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कागजों में हो रहा पौधरोपण
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:08 PM IST
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अंबेडकरनगर में इस तरह क्षतिग्रस्त हैं पेड़ों की सुरक्षा को सड़क के किनारे बने ट्री-गार्ड।
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किए जाने को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। कागज पर तो पौधरोपण का लक्ष्य पूर्ण कर लिए जाने का दावा बढ़-चढ़कर किया जाता है लेकिन जमीनी हकीकत इससे परे है।
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जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ हरे पेड़, बल्कि प्रतिबंधित किस्म के पेड़ों की कटान अक्सर धड़ल्ले से होती रहती है लेकिन शिकायतों के बाद भी इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। नतीजतन लकड़ी माफिया के हौसले बुलंद हैं। 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है।
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इसे लेकर जिले में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं दिखाई दे रही है। न तो बड़े पैमाने पर पौधरोपण को लेकर किसी प्रकार की योजना वन विभाग द्वारा सामने लायी गई है और न ही जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए ही किसी प्रकार की तैयारी दिख रही है।
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ऐसा तब है, जबकि बीते कुछ वर्षों से पर्यावरण तेजी से असंतुलित हो रहा है। कभी सूखा पड़ जाता है तो कभी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हरे व प्रतिबंधित किस्म के पेड़ों की कटान धड़ल्ले से की जाती है लेकिन तमाम शिकायतों के बावजूद इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है।
नतीजा यह है कि लकड़ी माफिया के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार ऐसे काम में लिप्त हैं। इसके अलावा पृथ्वी को हरा-भरा रखने एवं पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए शासन से प्रत्येक वर्ष बड़े पैमाने पर वन विभाग समेत अन्य विभागों को पौधरोपण का लक्ष्य दिया जाता है।इसे ज्यादातर कागज पर ही पूर्ण कर लिया जाता है।
जो पेड़ लगाए भी जाते हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर भी विभागीय अधिकारी गंभीरता नहीं दिखाते। नतीजा यह होता है कि ज्यादातर पौधे देखरेख के अभाव में नष्ट हो जाते हैं। हालांकि वन विभाग का दावा है कि काटे गए पेड़ों से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड तो बनाए जाते हैं लेकिन उनमें दोयम दर्जे के मसालों का प्रयोग किया जाता है। नतीजतन बनने के साथ ही वे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं जिससे पौधे बढ़ने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं।
कायदन लगभग पांच फीट ऊंचा ट्री-गार्ड लगाया जाना चाहिए लेकिन मात्र दो से तीन फीट तक का ही ट्री-गार्ड आमतौर पर बनाया जाता है। इससे ज्यादातर पौधे मवेशियों का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर शहरी क्षेत्रों के नजदीक बने ट्री-गार्ड ही अक्सर सुरक्षित नहीं रह पाते हैं।
बड़े होने से पहले ही पौधे अपना अस्तित्व खो बैठते हैं। ट्री-गार्ड के रख-रखाव को लेकर भी कोई समुचित प्रबंध सामने नहीं आ पाया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि सिर्फ दावों से काम चलने वाला नहीं है। उसे हकीकत देने के लिए ठोस कदम उठाना होगा।
कहा कि न सिर्फ बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएं बल्कि उनकी सुरक्षा की भी व्यवस्था की जाए। पौधरोपण अभियान में जन सहभागिता तय करनी होगी। आम लोगों को इसका महत्व बताना होग तथा अहसास भी कराना होगा।
त्रिमूर्ति संस्थान के चेयरमैन आशुतोष पाठक व सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम ने कहा कि पर्यावरण संतुलन को लेकर सिर्फ विभाग की ही नहीं बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है।
प्रभागीय वनाधिकारी एके शुक्ल ने बताया कि वन विभाग को आठ लाख 10 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य शासन से मिला है। इसे एक ही दिन लगाया जाएगा। इसके लिए समूचे जनपद में जगह-जगह गड्ढों का चिह्नांकन कर लिया गया है।
पौधरोपण को एक हजार मजदूरों को लगाया जाएगा। साथ ही सभी जिलास्तरीय अधिकारी भी इसमें अपना सहयोग देंगे। इसके अलावा अन्य विभागों को एक लाख 28 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य शासन से मिला है।