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Ambedkar Nagar News: अभिलेखों से तय होगा भूमि अधिग्रहण विवाद
Mon, 05 Oct 2026 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:08 PM IST
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अंबेडकरनगर। भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद में अपर जिला जज (त्वरित प्रथम) परविंद कुमार की अदालत ने विवादित भूमि की मौके पर पैमाइश कराने की मांग खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि अपील के स्तर पर अधिग्रहित और शेष भूमि का निर्धारण अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है। ऐसे में स्थलीय जांच की आवश्यकता नहीं है।
मामला साजिद बनाम सूर्य नारायण आदि से संबंधित है। सुनवाई के दौरान घनश्याम सिंह की ओर से न्यायालय अमीन नियुक्त कर विवादित भूमि की पैमाइश कराने की मांग की गई। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में मौके की स्थिति अलग थी। पुराने बैनामों के आधार पर संबंधित भूमि पर मकान बने होने और लोगों के निवास करने का दावा करते हुए अधिग्रहण के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पैमाइश को आवश्यक बताया गया।
विपक्ष ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित भूमि के अधिग्रहण का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। पत्रावली में साइट प्लान और कमीशन रिपोर्ट भी उपलब्ध है। ऐसे में दोबारा स्थलीय जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पैमाइश के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना कि अधिग्रहित और शेष भूमि से संबंधित तथ्यों का निर्धारण अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है। इसके साथ ही विपक्ष की आपत्ति का भी निस्तारण कर दिया गया। अब मामले की पत्रावली आठ अक्तूबर को बहस के लिए पेश होगी।
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मामला साजिद बनाम सूर्य नारायण आदि से संबंधित है। सुनवाई के दौरान घनश्याम सिंह की ओर से न्यायालय अमीन नियुक्त कर विवादित भूमि की पैमाइश कराने की मांग की गई। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में मौके की स्थिति अलग थी। पुराने बैनामों के आधार पर संबंधित भूमि पर मकान बने होने और लोगों के निवास करने का दावा करते हुए अधिग्रहण के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पैमाइश को आवश्यक बताया गया।
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विपक्ष ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित भूमि के अधिग्रहण का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। पत्रावली में साइट प्लान और कमीशन रिपोर्ट भी उपलब्ध है। ऐसे में दोबारा स्थलीय जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पैमाइश के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना कि अधिग्रहित और शेष भूमि से संबंधित तथ्यों का निर्धारण अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है। इसके साथ ही विपक्ष की आपत्ति का भी निस्तारण कर दिया गया। अब मामले की पत्रावली आठ अक्तूबर को बहस के लिए पेश होगी।
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