फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Kargil Vijay , we are proud to sacrifice

कारगिल विजय, हमें बलिदान पर गर्व है

Sat, 25 Jul 2015 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Sat, 25 Jul 2015 11:12 PM IST
विज्ञापन

भारत-चीन, पाक या फिर कारगिल युद्ध हो, जब-जब जरूरत पड़ी भूखे प्यासे रहकर दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। अंत समय जब आया तो देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए भारतमाता की गोद में हमेशा के लिए सो गए। कारगिल विजय दिवस के 16 वर्ष हो चुके हैं।

विज्ञापन


ऐसे में देश एक बार फिर उन अमर शहीदों की देशभक्ति के साथ ही शौर्य-पराक्रम को याद करके गौरवान्वित महसूस कर रहा है। मातृभूमि के प्रति उनके जज्बे को हर कोई सलाम करता है। इस गौरवपूर्ण दिवस की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ ने कई पूर्व व मौजूदा सैनिकों से बातचीत की, पेश है रिपोर्र्ट।
विज्ञापन


मीर मलूकपुर गांव निवासी पूर्व सैनिक लालबिहारी सिंह ने कारगिल विजय दिवस को गौरवपूर्ण बताते हुए बीते दिनों की याद की। बोले कि, उन्होंने वर्ष 1962, 65 व 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में भाग लिया था। 1962 के युद्ध के वक्त कानपुर में तैनाती थी, जबकि बाद के दोनों युद्ध के दौरान वे मध्यप्रदेेश के आमला में तैनात थे। बताया कि 1965 के युद्ध में जो गलती हुई थी, उसे 1971 के युद्ध में सुधार लिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस युद्ध में 80 प्रतिशत गोला-बारूद भारतीय था, जिसने बड़ी सफलता दिलाई। 1971 के ही युद्ध में एयरफोर्स पूरी तरह पाकिस्तान के महत्वपूर्ण व न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के लिए तैयार थी, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी थी। श्री सिंह ने कहा कि देश की सेना अब और ज्यादा मजबूत हुई है, लेकिन इसके लिए देश के नेतृत्व को भी लगातार मजबूत व दृढ़ निश्चयी होना होगा। इसके बाद का पूरा काम सेना ही कर लेगी।

मालीपुर निवासी पूर्व सैनिक ओमप्रकाश नाहर ने कहा कि उन्हें किसी भी युद्ध में भाग लेने का मौका तो नहीं मिला, लेकिन ऐसा मौका मिलता तो उन्हें और ज्यादा खुशी होती। किसी भी सैनिक के लिए सीमा पर जाकर देश के लिए कुछ कर गुजरने से बड़ा मौका और कोई नहीं होता। कारगिल की सफलता ने भारतीय सेना के मजबूत इरादों को पूरी दुनिया में स्थापित किया है।

अकबरपुर निवासी पूर्व सैनिक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सेना में रहने के दौरान लोगों को सिर्फ देश की सेवा की चिंता रहती है। युद्ध में तो प्रत्यक्ष तौर पर भाग लेने का मौका नहीं मिला, लेकिन भारतीय सेना में रहने का गौरव आज भी उन्हें एक अलग एहसास कराता है।


युवाओं को भी सेना में जाकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। रतनपुर निवासी सौरभ दुबे इस समय भारतीय सेना में राजस्थान में तैनात हैं। बीते दिनों कोच्चि में उनकी तैनाती थी। इस समय राजस्थान के जैसलमेर में तैनात हैं। कहा कि भारतीय सेना में जाने का जो सपना उन्होंने बचपन में देखा था, वह अब गर्व का अनुभव हो रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed