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Ambedkar Nagar News: 10 लाख के चेक बाउंस मामले में फिर से होगी सुनवाई
Tue, 23 Jun 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 23 Jun 2026 11:03 PM IST
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अंबेडकरनगर। अपर जिला व सत्र न्यायाधीश प्रथम रामविलास सिंह की कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में निचली अदालत की ओर से परिवाद खारिज किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। मामले को पुनर्विचार के लिए संबंधित न्यायालय में भेजते हुए परिवादिनी को दो जुलाई को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामला टांडा क्षेत्र की लीलावती वर्मा और अभय यादव से संबंधित है। परिवाद के अनुसार, अभय यादव ने समझौते के तहत 10 लाख रुपये का चेक दिया था जो बंधन बैंक की आजमगढ़ शाखा के खाते से जारी हुआ था। लीलावती ने 17 जनवरी 2023 को चेक को भारतीय स्टेट बैंक टांडा शाखा में प्रस्तुत किया लेकिन 20 जनवरी को बैंक ने खाता बंद होने की सूचना दी।
भुगतान न मिलने पर दो फरवरी 2023 को विधिक नोटिस भेजा गया किंतु न तो राशि अदा की गई और न ही नोटिस का जवाब दिया गया। सिविल जज (जूडि)/न्यायिक मजिस्ट्रेट टांडा ने दो अगस्त 2024 को यह कहते हुए परिवाद खारिज कर दिया था कि परिवादिनी लगातार अनुपस्थित रही और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
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इसके विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका में बताया गया कि शपथपत्र व साक्ष्य शपथपत्र पहले ही रिकॉर्ड पर दाखिल किए जा चुके थे। दो अगस्त 2024 को उनकी अनुपस्थिति पौत्री की अचानक तबीयत खराब होने के कारण हुई थी। कोर्ट ने पाया कि केवल अनुपस्थिति के आधार पर परिवाद खारिज किया गया। निचली अदालत का आदेश निरस्त कर मामला पुनः विचारार्थ भेज दिया गया।
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मामला टांडा क्षेत्र की लीलावती वर्मा और अभय यादव से संबंधित है। परिवाद के अनुसार, अभय यादव ने समझौते के तहत 10 लाख रुपये का चेक दिया था जो बंधन बैंक की आजमगढ़ शाखा के खाते से जारी हुआ था। लीलावती ने 17 जनवरी 2023 को चेक को भारतीय स्टेट बैंक टांडा शाखा में प्रस्तुत किया लेकिन 20 जनवरी को बैंक ने खाता बंद होने की सूचना दी।
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भुगतान न मिलने पर दो फरवरी 2023 को विधिक नोटिस भेजा गया किंतु न तो राशि अदा की गई और न ही नोटिस का जवाब दिया गया। सिविल जज (जूडि)/न्यायिक मजिस्ट्रेट टांडा ने दो अगस्त 2024 को यह कहते हुए परिवाद खारिज कर दिया था कि परिवादिनी लगातार अनुपस्थित रही और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
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इसके विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका में बताया गया कि शपथपत्र व साक्ष्य शपथपत्र पहले ही रिकॉर्ड पर दाखिल किए जा चुके थे। दो अगस्त 2024 को उनकी अनुपस्थिति पौत्री की अचानक तबीयत खराब होने के कारण हुई थी। कोर्ट ने पाया कि केवल अनुपस्थिति के आधार पर परिवाद खारिज किया गया। निचली अदालत का आदेश निरस्त कर मामला पुनः विचारार्थ भेज दिया गया।