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Ambedkar Nagar News: दुष्कर्म के दोषी नर्सिंग होम संचालक को उम्रकैद
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अंबेडकरनगर। जहांगीरगंज क्षेत्र में अनुसूचित जाति की युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट चिंता राम ने गोवर्धनपुर निवासी आशीर्वाद नर्सिंग होम के संचालक अभिषेक वर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अनुसूचित जाति की महिला की पहचान जानते हुए गंभीर अपराध करने के लिए 20 हजार रुपये अर्थदंड तथा दुष्कर्म के लिए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। कुल अर्थदंड 30 हजार रुपये है।
जहांगीरगंज क्षेत्र की युवती ने 31 जुलाई 2024 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अभिषेक ने वर्ष 2022 से चार मार्च 2024 तक शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती के गर्भवती होने पर शादी के लिए दबाव बनाने पर उसने इन्कार कर दिया। अभियोजन ने गर्भपात कराए जाने का आरोप भी लगाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत में स्पष्ट हुआ कि अभिषेक को पीड़िता की अनुसूचित जाति की जानकारी थी। विवाह से इन्कार करते समय उसने उसकी जातिगत पहचान का हवाला दिया। अदालत ने दुष्कर्म और जाति की जानकारी के बावजूद गंभीर अपराध करने के आरोप संदेह से परे साबित माने।
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मामले में पीड़िता समेत सात गवाह पेश किए गए। तहरीर, मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल का नक्शा और एफआईआर समेत अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। गवाहियों और अभिलेखों के आधार पर अदालत ने अभिषेक को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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जहांगीरगंज क्षेत्र की युवती ने 31 जुलाई 2024 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अभिषेक ने वर्ष 2022 से चार मार्च 2024 तक शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती के गर्भवती होने पर शादी के लिए दबाव बनाने पर उसने इन्कार कर दिया। अभियोजन ने गर्भपात कराए जाने का आरोप भी लगाया था।
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सुनवाई के दौरान अदालत में स्पष्ट हुआ कि अभिषेक को पीड़िता की अनुसूचित जाति की जानकारी थी। विवाह से इन्कार करते समय उसने उसकी जातिगत पहचान का हवाला दिया। अदालत ने दुष्कर्म और जाति की जानकारी के बावजूद गंभीर अपराध करने के आरोप संदेह से परे साबित माने।
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मामले में पीड़िता समेत सात गवाह पेश किए गए। तहरीर, मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल का नक्शा और एफआईआर समेत अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। गवाहियों और अभिलेखों के आधार पर अदालत ने अभिषेक को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।