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Ambedkar Nagar News: सरयू नदी किनारे 2200 बीघे में होगी प्राकृतिक खेती
Fri, 24 Jan 2025 11:09 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 24 Jan 2025 11:09 PM IST
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सरयू नदी के किनारे प्राकृतिक खेती के लिए चिह्नित भूमि।
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत जिले के 500 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती करेंगे। इसके लिए सरयू नदी के किनारे के 31 गांवों का चयन किया गया है।
अकबरपुर ब्लॉक के कजरी जमालुद्दीन, इटरौरा, सीहमई मोलनापुर, सुरहुरपुर, खालिसपुर भटौली, सलाहद्दीनपुर, भीटी के पूरे दरबार, मल्लेपुर, जहांगीरगंज के तरेन, तिहाइतपुर, लालमनपुर, सराय हंकार, अराजी देवारा, इटौरा ढोलीपुर, नरवा पितांबरपुर, कबूपुर, बसंतपुर, सनहूं समैसा, जोगीपुर, एनवां, रामनगर के मकरही, धनुकारा, सरफुदीनपुर, अछती, पटना मुबारकपुर, समदहा मलगवां के अलावा टांडा के महुआरी, दशरथपुर, करमपुर बरसांवा और महुआरी के 2200 बीघे में प्राकृतिक तरीके से फसल उगाई जाएगी। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय कुमारगंज अयोध्या में चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों का चयन कृषि सखी, एफपीओ और कृषि विभाग के कर्मचारियों से कराया जाएगा।
केमिकल से कम हो रही उपजाऊ क्षमता
बीते दिनों विभाग की मृदा परीक्षण रिपोर्ट में जिले के कई स्थानों की मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट पाई गई। खेतों में केमिकल खादों के उपयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जा रही है। इन खादों में मिले केमिकल ने मिट्टी की जैविक और कार्बनिक क्षमता को कमजोर कर रही है। यहां तक कि मिट्टी में अब केंचुए भी नहीं दिखते, जिन्हें किसानों का मित्र कहा जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने नेचुरल फार्मिंग से मिट्टी को सुधारने का बड़ा प्रयास शुरू किया है।
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क्या है मिशन का मकसद
एनएमएनएफ का मकसद है किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना। इस मिशन के जरिये किसान को उनकी स्थानीय क्षेत्र में होने वाली खेती और उसकी पद्धतियों से जोड़ा जाएगा। खेत में केंचुआ खाद, वर्मी कंपोस्ट, गोबर, फसल अवशेष समेत प्राकृतिक खाद को खेती में इस्तेमाल करने के तौर-तरीकों व उसके लाभ को बताया जाएगा। किसान जब अपने पारंपरिक स्रोत से खेती करेंगे तो उसमें कामयाबी की गुंजाइश ज्यादा रहेगी। अगर किसी छोटी जोत वाले किसान को ट्रैक्टर की तुलना में हल-बैल की खेती सही लगती है तो उसके लिए भी बढ़ावा दिया जाएगा।
वर्जन:::
सरयू नदी के किनारे वाले गांवों का चयन प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहा है। इसके लिए 10 क्लस्टर बनाए गए हैं। किसानों का चयन करने के बाद उन्हें आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय कुमारगंज अयोध्या में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। -अश्विनी कुमार सिंह, उपकृषि निदेशक
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अकबरपुर ब्लॉक के कजरी जमालुद्दीन, इटरौरा, सीहमई मोलनापुर, सुरहुरपुर, खालिसपुर भटौली, सलाहद्दीनपुर, भीटी के पूरे दरबार, मल्लेपुर, जहांगीरगंज के तरेन, तिहाइतपुर, लालमनपुर, सराय हंकार, अराजी देवारा, इटौरा ढोलीपुर, नरवा पितांबरपुर, कबूपुर, बसंतपुर, सनहूं समैसा, जोगीपुर, एनवां, रामनगर के मकरही, धनुकारा, सरफुदीनपुर, अछती, पटना मुबारकपुर, समदहा मलगवां के अलावा टांडा के महुआरी, दशरथपुर, करमपुर बरसांवा और महुआरी के 2200 बीघे में प्राकृतिक तरीके से फसल उगाई जाएगी। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय कुमारगंज अयोध्या में चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों का चयन कृषि सखी, एफपीओ और कृषि विभाग के कर्मचारियों से कराया जाएगा।
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केमिकल से कम हो रही उपजाऊ क्षमता
बीते दिनों विभाग की मृदा परीक्षण रिपोर्ट में जिले के कई स्थानों की मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट पाई गई। खेतों में केमिकल खादों के उपयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जा रही है। इन खादों में मिले केमिकल ने मिट्टी की जैविक और कार्बनिक क्षमता को कमजोर कर रही है। यहां तक कि मिट्टी में अब केंचुए भी नहीं दिखते, जिन्हें किसानों का मित्र कहा जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने नेचुरल फार्मिंग से मिट्टी को सुधारने का बड़ा प्रयास शुरू किया है।
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क्या है मिशन का मकसद
एनएमएनएफ का मकसद है किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना। इस मिशन के जरिये किसान को उनकी स्थानीय क्षेत्र में होने वाली खेती और उसकी पद्धतियों से जोड़ा जाएगा। खेत में केंचुआ खाद, वर्मी कंपोस्ट, गोबर, फसल अवशेष समेत प्राकृतिक खाद को खेती में इस्तेमाल करने के तौर-तरीकों व उसके लाभ को बताया जाएगा। किसान जब अपने पारंपरिक स्रोत से खेती करेंगे तो उसमें कामयाबी की गुंजाइश ज्यादा रहेगी। अगर किसी छोटी जोत वाले किसान को ट्रैक्टर की तुलना में हल-बैल की खेती सही लगती है तो उसके लिए भी बढ़ावा दिया जाएगा।
वर्जन:::
सरयू नदी के किनारे वाले गांवों का चयन प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहा है। इसके लिए 10 क्लस्टर बनाए गए हैं। किसानों का चयन करने के बाद उन्हें आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय कुमारगंज अयोध्या में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। -अश्विनी कुमार सिंह, उपकृषि निदेशक