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खर दूषण का वध होते ही दर्शकों ने बजाई तालियां

Sat, 02 Nov 2019 11:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Nov 2019 11:27 PM IST
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Khar-Dushan Vadh in Ramleela
खर-दूषण का वध होते ही दर्शकों हो गए रोमांचित
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- गोविंदपुर में चल रही रामलीला के चौथे दिन हुआ राम-भरत मिलाप
फोटो 6 व 7
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के गोविंदपुर में चल रही रामलीला के चौथे दिन कलाकारों ने राम-भरत मिलाप तथा खर-दूषण वध का मंचन किया, जिसका दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया। इससे पहले भगवान श्रीराम की भव्य झांकी निकाली गई। समिति पदाधिकारियों ने भगवान श्रीराम का पूजन अर्चन कर आरती उतारी।
भगवान राम के वन गमन के बाद भरत व शत्रुघ्न अयोध्या पहुंचते हैं, जहां सभी का मुख मंडल तेज विहीन हुआ रहता है। यह देख भरत व शत्रुघ्न सशंकित हो जाते हैं। दोनों महारानी कैकेयी के पास पहुंचते हैं और प्रणाम कर सभी की कुशलता पूछते हैं। महारानी कैकेयी कहती हैं कि पुत्र आपके पिता का स्वर्गवास हो चुका है। कैकेयी के इस वचन को सुन भरत मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं और आंखों से अश्रुधारा फूट पड़ती है। कैकेयी भरत को समझाती हैं कि पुत्र मृत्यु संसार का सबसे बड़ा सत्य है। प्रत्येक प्राणी को एक न एक दिन इस संसार को त्यागना ही पड़ता है। तुम तो अपने पिता के समान धीर और गंभीर हो। यदि तुम ही इस तरह से हिम्मत हार जाओगे तो प्रजा का क्या होगा। भरत ने कैकेयी से पूछा मां पिता जी प्राण त्याग के पहले मुझे जरूर पुकारा होगा। कैकेयी ने कहा नहीं। अंतिम क्षण तक उनके मुख से राम का नाम ही निकल रहा था। भरत ने कहा कि मां क्या भैया राम भी पिता जी के सम्मुख नहीं थे। कैकेयी ने कहा नहीं। महाराज ने उन्हें चौदह वर्ष का वनवास दे दिया है। इस पर कहते हैं कि वनवास, लेकिन क्यों। किसके कहने पर पिता जी ने ऐसा किया। यदि उस पापी के बारे में मुझे पता चल जाए तो चाहे वह स्वयं काल भी क्यों न हो मैं उसे अवश्य मृत्यु दंड दूंगा। कैकेयी ने कहा कि तुम्हें वह मृत्यु दंड मुझे देना होगा। मैंने ही महाराज से राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा है।
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दूसरे दृश्य में भरत निर्णय करते हैं कि वह वन जाकर भैया राम, मां सीता व लक्ष्मण को वन से अयोध्या लेकर आएंगे। गुरु वशिष्ठ से मंत्रणा के बाद सभी भगवान राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं। यह समाचार मिलते ही लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि भरत उन पर चढ़ाई करने के लिए आ रहे हैं, लेकिन भगवान राम भरत के इस शंका को दूर करते हैं। भरत राम को देख भावुक हो जाते हैं। सभी लोग एक दूसरे से मिलते हैं। भरत के काफी अनुरोध के बाद भगवान राम पिता की आज्ञा न तोडने की बात कहते हुए भरत को अपना खड़ाऊ देकर अयोध्या भेज देते हैं। भरत भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए सभी परिकरों सहित अयोध्या के लिए निकल पड़ते हैं। इस दृश्य को देख दर्शक भावुक हो उठे। रामलीला देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ रही।
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