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Ambedkar Nagar News: बाढ़ से बचाव के नहीं इंतजाम, फिर पलायन को मजबूर होंगे ग्रामीण
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टांडा में बह रही सरयू नदी।संवाद
विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। मुफलिसी पाश-ए-शराफत नहीं रहने देगी, यह नदी हमको सलामत नहीं रहने देगी। रेत पर खेलते बच्चों को क्या मालूम, कोई सैलाब घरौंदा नहीं रहने देगी। मशहूर शायर मुनव्वर राना की ये पंक्तियां टांडा तहसील क्षेत्र के उन सैकड़ों लोगों का दर्द बयां करने के लिए काफी हैं जो हर साल बाढ़ में अपने घरों को खो देते हैं। बाढ़ और कटान की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों की मांगों की लंबे समय से अनसुनी की जा रही है। 20 से ज्यादा गांवों में बाहर का कहर टूटता है लेकिन बचाव के लिए काम सिर्फ दो गांवों में ही कार्य कराया जा रहा है।
जुलाई के तीसरे व चौथे सप्ताह से बाढ़ का कहर टांडा तहसील क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में आमतौर पर शुरू हो जाता है। बाढ़ व कटान की चपेट में मुख्य रूप से टांडा तहसील के उल्टहवा, माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नदी नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ व डुहिया समेत लगभग 20 गांव आते हैं। बरसात में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। मांझा समेत नदी किनारे स्थित गांवों के लोगों को घर छोड़कर बाढ़ राहत चौकियों पर शरण लेनी पड़ती है।
बाढ़ के कारण टांडा नगर स्थित थिरुआ नाला भी विकराल रूप ले लेता है। इससे मेहनियां समेत नाले के आसपास के कई गांव बाढ़ की चपेट आ जाते हैं। प्रशासन की ओर हर वर्ष डेढ़ दर्जन से ज्यादा बाढ़ राहत चौकियां बनाई जाती हैं। ग्राम वासियों को बाढ़ से निकालने के लिए दर्जन भर नाव भी लगाई जाती हैं, लेकिन बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए कोई स्थायी हल नहीं खोजा जा सका है। वर्तमान में सिर्फ दो गांवों में बाढ़ से बचाव के लिए कार्य कराए जा रहे हैं, ऐसे में शेष गांवों में इस बार भी बाढ़ व कटान का खतरा मंडरा रहा है।
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डुहियां और फूलपुर में चल रहा काम
बाढ़ और कटान को रोकने के लिए टांडा तहसील क्षेत्र के डुहियां और फूलपुर में जीओ बैग स्टड परियोजना तथा परक्यूपाइन परियोजना का काम विभाग की ओर से कराया जा रहा है, जो जून के प्रथम सप्ताह तक पूरा हो जाएगा। इससे कटान नियंत्रण, तट संरक्षण और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
- विकास श्रीवास्तव, अवर अभियंता बाढ़ खंड
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जुलाई के तीसरे व चौथे सप्ताह से बाढ़ का कहर टांडा तहसील क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में आमतौर पर शुरू हो जाता है। बाढ़ व कटान की चपेट में मुख्य रूप से टांडा तहसील के उल्टहवा, माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नदी नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ व डुहिया समेत लगभग 20 गांव आते हैं। बरसात में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। मांझा समेत नदी किनारे स्थित गांवों के लोगों को घर छोड़कर बाढ़ राहत चौकियों पर शरण लेनी पड़ती है।
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बाढ़ के कारण टांडा नगर स्थित थिरुआ नाला भी विकराल रूप ले लेता है। इससे मेहनियां समेत नाले के आसपास के कई गांव बाढ़ की चपेट आ जाते हैं। प्रशासन की ओर हर वर्ष डेढ़ दर्जन से ज्यादा बाढ़ राहत चौकियां बनाई जाती हैं। ग्राम वासियों को बाढ़ से निकालने के लिए दर्जन भर नाव भी लगाई जाती हैं, लेकिन बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए कोई स्थायी हल नहीं खोजा जा सका है। वर्तमान में सिर्फ दो गांवों में बाढ़ से बचाव के लिए कार्य कराए जा रहे हैं, ऐसे में शेष गांवों में इस बार भी बाढ़ व कटान का खतरा मंडरा रहा है।
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डुहियां और फूलपुर में चल रहा काम
बाढ़ और कटान को रोकने के लिए टांडा तहसील क्षेत्र के डुहियां और फूलपुर में जीओ बैग स्टड परियोजना तथा परक्यूपाइन परियोजना का काम विभाग की ओर से कराया जा रहा है, जो जून के प्रथम सप्ताह तक पूरा हो जाएगा। इससे कटान नियंत्रण, तट संरक्षण और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
- विकास श्रीवास्तव, अवर अभियंता बाढ़ खंड