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Ambedkar Nagar News: धूप निकलने से राहत पर बीमारियों का बढ़ा प्रकोप
Wed, 04 Feb 2026 10:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 04 Feb 2026 10:43 PM IST
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टांडा के ब्राहिमपुर कुसुमा गांव में गेहूं के खेत में खाद का छिड़काव करता किसान।
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अंबेडकरनगर। जिले में बुधवार को भी मौसम का मिजाज बदलता रहा। सुबह तेज हवा और बादलों की आवाजाही के बाद दिन में तेज धूप निकल आई, जिससे मंगलवार की बारिश के बाद बढ़ी गलन से लोगों को राहत मिली। मौसम के इस उतार-चढ़ाव का असर आम जनजीवन, स्वास्थ्य और फसलों पर दिखाई दे रहा है।
धूप निकलने से अकबरपुर शहर की सड़कों और बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई। सहालग के मद्देनजर खरीदारी में जुटे लोगों और घरेलू कामकाज निपटाने वालों को मौसम खुलने से बड़ी सहूलियत हुई। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण बीमारियां भी बढ़ी हैं। जिला अस्पताल की हाफ-डे ओपीडी में ही करीब 500 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा 152 मरीज सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित थे। इसके अलावा सांस, हृदय और हड्डी रोगों से ग्रसित मरीज भी बड़ी संख्या में परामर्श के लिए आए।
फसलों की बात करें तो गेहूं और दलहन के लिए यह मौसम लाभदायक माना जा रहा है। मौसम साफ होते ही किसानों ने गेहूं की सिंचाई शुरू कर दी है। हालांकि, सरसों, बैंगन और टमाटर में माहू तथा आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
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सुबह-शाम रखें सेहत का ख्याल
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव का सबसे बुरा असर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुबह और रात के समय अभी भी ठंड बरकरार है, इसलिए गर्म कपड़े पहनने में लापरवाही न बरतें। ठंडा पानी पीने से बचें और संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। वायरल के लक्षण दिखने बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लें, क्योंकि यह समस्या को और गंभीर बना सकती है।
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बदलते मौसम में करें फसलों की खास देखभाल
कृषि विज्ञान केंद्र पांती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने बताया कि हवा चलने की स्थिति में अगेती गेहूं की फसल में भारी पानी भरने के बजाय हल्की सिंचाई करें, जबकि पछेती गेहूं में इस समय आवश्यकतानुसार पानी लगाया जा सकता है। सरसों, बैंगन और टमाटर में माहू कीट के प्रकोप से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें। आलू को झुलसा रोग से बचाने हेतु रिडोमिल की 750 मिलीग्राम से एक लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। डॉ. रामजीत ने वर्तमान मौसम को देखते हुए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने पर जोर दिया है।
क्या कहते हैं किसान
टांडा के ब्राहिमपुर कुसुमा के किसान मोनू वर्मा बताते हैं कि मौसम में बदलाव के कारण खेत पर समय अधिक देना पड़ रहा है। हवा के कारण समस्या हो रही है, इसलिए पानी शाम के समय लगा रहे हैं। विकास वर्मा ने बताया कि सब्जियों की खेती पर इस समय ध्यान देना जरूरी हो गया है। गोभी, टमाटर और बैंगन को बारिश होने पर नुकसान होगा।
बीते सप्ताह कुछ ऐसा रहा मौसम
दिन - अधिकतम तापमान - न्यूनतम तापमान (सेल्सियस में)
04 फरवरी- 23- 12
03 फरवरी - 22 - 12
02 फरवरी - 26 - 13
01 फरवरी - 20 - 9
31 जनवरी - 23 - 11
30 जनवरी - 23 - 10
29 जनवरी - 20.9 - 11.2
28 जनवरी - 21 - 12
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धूप निकलने से अकबरपुर शहर की सड़कों और बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई। सहालग के मद्देनजर खरीदारी में जुटे लोगों और घरेलू कामकाज निपटाने वालों को मौसम खुलने से बड़ी सहूलियत हुई। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण बीमारियां भी बढ़ी हैं। जिला अस्पताल की हाफ-डे ओपीडी में ही करीब 500 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा 152 मरीज सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित थे। इसके अलावा सांस, हृदय और हड्डी रोगों से ग्रसित मरीज भी बड़ी संख्या में परामर्श के लिए आए।
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फसलों की बात करें तो गेहूं और दलहन के लिए यह मौसम लाभदायक माना जा रहा है। मौसम साफ होते ही किसानों ने गेहूं की सिंचाई शुरू कर दी है। हालांकि, सरसों, बैंगन और टमाटर में माहू तथा आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
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सुबह-शाम रखें सेहत का ख्याल
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव का सबसे बुरा असर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुबह और रात के समय अभी भी ठंड बरकरार है, इसलिए गर्म कपड़े पहनने में लापरवाही न बरतें। ठंडा पानी पीने से बचें और संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। वायरल के लक्षण दिखने बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लें, क्योंकि यह समस्या को और गंभीर बना सकती है।
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बदलते मौसम में करें फसलों की खास देखभाल
कृषि विज्ञान केंद्र पांती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने बताया कि हवा चलने की स्थिति में अगेती गेहूं की फसल में भारी पानी भरने के बजाय हल्की सिंचाई करें, जबकि पछेती गेहूं में इस समय आवश्यकतानुसार पानी लगाया जा सकता है। सरसों, बैंगन और टमाटर में माहू कीट के प्रकोप से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें। आलू को झुलसा रोग से बचाने हेतु रिडोमिल की 750 मिलीग्राम से एक लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। डॉ. रामजीत ने वर्तमान मौसम को देखते हुए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने पर जोर दिया है।
क्या कहते हैं किसान
टांडा के ब्राहिमपुर कुसुमा के किसान मोनू वर्मा बताते हैं कि मौसम में बदलाव के कारण खेत पर समय अधिक देना पड़ रहा है। हवा के कारण समस्या हो रही है, इसलिए पानी शाम के समय लगा रहे हैं। विकास वर्मा ने बताया कि सब्जियों की खेती पर इस समय ध्यान देना जरूरी हो गया है। गोभी, टमाटर और बैंगन को बारिश होने पर नुकसान होगा।
बीते सप्ताह कुछ ऐसा रहा मौसम
दिन - अधिकतम तापमान - न्यूनतम तापमान (सेल्सियस में)
04 फरवरी- 23- 12
03 फरवरी - 22 - 12
02 फरवरी - 26 - 13
01 फरवरी - 20 - 9
31 जनवरी - 23 - 11
30 जनवरी - 23 - 10
29 जनवरी - 20.9 - 11.2
28 जनवरी - 21 - 12