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तीन माह में लक्ष्य के इतर महज 8.96 फीसदी गेहूं की खरीद
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अंबेेडकरनगर। गेहूं की सरकारी खरीद इस बार पूर्व निर्धारित लक्ष्य से कोसो दूर रही। तीन माह तक चली सरकारी खरीद में तय लक्ष्य 65 हजार एमटी के इतर जिले में महज 5821.798 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद ही हो सकी। जो निर्धारित लक्ष्य का सिर्फ 8.96 फीसदी रही। खरीद का लक्ष्य पाने के लिए बढ़ायी गयी 15 दिन की मियाद भी खरीद को बढ़ाने में कोई खास असर नहीं दिखा पायी। 30 जून को खत्म हुई तीन माह की खरीद अवधि के दौरान मात्र 1916 किसानों से ही 5821.798 एमटी गेहूं की खरीदा ही हो सकी। आढ़तियों की ओर से महंगे दामों में गेहूं खरीदने से खरीद कार्य से जुड़ी सरकारी समितियां इस बार पूरी तरह से फेल साबित हुई।
मूल्य समर्थन योजना के तहत 2015 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने की शुरुआत एक अप्रैल से हुई थी। इसके लिए चिह्नित चार क्रय एजेंसियों को 15 जून तक 96 क्रय केंद्रों पर 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। लक्ष्य के करीब भी न पहुंचने पर शासन ने क्रय एजेंसियों के लिए खरीद की मियाद को 15 से बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया था। जिले में गेहूं खरीद का कार्य खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएफ व भारतीय खाद्य निगम को सौंपा गया था।
तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में गेहूं खरीद कभी भी जोर नहीं पकड़ पायी। आढ़तियों द्वारा किसानों के घर पहुंचकर उपज की खरीद करने के साथ तत्काल भुगतान की सुविधा मुहैया कराने से क्रय केंद्रों पर खरीद के दौरान सन्नाटा ही पसरा दिखा। काफी प्रयास के बाद भी 31 मई तक खरीद के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ छह प्रतिशत गेहूं ही खरीदा जा सका। इसके दृष्टिगत ही शासन को खरीद की अंतिम तिथि पहले 15 जून और फिर 30 जून तक बढ़ानी पड़ी। लेकिन इसका भी कोई खास असर खरीद पर नजर नहीं आया।
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बीते वर्ष जिले को मिले 65 हजार एमटी के खरीद के इतर 60992.79 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। खाद्य एवं विपणन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि जिले में खरीद के तय लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। तमाम कोशिशों के बाद भी क्रय केंद्रों पर किसानों के न पहुंचने से खरीद का कार्य उम्मीद से भी काफी कम हुआ है।
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मूल्य समर्थन योजना के तहत 2015 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने की शुरुआत एक अप्रैल से हुई थी। इसके लिए चिह्नित चार क्रय एजेंसियों को 15 जून तक 96 क्रय केंद्रों पर 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। लक्ष्य के करीब भी न पहुंचने पर शासन ने क्रय एजेंसियों के लिए खरीद की मियाद को 15 से बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया था। जिले में गेहूं खरीद का कार्य खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएफ व भारतीय खाद्य निगम को सौंपा गया था।
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तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में गेहूं खरीद कभी भी जोर नहीं पकड़ पायी। आढ़तियों द्वारा किसानों के घर पहुंचकर उपज की खरीद करने के साथ तत्काल भुगतान की सुविधा मुहैया कराने से क्रय केंद्रों पर खरीद के दौरान सन्नाटा ही पसरा दिखा। काफी प्रयास के बाद भी 31 मई तक खरीद के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ छह प्रतिशत गेहूं ही खरीदा जा सका। इसके दृष्टिगत ही शासन को खरीद की अंतिम तिथि पहले 15 जून और फिर 30 जून तक बढ़ानी पड़ी। लेकिन इसका भी कोई खास असर खरीद पर नजर नहीं आया।
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बीते वर्ष जिले को मिले 65 हजार एमटी के खरीद के इतर 60992.79 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। खाद्य एवं विपणन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि जिले में खरीद के तय लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। तमाम कोशिशों के बाद भी क्रय केंद्रों पर किसानों के न पहुंचने से खरीद का कार्य उम्मीद से भी काफी कम हुआ है।