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सात लाख से अधिक पात्र गोल्डन कार्ड से वंचित
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अंबेडकरनगर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्रों का गोल्डन कार्ड बनाने में जिला फिसड्डी साबित हुआ है। सात लाख से अधिक पात्र गोल्डन कार्ड से वंचित हैं। इन्हें मुफ्त में बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिले में कुल 10.61 लाख पात्र चिह्नित किए गए हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, श्रम कार्डधारक, अंत्योदय कार्डधारक व उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के परिवार के मरीजों को मुफ्त में बेहतर इलाज कराने की उम्मीद को जिले में तगड़ा झटका लग रहा है। कारण यह कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज के लिए जिस गोल्डन/आयुष्मान कार्ड की जरूरत पड़ती है, उसे बनाए जाने की गति अत्यंत धीमी है। जिम्मेदारों द्वारा योजना का लाभ पात्रों को दिलाने को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं लेकिन कार्ड बनने के आंकड़े दावों की पोल खोल रहे हैं।
सभी पांच तहसीलों को मिलाकर 10 लाख 61 हजार 150 पात्र योजना के तहत चयनित किए गए हैं। इन सभी का गोल्डन/आयुष्मान कार्ड बनना है। 23 सितंबर 2018 से शुरू इस योजना के तहत अब तक मात्र तीन लाख 57 हजार 704 पात्रों के ही कार्ड बन सके हैं। अभी तक सात लाख तीन हजार 446 पात्र कार्ड से वंचित हैं। अधिक से अधिक पात्रों के कार्ड बनाने के लिए सितंबर में विशेष पखवाड़ा भी चला लेकिन कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
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गौरतलब है कि गोल्डन कार्डधारकों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के बेहतर इलाज की सुविधा मुफ्त में दी जाती है। बंदीपुर के नोखई कहते हैं कि कई बार जनसेवा केंद्र से लेकर ब्लॉक तक गए लेकिन कार्ड नहीं बन पाया। मीरानपुर के दयाराम व शहजादपुर के मीनू ने बताया कि गोल्डन कार्ड बनाने को लेकर मुहिम तेज करने की जरूरत है।
इन कार्डों का असली लाभ तभी मिल पाएगा जब जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज की और बेहतर सुविधाएं मुहैया होंगी। भीटी के रमेश का कहना रहा कि एक निजी अस्पताल में इलाज तो योजना के तहत हो गया लेकिन उस अस्पताल को इलाज का भुगतान नहीं मिल पाया। ऐसे में अब कई निजी अस्पताल इस योजना के तहत इलाज करने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
योजना को संचालित हुए चार वर्ष का समय बीत गया लेकिन अब तक इसके तहत मात्र 11,698 मरीजों का ही इलाज हो सका है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर, जिला अस्पताल व नौ सीएचसी पर 8,188 मरीजों का इलाज हुआ। योजना के तहत चयनित जिले के पांच निजी अस्पताल रमा मल्टी सिटी, साकेत हास्पिटल, कनक हास्पिटल, एस हास्पिटल व दयाराम वर्मा हास्पिटल में केवल 3,510 मरीज ही इलाज के लिए पहुंच सके हैं।
इन मरीजों के इलाज के बाद संबंधित अस्पतालों द्वारा 11.15 करोड़ रुपये का क्लेम शासन को भेजा गया। इसकी तुलना में मात्र 9.44 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो सके। ऐसे में 1.71 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया है। इसके चलते भी निजी अस्पताल योजना के सुचारु संचालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
कुछ ऐसे भी कार्ड बने हैं जिनका सत्यापन राज्यस्तर पर नामित साची कंपनी द्वारा अभी तक नहीं हो सका है। सत्यापन के बाद कार्डधारकों की संख्या में वृद्धि होगी। निजी अस्पतालों की जो रकम बकाया है, उसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
-डॉ. संजय वर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत
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आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, श्रम कार्डधारक, अंत्योदय कार्डधारक व उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के परिवार के मरीजों को मुफ्त में बेहतर इलाज कराने की उम्मीद को जिले में तगड़ा झटका लग रहा है। कारण यह कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज के लिए जिस गोल्डन/आयुष्मान कार्ड की जरूरत पड़ती है, उसे बनाए जाने की गति अत्यंत धीमी है। जिम्मेदारों द्वारा योजना का लाभ पात्रों को दिलाने को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं लेकिन कार्ड बनने के आंकड़े दावों की पोल खोल रहे हैं।
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सभी पांच तहसीलों को मिलाकर 10 लाख 61 हजार 150 पात्र योजना के तहत चयनित किए गए हैं। इन सभी का गोल्डन/आयुष्मान कार्ड बनना है। 23 सितंबर 2018 से शुरू इस योजना के तहत अब तक मात्र तीन लाख 57 हजार 704 पात्रों के ही कार्ड बन सके हैं। अभी तक सात लाख तीन हजार 446 पात्र कार्ड से वंचित हैं। अधिक से अधिक पात्रों के कार्ड बनाने के लिए सितंबर में विशेष पखवाड़ा भी चला लेकिन कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
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गौरतलब है कि गोल्डन कार्डधारकों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के बेहतर इलाज की सुविधा मुफ्त में दी जाती है। बंदीपुर के नोखई कहते हैं कि कई बार जनसेवा केंद्र से लेकर ब्लॉक तक गए लेकिन कार्ड नहीं बन पाया। मीरानपुर के दयाराम व शहजादपुर के मीनू ने बताया कि गोल्डन कार्ड बनाने को लेकर मुहिम तेज करने की जरूरत है।
इन कार्डों का असली लाभ तभी मिल पाएगा जब जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज की और बेहतर सुविधाएं मुहैया होंगी। भीटी के रमेश का कहना रहा कि एक निजी अस्पताल में इलाज तो योजना के तहत हो गया लेकिन उस अस्पताल को इलाज का भुगतान नहीं मिल पाया। ऐसे में अब कई निजी अस्पताल इस योजना के तहत इलाज करने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
योजना को संचालित हुए चार वर्ष का समय बीत गया लेकिन अब तक इसके तहत मात्र 11,698 मरीजों का ही इलाज हो सका है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर, जिला अस्पताल व नौ सीएचसी पर 8,188 मरीजों का इलाज हुआ। योजना के तहत चयनित जिले के पांच निजी अस्पताल रमा मल्टी सिटी, साकेत हास्पिटल, कनक हास्पिटल, एस हास्पिटल व दयाराम वर्मा हास्पिटल में केवल 3,510 मरीज ही इलाज के लिए पहुंच सके हैं।
इन मरीजों के इलाज के बाद संबंधित अस्पतालों द्वारा 11.15 करोड़ रुपये का क्लेम शासन को भेजा गया। इसकी तुलना में मात्र 9.44 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो सके। ऐसे में 1.71 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया है। इसके चलते भी निजी अस्पताल योजना के सुचारु संचालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
कुछ ऐसे भी कार्ड बने हैं जिनका सत्यापन राज्यस्तर पर नामित साची कंपनी द्वारा अभी तक नहीं हो सका है। सत्यापन के बाद कार्डधारकों की संख्या में वृद्धि होगी। निजी अस्पतालों की जो रकम बकाया है, उसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
-डॉ. संजय वर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत