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13 हजार से अधिक बच्चे अभी भी हैं अतिकुपोषित
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Fri, 02 Sep 2016 12:00 AM IST
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बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए शासन स्तर से आधा दर्जन से अधिक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है लेकिन इन्हें जमीनी हकीकत देने की सुध संबंधित अधिकारियों को नहीं है। नतीजा यह कि जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है। मौजूदा समय में ही 13 हजार 706 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं।
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इन्हें पुष्टाहार, हौसला मिशन योजना व हाटकुक्ड जैसी योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, जिले में किशोरियों में एनीमिया जांच को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लंबे समय से जांच को लेकर जिले में अभियान ही नहीं चल सका है। गुरुवार से पोषण सप्ताह की शुरुआत हुई है।
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बच्चों को अतिकुपोषण की श्रेणी से निकालने एवं उन्हें कुपोषण मुक्त करने के लिए बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार वितरण, हाटकुक्ड योजना, हौसला पोषण योजना तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित टीकाकरण, एल्बेंडाजाल गोली का वितरण किए जाने के साथ-साथ विद्यालय में स्वास्थ्य संबंधित जांच किए जाने की योजना का संचालन किया जा रहा है।
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इसके अलावा बाल विकास विभाग द्वारा गंभीर अति कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराए जाने एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुपोषित, अति कुपोषित व गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को एएनएम द्वारा सीएचसी व पीएचसी में भर्ती कराकर उनका इलाज कराए जाने की योजना का भी संचालन हो रहा है।
यह अलग बात है कि योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने को लेकर स्वास्थ्य व बाल विकास विभाग कभी गंभीर नहीं हो सका। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2015 को 21 हजार 152 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे। आलम यह है कि मात्र सात हजार 446 को ही इस श्रेणी से अब तक बाहर निकाला जा सका है।
अभी भी जिले में 13 हजार 706 अति कुपोषित बच्चे मौजूद हैं। सीएमओ डॉ. जीआर चंद्रा ने बताया कि एनीमिया की जांच जिला अस्पताल समेत सीएचसी व पीएचसी में उपलब्ध है। बच्चों को एल्बेंडाजाल की गोली के लिए 19 जुलाई को ही जीलाबेट्री एजेंसी को चार लाख 88 हजार गोली का आर्डर दे दिया गया है।
गोली उपलब्ध होते ही उसे एक से 19 वर्ष तक के लोगों में वितरण किया जाएगा। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चों को अति कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पोषण सप्ताह में लोगों को जागरूक करने के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा।