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अंकल! कैसे खेलें हम, पार्क में टूटे पड़े हैं झूले, ठप है बोटिंग
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अंबेडकरनगर के राजकीय उद्यान पार्क में टूटे पड़े झूले से प्रतिदिन इसी तरह निराश होते हैं बच्चे
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। योगी अंकल कैसे खेलें हम। पार्क में टूटे पड़े हैं झूले, ठप है बोटिंग। यह अपील बुधवार को जिले के एक मात्र राजकीय पार्क में मिले बच्चों ने मासूम अंदाज में की। पार्क में आने के बावजूद यहां की बदहाली को लेकर उनमें निराशा साफ दिखाई दी। बच्चों का यह कहना वाजिब भी है, क्योंकि लगभग डेढ़ दशक पहले जिला मुख्यालय में बना पार्क बच्चों व आम लोगों की उम्मीदों को प्रतिदिन तार-तार कर रहा है। अंबेडकरनगर के नाम से जनपद का सृजन करने वाली तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने ही जनपद गठन के बाद अपने एक अन्य कार्यकाल में जिला मुख्यालय को राजकीय पार्क की सुविधा दी थी।
सरकार की तरफ से जरूरी धनराशि के अलावा तत्कालीन जिला प्रशासन ने एनटीपीसी आदि के सहयोग से यहां झील, पैडल बोट समेत झूले व फव्वारे आदि का प्रबंध किया था। समय के साथ सुविधाओं में बढ़ोतरी के बजाए हालत बुरी ही हो रही है। मौजूदा समय में यहां कई झूले क्षतिग्रस्त हैं तो बोटिंग के लिए तैयार की गई झील से मोटर बोट नदारद है। पीने के लिए न तो स्वच्छ पेयजल की समुचित सुविधा उपलब्ध है और न ही बैठने के लिए टीनशेड युक्त बेंच। नतीजा यह कि यहां पहुंचने के दौरान कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बुधवार को पार्क पहुंची
अमर उजाला टीम पार्क पहुंची तो यहां बोटिंग के लिए बनाई गई झील के पास रसूलाबाद निवासी एक परिवार के बच्चे मौजूद मिले। वे इस उम्मीद में यहां आए थे कि परिवार के साथ झील में बोटिंग की सुविधा का आनंद उठा सकेेंगे। बच्चे सार्थक व स्नेहा ने अत्यंत मासूमियत से कहा कि योगी अंकल आखिर इधर ध्यान क्यों नहीं दे रहे। बच्चों का कहना था कि अगर उनकी बात योगी अंकल तक पहुंच जाए तो जरूर वे हम लोगों की बात मानेेंगे।
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पार्क में परिवार के साथ लुत्फ उठाने पहुंचे बच्चों को झूलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण मायूस होना पड़ा। यहां कई झूले ऐसे थे जो क्षतिग्रस्त होकर ठप पड़े हैं। उन्हें बनवाने की सुध लेने वाला कोई नही है। मीरानपुर निवासी बच्चे मानसी चतुर्वेदी, सुहानी, देवा वर्मा व शिखर श्रीवास्तव आदि झूलों के बगल निराश खड़े दिखायी दिए। उनकी आंखों में उदासी के भाव साफ साफ दिख रहे थे।
पार्क में मिलीं युवतियों रुचि वर्मा, शिशु चतुर्वेदी व कीर्ति ने कहा कि पार्क में बैठने के लिए समुचित बेंच नही हैं। शेड युक्त बेंच लगनी चाहिए। घास की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। युवतियों का कहना था कि पार्क में फूल वाले पौधे और बढ़ाएं जाएं।
पार्क में शीतल पेयजल के लिए कोई सुविधा नहीं है। शीतल पेयजल के लिए वाटर कूलर तक उपलब्ध नहीं है। दो हैंडपंप यहां खराब पड़े हैं। पार्क में मिली महिला रश्मि व पूनम ने कहा कि पार्क में पीने के पानी का समुचित इंतजाम होना चाहिए।
पार्क में मिले युवा दिनेश व सुयश ने कहा कि पार्क को आकर्षक बनाने के लिए ही यहां रंगबिरंगी लाइटों के साथ फौव्वारा लगाया गया था। फौव्वारा तो काफी दिनों तक चलता भी है, लेकिन उसमें लगाई लाइट पूरी तरह ठप पड़ चुकी है। फौव्वारा भी जब तक जवाब दे जाता है।
