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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Or the procession of the alum and the coffin between the days of Abbas

या अब्बास की सदाओं के बीच निकला अलम व ताबूत का जुलूस

Mon, 01 Aug 2022 11:55 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2022 11:55 PM IST
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Or the procession of the alum and the coffin between the days of Abbas
अंबेडकरनगर के अकबरपुर में निकले पहली मोहर्रम के जुलूस में नौहाख्वानी करते अंजमुन के सदस्य। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। या सकीना, या अब्बास की सदाओं के बीच अकबरपुर नगर में रविवार की रात पहली मोहर्रम का जुलूस निकला। इसमें अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड व अंजुमन गुंचे अकबरिया के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। देर रात समाप्त हुए जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
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इस बीच सोमवार को सुबह से ही अजाखानों व इमामबारगाहों से या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। इस दौरान उलमा ने जहां कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया तो वहीं अंजुमन के सदस्यों की ओर से नौहाख्वानी व सीनाजनी भी की गई।
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अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के तत्वावधान में अकबरपुर नगर के पेवाड़ा से अलम व ताबूत का जुलूस निकला। अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड व अंजुमन गुंचे अकबरिया के सदस्यों ने जुलूस के दौरान नौहाख्वानी व सीनाजनी की। मातम करो हुसैन का, छोड़ो नमाज को, वल्लाह यह नहीं था मंशा हुसैन का। नौहा पढ़कर परवेश ने नमाज न छोड़ने का पैगाम दिया।
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रजा अनवर के दर्दनाक नाहे से समूचा माहौल भावुक हो गया। अंजुमन अध्यक्ष रेहान जैदी ने बताया कि जुलूस विभिन्न रास्तों से होता हुआ इमामबारगाह मीरानपुर में पहुंचकर देर रात संपन्न हुआ। इस बीच जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
उधर, सोमवार को मोहर्रम के दूसरे दिन मजलिसों का दौर जिला मुख्यालय से लेकर अन्य क्षेत्रों में चला। जिला मुख्यालय पर जहां मौलाना अकबर अली व मौलाना मोहम्मद जौहर ने अलग-अलग अजाखानों व इमामबारगाहों में मजलिस को संबोधित किया तो वहीं जिले के अन्य क्षेत्रों में भी मजलिसों में उलमा ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डाला।

अरसावां में आयोजित मजलिस में मौलाना बाकर सज्जाद जैदी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि इमाम हुसैन के मिशन को आगे बढ़ाने की उन पर बड़ी जिम्मेदारी है। अजाखाने में जब भी जाएं, तो इस दौरान कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे अल्लाह नाराज हो। कहा कि इमामबारगाह व अजाखाना एक तरह का स्कूल है, जहां से इंसानियत का पैगाम दिया जाता है। जलालपुर, टांडा, बसखारी व आलापुर आदि क्षेत्रों में भी मजलिसों का दौर तेजी से चल रहा है।
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