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तेज बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Sat, 01 Aug 2015 11:49 PM IST
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लगातार हुई बारिश से किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। सूखे जैसे हालात के बीच किसानों के लिए बारिश की एक एक बूंद अमृत बनकर गिर रही थी। लगातार हुई बारिश से खेत लबालब हो गए। बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव से आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
कई दिनों से निकल रही तेज धूप के चलते जिले में सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो गए थे। खेतों में दरारें पडने के चलते धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पडने लगा था। इससे किसानों के चेहरे मुरझाने लगे थे। उन्हें लग रहा था कि जिस प्रकार से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी, उसी प्रकार धान की फसल भी बर्बाद हो सकती है।
इसे देखते हुए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लोग बारिश के लिए तरह तरह के टोटके अपनाने लगे थे। इस बीच शुक्रवार सुबह से ही आसमान पर जब काले बादल उमड़ने घुमड़ने लगे तो किसानों को उम्मीदें हुई। पूर्वाहन से ही बूंदाबांदी होने लगी थी, लेकिन शुक्रवार अपराह्न से काले मेघा झमाझम बरसने लगे।
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देरसायं तक तो ज्यादा तेज बारिश तो नहीं हुई, लेकिन रात साढ़े 10 बजे के बाद से पूरी रात मूसलाधार बारिश होती रही। यह सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। शनिवार प्रात: 10 बजे तक तेज बारिश का दौर चला, जबकि इसके बाद बारिश का दौर थमना शुरु हुआ। दोपर तक हुई बारिश से किसानों के मुरझाए चेहरे चमक उठे।
तमाम किसान बारिश में भीगते हुए अपने अपने खेतों पर पहुंच गए। तेज धूप से मुरझा चुकीं धान की अधिकांश फसलें बारिश के पानी से लहलहा उठीं। खेतों में लबालब पानी भर जाने से किसानों के समक्ष सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो गई।
इस बीच लगातार 20 घंटे तक हुई बारिश ने जिले का आम जनजीवन छिन्न भिन्न कर दिया। शुक्रवार को अपराह्न बाद से सड़कों व बाजारों में सन्नाटा छा गया, जिसके चलते तमाम दुकानदारों को अपने अपने प्रतिष्ठान जल्दी बंद कर देने पड़े। इस बीच शनिवार को दोपहर तक हुई बारिश के चलते भी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आमद दोपहर बाद भी प्रभावित हुई।
सुबह जिन्हें अपने दफ्तर या प्रतिष्ठान जाना था, वे भी विलंब से पहुंचे। सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूली बच्चों को हुई। अभिभावकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उधर लगातार हुई बारिश के चलते उमसभरी भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को भी काफी राहत तो मिली>
अकबरपुर नगर में जलनिकासी के संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शनिवार दोपहर बाद बारिश का दौर थमने के बावजूद काफी देर तक नाले नालियों का पानी पटरियों व सड़कों पर बहता रहा।
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कई दिनों से निकल रही तेज धूप के चलते जिले में सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो गए थे। खेतों में दरारें पडने के चलते धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पडने लगा था। इससे किसानों के चेहरे मुरझाने लगे थे। उन्हें लग रहा था कि जिस प्रकार से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी, उसी प्रकार धान की फसल भी बर्बाद हो सकती है।
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इसे देखते हुए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लोग बारिश के लिए तरह तरह के टोटके अपनाने लगे थे। इस बीच शुक्रवार सुबह से ही आसमान पर जब काले बादल उमड़ने घुमड़ने लगे तो किसानों को उम्मीदें हुई। पूर्वाहन से ही बूंदाबांदी होने लगी थी, लेकिन शुक्रवार अपराह्न से काले मेघा झमाझम बरसने लगे।
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देरसायं तक तो ज्यादा तेज बारिश तो नहीं हुई, लेकिन रात साढ़े 10 बजे के बाद से पूरी रात मूसलाधार बारिश होती रही। यह सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। शनिवार प्रात: 10 बजे तक तेज बारिश का दौर चला, जबकि इसके बाद बारिश का दौर थमना शुरु हुआ। दोपर तक हुई बारिश से किसानों के मुरझाए चेहरे चमक उठे।
तमाम किसान बारिश में भीगते हुए अपने अपने खेतों पर पहुंच गए। तेज धूप से मुरझा चुकीं धान की अधिकांश फसलें बारिश के पानी से लहलहा उठीं। खेतों में लबालब पानी भर जाने से किसानों के समक्ष सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो गई।
इस बीच लगातार 20 घंटे तक हुई बारिश ने जिले का आम जनजीवन छिन्न भिन्न कर दिया। शुक्रवार को अपराह्न बाद से सड़कों व बाजारों में सन्नाटा छा गया, जिसके चलते तमाम दुकानदारों को अपने अपने प्रतिष्ठान जल्दी बंद कर देने पड़े। इस बीच शनिवार को दोपहर तक हुई बारिश के चलते भी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आमद दोपहर बाद भी प्रभावित हुई।
सुबह जिन्हें अपने दफ्तर या प्रतिष्ठान जाना था, वे भी विलंब से पहुंचे। सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूली बच्चों को हुई। अभिभावकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उधर लगातार हुई बारिश के चलते उमसभरी भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को भी काफी राहत तो मिली>
अकबरपुर नगर में जलनिकासी के संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शनिवार दोपहर बाद बारिश का दौर थमने के बावजूद काफी देर तक नाले नालियों का पानी पटरियों व सड़कों पर बहता रहा।