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अफसरों के अंदाजा में गनर व नीली बत्ती से पहुंचता था नंदलाल
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अंबेडकरनगर। एनआईए की गिरफ्त में आया नंदलाल गांव में अफसरों के अंदाज में पहुंचता था। वह जब भी गांव आता तो उसके पास न सिर्फ सचिवालय का पास लगा वाहन होता था बल्कि नीली बत्ती के साथ पुलिस की वर्दी में जवान भी आगे-पीछे रहते थे। बसखारी क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि से उसकी काफी करीबी थी। वह गांव के बजाए बसखारी में ज्यादा रहता था।
एनआईए की पकड़ में आए नंदलाल स्वर्णकार उर्फ नंदलाल सोनी (48) की छवि उसके अपने गांव व आसपास किसी बड़े अफसर के रूप में थी। यूं तो उसके पिता स्वर्गीय रामकिशन सोनी सराफा का कारोबार करते रहे, लेकिन नंदलाल ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार, वह जेएनयू में रहकर शिक्षा ग्रहण करता था तो कुछ ने बताया कि दिल्ली के ही एक विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल कर रहा था। बाद में उसने गांव में बताया कि वह बड़ा अफसर बन गया है।
उसके तीन भाई गांव में ही सरार्फा कारोबार करते हैं और उससे अलग रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मां की देखभाल के लिए ही तीन चार माह में वह एक बार यहां आता था। उस समय उसके पास लखनऊ सचिवालय का पास लगी लग्जरी गाड़ी होती थी। उस पर नीली बत्ती भी लगी रहती थी। एक गार्ड भी साथ रहता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह यहां रात में नहीं रुकता था। मां व अन्य लोगों से मिलने के बाद ज्यादातर समय बसखारी के एक जनप्रतिनिधि के साथ ही बिताता था।
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एनआईए की पकड़ में आए नंदलाल स्वर्णकार उर्फ नंदलाल सोनी (48) की छवि उसके अपने गांव व आसपास किसी बड़े अफसर के रूप में थी। यूं तो उसके पिता स्वर्गीय रामकिशन सोनी सराफा का कारोबार करते रहे, लेकिन नंदलाल ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार, वह जेएनयू में रहकर शिक्षा ग्रहण करता था तो कुछ ने बताया कि दिल्ली के ही एक विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल कर रहा था। बाद में उसने गांव में बताया कि वह बड़ा अफसर बन गया है।
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उसके तीन भाई गांव में ही सरार्फा कारोबार करते हैं और उससे अलग रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मां की देखभाल के लिए ही तीन चार माह में वह एक बार यहां आता था। उस समय उसके पास लखनऊ सचिवालय का पास लगी लग्जरी गाड़ी होती थी। उस पर नीली बत्ती भी लगी रहती थी। एक गार्ड भी साथ रहता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह यहां रात में नहीं रुकता था। मां व अन्य लोगों से मिलने के बाद ज्यादातर समय बसखारी के एक जनप्रतिनिधि के साथ ही बिताता था।
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