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Ambedkar Nagar News: मकर संक्रांति 15 को, सूर्य के उत्तरायण होने से समाप्त होगा खरमास
Sun, 11 Jan 2026 10:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 11 Jan 2026 10:32 PM IST
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आलापुर(अंबेडकरनगर)। वर्ष की 12 संक्रांतियों में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। सनातन धर्म में इसे अत्यंत पुण्यदायक पर्व माना गया है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे सूर्य का उत्तरायण प्रारंभ होगा और खरमास का समापन होगा।
आचार्य पंडित आशुतोष शुक्ला ने तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 38 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति रात्रिकाल में पड़ने के कारण इसका पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी को सूर्योदय से मान्य होगा। शास्त्रों में यह व्यवस्था है कि अगर संक्रांति सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन ही ग्रहण किया जाता है। आचार्य ने बताया कि निर्णय सिंधु ग्रंथ में भी इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही स्वीकार किया गया है। इस दिन सूर्योदय काल में स्नान, दान और जप विशेष फलदायी माने गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किया गया पुण्य कर्म श्रेष्ठ फल प्रदान करता है। मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है। इसके तीन दिन बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त पुनः उपलब्ध हो जाते हैं।
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स्नान-दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर श्रद्धालु गंगा, यमुना, सरयू, नर्मदा सहित अन्य पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। तिल, गुड़, खिचड़ी, मूंग की दाल, मोदक और अन्न का दान पुण्यकारी माना गया है। शीत ऋतु को देखते हुए जरूरतमंदों को गरम वस्त्र दान करना भी श्रेष्ठ फलदायी बताया गया है।
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आचार्य पंडित आशुतोष शुक्ला ने तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 38 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति रात्रिकाल में पड़ने के कारण इसका पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी को सूर्योदय से मान्य होगा। शास्त्रों में यह व्यवस्था है कि अगर संक्रांति सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन ही ग्रहण किया जाता है। आचार्य ने बताया कि निर्णय सिंधु ग्रंथ में भी इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही स्वीकार किया गया है। इस दिन सूर्योदय काल में स्नान, दान और जप विशेष फलदायी माने गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किया गया पुण्य कर्म श्रेष्ठ फल प्रदान करता है। मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है। इसके तीन दिन बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त पुनः उपलब्ध हो जाते हैं।
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स्नान-दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर श्रद्धालु गंगा, यमुना, सरयू, नर्मदा सहित अन्य पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। तिल, गुड़, खिचड़ी, मूंग की दाल, मोदक और अन्न का दान पुण्यकारी माना गया है। शीत ऋतु को देखते हुए जरूरतमंदों को गरम वस्त्र दान करना भी श्रेष्ठ फलदायी बताया गया है।