलते कई रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं और ग्रामीण नावों या अस्थायी रास्तों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। शुक्रवार को सरयू नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह 85.45 मीटर तक पहुंच गया। खतरे का निशान 85.61 मीटर है। यदि यही स्थिति बनी रही तो शनिवार तक कई गांव जलमग्न हो सकते हैं।
पटपरवा मार्ग समेत कई रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। बद्री का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा, हंसू का पूरा और करिया लोनिया का पूरा जैसे गांवों के चारों ओर पानी फैल चुका है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतु रिहायशी इलाकों में दिखाई देने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें बाढ़ से ज्यादा जहरीले जीवों का डर सता रहा है। बच्चे और पशु भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मांझा कम्हरिया क्षेत्र के कल्लू का पूरा, नौंका पूरा, सत्यनारायण का पूरा, निषाद बस्ती, दलित बस्ती और सिद्धनाथ का पूरा जैसे गांव जलभराव की चपेट में आने वाले हैं। आराजी देवारा के भी कई मजरों तक पानी पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो एक दर्जन से अधिक मजरों के डूबने की आशंका है।
पशुओं के लिए चारे का संकट गहराया
ग्रामीण पंचराम, राजेश और रामचंद्र ने बताया कि खेतों में पानी भर जाने से अब पशुओं के लिए चारा काटना मुश्किल हो गया है। पहले से ही हरे चारे की कमी है और यदि जलभराव ऐसे ही बना रहा तो पशुपालन पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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11 नावें तैनात
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 11 नावों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है। स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है।
सुभाष सिंह धामी, एसडीएम
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पटपरवा मार्ग समेत कई रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। बद्री का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा, हंसू का पूरा और करिया लोनिया का पूरा जैसे गांवों के चारों ओर पानी फैल चुका है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतु रिहायशी इलाकों में दिखाई देने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें बाढ़ से ज्यादा जहरीले जीवों का डर सता रहा है। बच्चे और पशु भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मांझा कम्हरिया क्षेत्र के कल्लू का पूरा, नौंका पूरा, सत्यनारायण का पूरा, निषाद बस्ती, दलित बस्ती और सिद्धनाथ का पूरा जैसे गांव जलभराव की चपेट में आने वाले हैं। आराजी देवारा के भी कई मजरों तक पानी पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो एक दर्जन से अधिक मजरों के डूबने की आशंका है।
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पशुओं के लिए चारे का संकट गहराया
ग्रामीण पंचराम, राजेश और रामचंद्र ने बताया कि खेतों में पानी भर जाने से अब पशुओं के लिए चारा काटना मुश्किल हो गया है। पहले से ही हरे चारे की कमी है और यदि जलभराव ऐसे ही बना रहा तो पशुपालन पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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11 नावें तैनात
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 11 नावों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है। स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है।
सुभाष सिंह धामी, एसडीएम