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जिला अस्पताल में अब तक नहीं बना पोषण पुनर्वास केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:00 PM IST
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अंबेडकरनगर के जिला अस्पताल में स्थापित नहीं हो सका है कुपोषण का वार्ड।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में बच्चों के बीच कुपोषण का संकट दूर करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग का ही रवैया शिथिल बना हुआ है। जिस जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना होनी चाहिए, वह दो चिकित्सकों की तैनाती न हो पाने के कारण चल नहीं पा रहा।
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यह हाल तब है जबकि कुछ दिनों पहले तक ही इसी जिले से जुड़े अहमद हसन के पास स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा था। अभी भी स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। केंद्र की शुरुआत न हो पाने से उन बच्चों को इसका लाभ नही मिल पा रहा है, जिन्हें यहां भर्ती कर आवश्यक सुविधा मुहैया कराई जा सकती थीं।
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गौरतलब है कि बच्चों में कुपोषण के संकट को दूर करने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार द्वारा लगातार विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य यह है कि बच्चों को कुपोषण से दूर कर उनका स्वास्थ्य बेहतर किया जा सके।
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दरअसल बीते वर्षों में कुपोषण के चलते प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं सब पर अंकुश लगाने के लिए ही नए-नए कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार ने बीते दिनों निर्णय लिया था कि प्रत्येक जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की जाए।
सरकार के इस फैसले के बाद भी अभी तक जिले में इस केंद्र की स्थापना नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि एक वार्ड का आवंटन कर दिया गया है। यह बात अलग है कि अभी तक वार्ड में कुपोषित बच्चों को भर्ती करने का सिलसिला शुरू नहीं हो पाया है।
दरअसल पुनर्वास केंद्र शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा चिकित्सकों की तैनाती न हो पाना है। इसके केंद्र के लिए दो चिकित्सकों का पद स्वीकृत है लेकिन अब तक यहां पर किसी चिकित्सक की न तो तैनाती हुई है और न ही अस्थायी व्यवस्था ही की जा सकी है। चार स्टाफ नर्स, एक केयर टेकर व दो सफाईकर्मी का भी पद यहां स्वीकृत है।
इन सभी सात पदों पर तो तैनाती हो गई है लेकिन चिकित्सकों की तैनाती न हो पाने की वजह से केंद्र शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लगभग प्रतिदिन तमाम कुपोषित बच्चे इस केंद्र के लाभ से वंचित हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक कहते हैं कि केंद्र में समुचित व्यवस्था अविलंब सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
इस योजना से मानवीय संवेदना भी जुड़ी है। ऐसे में इसे लेकर लापरवाही ठीक नहीं। सामाजिक कार्यकर्त्री गायत्री ने कहा कि सरकार को कुपोषण दूर करने के लिए ऐसे छोटे-छोटे मामलों की तरफ ध्यान देने की भी सुध होनी चाहिए। योजना को लागू करने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है।