पार्क के लिए जरूरी प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे। क्षतिग्रस्त पड़े झूलों की मरम्मत सुनिश्चित होगी।यह भी देखा जाएगा कि अन्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी कैसे तय हो सकती है। जो भी संभव होगा वह सब सुनिश्चित होगा।
राकेश कुमार मिश्र, डीएम
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सरकार की तरफ से जरूरी धनराशि के अलावा तत्कालीन जिला प्रशासन ने एनटीपीसी आदि के सहयोग से यहां झील, पैडल बोट समेत झूले व फव्वारे आदि का प्रबंध किया था। समय के साथ सुविधाओं में बढ़ोतरी के बजाए हालत बुरी ही हो रही है। मौजूदा समय में यहां कई झूले क्षतिग्रस्त हैं तो बोटिंग के लिए तैयार की गई झील से मोटर बोट नदारद है। पीने के लिए न तो स्वच्छ पेयजल की समुचित सुविधा उपलब्ध है और न ही बैठने के लिए टीनशेड युक्त बेंच। नतीजा यह कि यहां पहुंचने के दौरान कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बुधवार को पार्क पहुंची
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अमर उजाला टीम पार्क पहुंची तो यहां बोटिंग के लिए बनाई गई झील के पास रसूलाबाद निवासी एक परिवार के बच्चे मौजूद मिले। वे इस उम्मीद में यहां आए थे कि परिवार के साथ झील में बोटिंग की सुविधा का आनंद उठा सकेेंगे। बच्चे सार्थक व स्नेहा ने अत्यंत मासूमियत से कहा कि योगी अंकल आखिर इधर ध्यान क्यों नहीं दे रहे। बच्चों का कहना था कि अगर उनकी बात योगी अंकल तक पहुंच जाए तो जरूर वे हम लोगों की बात मानेेंगे।
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पार्क में परिवार के साथ लुत्फ उठाने पहुंचे बच्चों को झूलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण मायूस होना पड़ा। यहां कई झूले ऐसे थे जो क्षतिग्रस्त होकर ठप पड़े हैं। उन्हें बनवाने की सुध लेने वाला कोई नही है। मीरानपुर निवासी बच्चे मानसी चतुर्वेदी, सुहानी, देवा वर्मा व शिखर श्रीवास्तव आदि झूलों के बगल निराश खड़े दिखायी दिए। उनकी आंखों में उदासी के भाव साफ साफ दिख रहे थे।
पार्क में मिलीं युवतियों रुचि वर्मा, शिशु चतुर्वेदी व कीर्ति ने कहा कि पार्क में बैठने के लिए समुचित बेंच नही हैं। शेड युक्त बेंच लगनी चाहिए। घास की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। युवतियों का कहना था कि पार्क में फूल वाले पौधे और बढ़ाएं जाएं।
पार्क में शीतल पेयजल के लिए कोई सुविधा नहीं है। शीतल पेयजल के लिए वाटर कूलर तक उपलब्ध नहीं है। दो हैंडपंप यहां खराब पड़े हैं। पार्क में मिली महिला रश्मि व पूनम ने कहा कि पार्क में पीने के पानी का समुचित इंतजाम होना चाहिए।
पार्क में मिले युवा दिनेश व सुयश ने कहा कि पार्क को आकर्षक बनाने के लिए ही यहां रंगबिरंगी लाइटों के साथ फौव्वारा लगाया गया था। फौव्वारा तो काफी दिनों तक चलता भी है, लेकिन उसमें लगाई लाइट पूरी तरह ठप पड़ चुकी है। फौव्वारा भी जब तक जवाब दे जाता है।
पार्क के लिए जरूरी प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे। क्षतिग्रस्त पड़े झूलों की मरम्मत सुनिश्चित होगी।यह भी देखा जाएगा कि अन्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी कैसे तय हो सकती है। जो भी संभव होगा वह सब सुनिश्चित होगा।
राकेश कुमार मिश्र, डीएम